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आधार कार्ड की बजाय वर्चुअल आईडी से खरीद सकेंगे नई सिम, 1 जुलाई से लागू होगा नियम

वर्चुअल आईडी एक 16 डिजिट का अस्थाई नंबर होती है, जिसे आधार नंबर की जगह इस्तेमाल किया जा सकता है।

Dainik Bhaskar

Jun 14, 2018, 12:44 PM IST
virtual id can be used in the place of aadhaar number to get a new sim card says dot

यूटिलिटी डेस्क। नया सिम कार्ड खरीदने के लिए अब आधार कार्ड की जरुरत नहीं होगी। इसके लिए आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन (DoT) ने बुधवार को सभी टेलीकॉम ऑपरेटर्स को आदेश दिया है कि वो नए सिम कार्ड के रजिस्ट्रेशन के लिए वर्चुअल आईडी या लिमिटेड केवायसी (ग्राहकों के बारे में कम से कम जानकारी) का इस्तेमाल करें। बता दें कि वर्चुअल आईडी (आधार ई-केवायसी) या लिमिटेड केवायसी भी आधार का ही हिस्सा है, लेकिन इसमें आधार नंबर पता नहीं चलता।

1 जुलाई से लागू होगा नियम

- डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन ने 12 जून को एक सर्कुलर जारी किया है। इसमें कहा गया है कि सभी टेलीकॉम ऑपरेटर्स नए सिम कार्ड के रजिस्ट्रेशन के लिए वर्चुअल आईडी या लिमिटेड केवायसी को शुरू करें।
- सर्कुलर में कहा गया है कि ये नया नियम 1 जुलाई से लागू होगा। वर्चुअल आईडी या लिमिटेड केवायसी के जरिए अब ग्राहक नया सिम कार्ड खरीद सकते हैं, साथ ही मौजूदा ग्राहक अपने सिम का री-वेरिफिकेशन कराने के लिए वर्चुअल आईडी का इस्तेमाल कर सकते हैं।

कैसे काम करेगा ये?

- इसके लिए सबसे पहले ग्राहकों को अपनी वर्चुअल आईडी जनरेट करने होगी, जो आधार की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन की जा सकती है।
- इसके बाद आधार नंबर की जगह यही वर्चुअल आईडी टेलीकॉम ऑपरेटर्स को दे सकते हैं।
- टेलीकॉम कंपनी वेरिफिकेशन के लिए ग्राहकों को एक यूआईडी टोकन देगी, जिसके जरिए ग्राहक अपनी वर्चुअल आईडी के जरिए वेरिफिकेशन प्रोसेस पूरी कर सकते हैं।
- ये ठीक उसी तरह रहेगा, जिस तरह आधार के जरिए वेरिफिकेशन किया जाता है। आधार के जरिए वेरिफिकेशन कराने के लिए टेलीकॉम कंपनी के एक नंबर पर कॉल करके आधार पर दी गई जानकारी देकर वेरिफिकेशन कराया जाता है।

सीओएआई ने कहा- ये अच्छा फैसला

- सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के डायरेक्टर जनरल राजन मैथ्यूज़ ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे अच्छा बताया है।
- उन्होंने कहा कि इस कदम से सब्सक्राइबर्स का विश्वास बढ़ेगा और बिना आधार नंबर दिए ही सिम कार्ड का ऑथेंटिक वेरिफिकेशन हो जाएगा।

क्या है वर्चुअल आईडी?
- 16 डिजिट का अस्थाई नंबर, जिसे आधार की जगह इस्तेमाल किया जा सकेगा।
- इसके तहत आधार में मिलने वाली विस्तृत जानकारियों की जगह पर सीमित सूचनाएं ही मिल पाएंगी।
- यूजर आधार नंबर से वर्चुअल आईडी तैयार कर सकेंगे।

कैसे जनरेट होगी वर्चुअल आईडी?
- वर्चुअल आईडी आधार से मैप होगी। इसे यूआईडीएआई की वेबसाइट से जनरेट किया जा सकेगा। जरूरत के मुताबिक, आधार होल्डर कई बार आईडी जनरेट कर सकते हैं। नई वर्चुअल आईडी जनरेट होने पर पुरानी अपने आप कैंसल हो जाएगी।
- वर्चुअल आईडी कम्प्‍यूटर से बना 16 डिजिट का नंबर होगा, जो जरूरत पड़ने पर तत्‍काल जारी किया जाएगा। इसे 1 मार्च से ट्रायल के तौर पर जनरेट भी किया जा रहा है।

लिमिटेड होगी आधार से जुड़ी केवाईसी
- दूसरी ओर, सरकार केवाईसी के लि‍ए आधार के इस्‍तेमाल को भी सीमित करेगी। अभी कई एजेंसि‍यों के पास आपकी डि‍टेल पहुंच जाती है और वो उसे अपने पास रखते हैं।
- जब केवाईसी के लि‍ए आधार का जरूरत ही कम हो जाएगी, तो ऐसी एजेंसि‍यों की संख्‍या भी घट जाएगी, जि‍नके पास आपकी डि‍टेल होगी।

वर्चुअल आईडी के फायदे
- वर्चुअल आईडी बनने से किसी भी डॉक्यूमेंट के वेरिफिकेशन के दौरान आधार नंबर देने की जरूरत नहीं होगी।
- वर्चुअल आईडी से ही नाम, पता और फोटोग्राफ का वेरिफिकेशन हो जाएगा।
- यूजर हर बार नई वर्चुअल आईडी बना सकेगा, पुरानी आईडी कैंसिल हो जाएगी।
- एजेंसियों को आधार कार्ड होल्डर की ओर से वर्चुअल आईडी जेनरेट करने की अनुमति नहीं होगी।

देश में अब तक कितने आधार होल्डर?
- अथॉरिटी के मुताबिक, अब तक देश के 121 करोड़ लोगों को आधार नंबर (बायोमैट्रिक आईडी) जारी किए जा चुके हैं। कोई भी इसे पहचान के तौर पर पेश कर सकता है।

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