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अकाल मृत्यु का कारण भी बन सकता है वास्तु दोष, ध्यान रखें 4 बातें

जिस घर में नैऋत्य दिशा (पश्चिम-दक्षिण) में दोष होता है, वहां बहुत ज्यादा नेगेटिविटी होती है।

Danik Bhaskar | May 01, 2018, 05:00 PM IST

रिलिजन डेस्क। वास्तु शास्त्र में हर दिशा का एक विशेष महत्व बताया गया है। इन दिशाओं में असर दोष हो तो इसका बुरा असर पूरे परिवार के सदस्यों पर पड़ता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रफुल्ल भट्ट के अनुसार, जिस घर में नैऋत्य दिशा (पश्चिम-दक्षिण) में दोष होता है, वहां बहुत ज्यादा नेगेटिविटी होती है।
इस वजह से वहां रहने वाले लोगों की अकाल मृत्यु जैसे- आत्महत्या, एक्सीडेंट, हत्या आदि कारणों से परिवार के सदस्यों की मौत होने की संभावना सबसे अधिक होती है। इसलिए अगर नेऋत्य दिशा के दोष हो तो तुरंत उसका निराकरण कर लेना चाहिए।

1. जिस घर के वायव्य (उत्तर-पश्चिम) कोण में कुआं और पश्चिम-नैऋत्य में पश्चिम की ओर ढलाऊ बरामदा हो, कम्पाउंड वॉल के पश्चिम-नैऋत्य में भी दरवाजा हो तो उस घर का मालिक आत्महत्या कर सकता है।
2. जिस घर के नैऋत्य या पश्चिम-नैऋत्य में कम्पाउंड वॉल व घर का द्वार हो तो उस घर के लोग बदनामी, जेल, एक्सीडेंट या खुदकुशी के शिकार हो सकते हैं या हार्ट अटैक, ऑपरेशन, एक्सीडेंट, हत्या, लकवा जैसी असामयिक मृत्यु के शिकार भी हो सकते हैं।
3. ऐसे घर में जहां पूर्व दिशा में मुख्य द्वार हो, चारदीवारी के पूर्व आग्नेय (पूर्व-दक्षिण) दिशा में एक और फाटक हो या घर की ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) कट गया हो। वहां रहने वाले परिवार के सदस्यों की मृत्यु आत्महत्या से संभावित है।
4. जिस घर में वायव्य में कुआं और पश्चिम-नैऋत्य में पश्चिम की ओर ढलाऊ बरामदा हो, पश्चिम में निम्न स्थल या चहारदीवारी की दक्षिण-नैऋत्य में फाटक हो। ऐसे घर में रहने वाले लोग आत्महत्या कर सकते हैं।