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डाउनलोड करेंइंटरनेशनल डेस्क. नीदरलैंड के एक गांव दुनिया के लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं। बार्ले-नस्सो नाम का यह गांव बेल्जियम की बॉर्डर के बीचों-बीच है। यही हाल बेल्जियम के बार्ले-हटरेग गांव का है, जिसका करीब 5 किमी का हिस्सा नीदरलैंड के अंदर है। इन गांवों के कई घर और दुकानों के बीचों-बीच से बॉर्डर निकलती है। बॉर्डर की पहचान के लिए खींची गई है सफेद पट्टी...
- दरअसल, 1831 में बेल्जियम और नीदरलैंड दो स्वतंत्र राष्ट्र बने। इसी दौरान दोनों देशों के बीच बॉर्डर बनाया गया। नीदरलैंड के लिए यह बॉर्डर पोस्ट 214 तो बेल्जियम के लिए 215 है।
- लेकिन, नीदरलैंड का बार्ले नस्सो और बेल्जियम का बार्ले-हटरेग ऐसी जगह स्थित थे, जिन्हें अलग-अलग करना मुश्किल था।
- इसी के चलते दोनों देशों की सरकारों ने आम सहमति से इन दोनों गांवों के बीच सफेद पट्टी खींचकर बॉर्डर को चिन्हित किया।
- इसके चलते दोनों गांवों इन देशों का हिस्सा बन गए। इसी के चलते इन दोनों गांवों के लोगों को एक-दूसरे के देश में जाने के लिए वीजा की जरूरत नहीं पड़ती।
कई मकान और दुकानें बॉर्डर के बीचों-बीच हैं
- फोटो में दिखाई दे रहा यह घर दोनों देशों की बॉर्डर के बीच है। मजेदार बात यह है कि इस घर में दो बेल भी लगी हैं। एक बेल्जियम की बॉर्डर पर तो दूसरी नीदरलैंड की। यह घर हमेशा से ही टूरिस्टों के लिए आकषर्ण का केंद्र रहा है।
- इसके अलावा यहां कई दुकानें, कैफे और रेस्टोरेंट भी है, जो दोनों देशों के बीचों-बीच है। यानी की आप एक कदम बढ़ाते ही दूसरे देश में पहुंच सकते हैं।
आगे की स्लाइड्स में देखें यहां की कुछ ऐसी ही मजेदार फोटोज...
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