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इंसाफ के लिए पुलिस की बर्बरता, झूठ भी सहा लेकिन फैसला हमें जीवनभर की सजा दे गया

3 वर्ष पहले
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मैं संजय रैना, उस कविता का पति जिसके निर्ममता से छह टुकड़े कर दिए गए... लेकिन जज साहब बोले आरोपी बरी, तो हमारा दिमाग ही सन्न रह गया। बरी कैसे हो सकता है, पुलिस तो बोलती थी कि सजा होगी, हमने तो डीआईजी साहब को बोला था नारको टेस्ट करवा लो... कविता के गहने नहीं मिले हैं... टॉप्स थे, झुमकियां थीं, मंगलसूत्र था, घड़ी थी... कुछ तो मिल जाता... उसे ही सबूत बना देते। 


दैनिक भास्कर में देखा 12 कड़ियां नहीं जोड़ी, हमें तो आधी-आधी रात को परेशान करते थे पुलिस वाले, बोलते थे आज कॉल डिटेल मिल गई, टॉवर लोकेशन आ गई, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग मिल गई, महेश ने ही कविता को मारा, उसने अपनी पत्नी की बहन को भी मारा, तो क्या यह सब कुछ झूठ है, रिकॉर्डिंग ली थी तो कहां गई... कोर्ट तक क्यों नहीं पहुंची।


बता रहे हैं कुर्ता पहचाना नहीं, हमने तो बता दिया था कि कुर्ता कविता का ही है, फ्लैट तक पुलिस को एक लड़की ले गई थी, उसे कोर्ट में क्यों नहीं बताया, पूरा सच बताने मेें क्या चला जाता उनका, ताले की चाबियां तो हमें भी दिखाई थीं, बोले तो थे कि ताला लगा था, अब कैसे बोल रहे हैं ताला था नहीं। टीकम ने तो बोला था फ्लैट पर महेश ही रहता था, फिर पूरी कहानी कैसे बदल दी, हमें तो पुलिस वालों ने बताया था कि चाकू पर पाइप मार-मारकर लाश को काटा तो कोर्ट को क्यों नहीं बताया...। हत्या के बाद हमें डेढ़ महीने तक खूब परेशान किया पुलिस ने। मुझे इतना टॉर्चर किया पुलिस वालों ने, खूनी ही मानकर उठा ले गए... वे मुझे गालियां देते हुए, तू यहां खड़ा रहे, ऐसा कर, कपड़े उतार, डंडे पड़ेंगे, ऐसा-ऐसा बोला जो बता नहीं सकता। अगर पुलिस ने सही जांच नहीं की तो उसमें हमारी क्या गलती, क्या सजा जीवनभर हम भुगतेंगे, क्या अब कोई जांच नहीं होगी, मेरा हंसता-खेलता परिवार था साहब... किसने मार डाला कविता को... मेरी बच्ची रोज मां-मां बोलती है, उसे क्या समझाऊं, मम्मी जैसी मेहंदी लगा दो, मम्मी जैसी चोटी करना है, उसे क्या जवाब दूं बोलो। मैंने तीन साल हिम्मत नहीं हारी भैया, यही ठान लिया था कि कविता वापस तो नहीं आने वाली, उसके हत्यारे को सजा मिल जाए, इसी बात से सुकून कर लेंगे।

 

संजय का संताप : उसने पत्नी और 9 व 13 साल के दो बच्चों की मां को खो दिया। पत्नी को ऐसी मौत दी गई जिससे हर इंसान सकते में आ गया। हत्यारा सामने लाने के बजाय पति को ही हत्यारा करार देती रही पुलिस। 108 दिन बाद आखिर एक व्यक्ति सामने लाया गया और कहा गया कि हत्या उसने की है। अब 890 दिन बाद कोर्ट ने सबूतों में जुड़ाव न होने की बात कह कर उसे बरी कर दिया। कविता रैना के पति की पीड़ा, उसी की जुबानी...

 

हाई कोर्ट में अगले सप्ताह चुनौती

कविता रैना हत्याकांड में शासन की ओर से पैरवी करने वाले अतिरिक्त लोक अभियोजक निर्मलकुमार मंडलोई का कहना है जिला कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में चुनौती देंगे। फैसला रद्द करने के लिए हाई कोर्ट में याचिका अगले सप्ताह दायर की जाएगी। 

 

सीबीआई या निष्पक्ष एजेंसी करे जांच 

सीनियर एडवोकेट चंपालाल यादव ने कहा उन्होंने निर्दोष को बचाया है। जांच निष्पक्ष एजेंसी या सीबीआई से कराई जाना चाहिए। असली चेहरा सामने लाकर पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए। सरकार से भी मांग करेंगे कि नए सिरे से जांच कर असली अपराधी का पता लगाया जाए।

 

 

फैसला देख पुलिस बनाएगी प्लान

डीआईजी हरिनारायणाचारी मिश्र ने बताया फैसले की कॉपी अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। फैसले की कॉपी का अध्ययन करने के बाद तय होगा कि मामले में अपील की जाए या नए सिरे से जांच करवाई जाए।

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