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फीफा वर्ल्ड कप में पहली बार इस्तेमाल हो रहा है VAR सिस्टम, 98.9% सटीक रहता है इसका फैसला

अगर वीएआर को मैदानी रैफरी के फैसले में कोई भी गलती दिखती है, तो वो उसे बदलने की ताकत रखते हैं।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jul 07, 2018, 03:40 PM IST

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    गैजेट डेस्क. रूस में चल रहे फीफा वर्ल्ड कप में पहली बार वीडियो असिस्टेंट रैफरी सिस्टम यानी वीएआर का इस्तेमाल किया गया है। इसके जरिए फुटबॉल मैदान पर हुई किसी भी हलचल या फैसले को अंतिम रूप देने या किसी भी तरह के संदेह को दूर करने के लिए उन मोमेंट्स के वीडियो को रिप्ले कर देखा जाता है। तकनीकी रूप से काफी आधुनिक होने के बाद भी वीएआर विवादों में रहा है। क्योंकि कई एक्सपर्ट इसके इस्तेमाल के पक्ष हैं तो कुछ इसके विपक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं।

    ऐसा पहली बार हुआ है जब इस तकनीक का इस्तेमाल वर्ल्डकप में किया जा रहा है। जानें क्या है यह तकनीक? कैसे और कब लागू हुई और कितनी फायदेमंद है?

    क्या है ये तकनीक और कैसे करती है काम?
    - फुटबॉल में वीएआर किसी तीसरे रैफरी की भूमिका में होता है, लेकिन इस रैफरी के पास टीवी के तमाम कैमरों के अलग-अलग एंगल से मिल रहे फुटेज देखने की सुविधा भी रहती है। वीडियो असिस्टेंट रैफरी मैच के दौरान होने वाले गोल, पेनल्टी और रेड कार्ड का हमेशा रिव्यू करते हैं भले ही मैदान में मौजूद रैफरी ने इनके रिव्यू के लिए न कहा हो।
    - अगर वीएआर को इनमें से किसी में भी कोई गलती मिलती है तो वे रैफरी के फैसले को पलटने की ताकत रखते हैं। इसी तरह अगर मैदानी रैफरी को कोई निर्णय लेने में संशय हो रहा है तो वह वीएआर की मदद ले सकता है।
    - वीएआर मैच के परिणाम बदलने वाले चार हालात में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है- गोल, पेनल्टी देना/ पेनल्टी नहीं देने का फैसला, सीधे रेड कार्ड दिखाना या रैफरी की तरफ से की गई कोई भूल।

    98.9 फीसदी सटीक रहता है फैसला
    - वीएआर तकनीक का इस्तेमाल मार्च 2016 से ही किया जा रहा है, लेकिन फीफा पिछले दो सालों से ये परख रही है कि क्या इस तकनीक की मदद से खेल के परिणामों को और बेहतर किया जा सकता है। अभी तक इस तकनीक का इस्तेमाल 20 मैचों में किया गया है।
    - पिछले दो साल में दुनियाभर में हुए वीएआर के ट्रायल पर बनी एक आधिकारिक रिपोर्ट में बताया गया था कि इस तकनीक का फैसला लगभग 98.9% सटीक रहा है।

    इन दो मैचों पर डाल चुका है असर
    1. पुर्तगाल vs ईरान :
    टूर्नामेंट के शुरुआती मुकाबलों के दौरान पुर्तगाल और ईरान के बीच खेला गया एक मैच 1-1 से बराबरी पर छूटा था। इस मैच में वीएआर तकनीक पर कई सवाल खड़े किए गए। दरअसल, जिस वक्त पुर्तगाल 1-0 से आगे था, उस समय ईरान के फुटबॉलर सईद इजातोलाही ने पुर्तगाल के स्टार खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो को बॉक्स के अंदर धकेल दिया था, हालांकि इसके बाद खेल जारी रहा। लेकिन ब्रेक के बाद मैदान में मौजूद रैफरी एनरिक केकरेस ने वीएआर तकनीक की मदद से अपना फैसला बदला और पुर्तगाल को एक पेनल्टी दी गई।

    2. स्पेन vs मोरक्को :स्पेन और मोरक्को का मैच भी 2-2 से बराबरी पर छूटा था। इस मैच में स्पेन काफी वक्त तक 1-2 से पीछे चल रहा था। अंतिम पलों में इएगो एस्पस ने गोल कर अपनी टीम को बराबरी दिलवाई थी लेकिन एक पल के लगा कि वे ऑफ साइड से बाहर चले गए हैं। बाद में रेफरी ने फुटेज दोबारा खंगाला और पाया कि एस्पस ऑनसाइड थे, इस तरह स्पेन को बराबरी का यह गोल दिया गया।

    बदल जाते हैं नतीजे :वीएआर को लेकर जानकारों में अलग-अलग मत है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि वीएआर की मदद से उन गलतियों को रोका जा सकता है, जिसकी वजह से पूरे टूर्नामेंट के नतीजे बदल जाते हैं। कुछ कहते हैं कि वीएआर से मैच के दौरान वक्त बर्बाद होता है। खासतौर पर वे लोग जो स्टेडियम में बैठकर मैच देख रहे होते हैं, उन्हें यह नहीं दिख रहा होता कि वीएआर के वक्त क्या चल रहा है। वहीं कुछ कहते हैं कि बाकी खेलों के मुकाबले फुटबॉल में वीडियो तकनीक बहुत कम यूज होती है।

    क्रिकेट: क्या होता है डीआरएस सिस्टम?
    1. हॉक-आई:
    ये एक आभासी बॉल ट्रैकिंग तकनीक है, जिसका इस्तेमाल LBW के फैसलों में होता है। इसके जरिए तय करते हैं कि क्या गेंद पैड से टकराने के बाद विकेटों से टकराएगी या नहीं?

    2. हॉट-स्पॉट:ये तकनीक LBW और कैच के करीबी मामलों में तस्वीरें साफ करती है। इसमें बल्लेबाज की तस्वीर काली हो जाती है और जहां गेंद टकराती है वो हिस्सा सफेद हो जाता है।

    3. स्निकोमीटर:ये डीआरएस का अहम हिस्सा है। इसमें माइक्रोफोन के जरिए ये तय किया जाता है कि आखिर गेंद बल्ले के किनारे से टकरा है या नहीं?

    बाकी खेल में कौनसी तकनीक का होता है इस्तेमाल?
    - जिस तरह फुटबॉल में वीएआर तकनीक का उपयोग किया जाने लगा है, दूसरे खेलों में भी सही निर्णय के स्तर तक पहुंचने के लिए नई टेक्नोलॉजी का उपयोग होने लगा है। इनमें टेनिस में हॉक-आई तकनीक से यह पता लगाया जाता है कि बॉल कोर्ट के अंदर गिरी या बाहर।
    - वैसे ही रग्बी में टीएमओ यानी टेलीविजन मैच ऑफिशियल का इस्तेमाल किया जाता है। इसी तरह जब फीफा ने रूस में होने वाले विश्व कप में वीएआर तकनीक को इस्तेमाल करने की बात कही तो फुटबॉल के लिए यह एक बेहद महत्वपूर्ण पल था।

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