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ऑडी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिरासत में, 1 करोड़ डीजल कारों की इमिशन टेस्टिंग में गड़बड़ी करने का आरोप

Dainik Bhaskar

Jun 18, 2018, 03:46 PM IST

डीजल कारों की इमिशन टेस्टिंग में गड़बड़ी मामले में फॉक्सवैगन के 20 अफसरों के खिलाफ जांच चल रही है।

जर्मनी अथॉरि‍टीज ने फॉक्सवैग जर्मनी अथॉरि‍टीज ने फॉक्सवैग
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  • 2009 में फॉक्सवैगन ने चीटिंग सॉफ्टवेयर बनाया, 2015 में धोखधड़ी की बात कबूली
  • फॉक्सवैगन का सॉफ्टवेयर ऐसा था जो टेस्टिंग के दौरान कार्बन इमिशन को घटा हुआ बताता था

बर्लिन. फॉक्सवैगन की 1.1 करोड़ डीजल कारों की इमिशन टेस्टिंग में धांधली के मामले में सोमवार को ऑडी के ग्लोबल सीईओ रूपर्ट स्टैडलर को हिरासत में लिया गया। स्टैडलर पर ऐसे जाली दस्तावेज तैयार करने का आरोप है, जिनके आधार पर चीटिंग सॉफ्टवेयर लगी डीजल कारें यूरोप में बेचने की अनुमति मिल गई थी। एक हफ्ते पहले ही उनके घर पर छापा पड़ा था। प्रॉसिक्यूटर्स का कहना है कि स्टैडलर सबूत मिटाने की कोशिश कर सकते थे। इसलिए उन्हें हिरासत में लिया जाना जरूरी था। सीईओ की गिरफ्तारी के बाद फ्रैंकफर्ट की ट्रेडिंग में जर्मन कार मेकर फॉक्सवैगन के शेयर्स 2.6% तक गिर गए।

जर्मन न्यूज एजेंसी डीपीए के मुताबिक, जांच में 20 से ज्यादा लोग संदेह के घेरे में हैं। इन पर यूरोप में चीटिंग सॉफ्टवेयर वाली कारें बचने का आरोप है। अमेरिका में चल रही जांच में फॉक्सवैगन के पूर्व सीईओ मार्टिन विन्टरकोर्न समेत 9 मैनेजर आरोपी हैं।

ऑडी के इंजीनियरों पर शक : फॉक्सवैगन ग्रुप की लग्जरी कार मेकर कंपनी ऑडी इस वजह से भी शक के घेरे में है क्योंकि माना जाता है कि उसके इंजीनियरों ने चीटिंग करने वाला सॉफ्टवेयर तैयार करने में मदद की थी। इसी सिलसिले में ऑडी के इंजन डेवलपमेंट के पूर्व प्रमुख डब्ल्यू. हैट्ज सितंबर 2017 से हिरासत में हैं। जर्मनी की सरकार ने इसी महीने में यूरोप में मौजूद अॉडी की 60 हजार A6 और A7 कारों को रिकॉल करने को कहा था ताकि उनमें अवैध इमिशन कंट्रोल सॉफ्टवेयर हटाए जा सकें।

फॉक्सवैगन ने सितंबर 2015 में कबूली थी धोखाधड़ी : फॉक्सवैगन पर आरोप है कि उसने 2009 के बाद फॉक्सवैगन, पोर्श और ऑडी ब्रांड के तहत बिकने वाली 1.1 करोड़ कारों में ऐसा सॉफ्टवेयर डाला था, जिसके जरिए इमिशन टेस्ट के सही नतीजे सामने ही नहीं आते थे। इसका खुलासा एक अमेरिकी एजेंसी ने किया था। इसके बाद सितंबर 2015 में कंपनी ने खुद यह धोखाधड़ी करने की बात मानी थी।

अमेरिका ने नियम सख्त किए तो साॅफ्टवेयर बना : 2009 में हुई संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में अमेरिका, चीन, यूरोप सहित कई बड़े देशों ने ग्लोबल वार्मिंग को कम करने पर सहमति जताई। इसके लिए इमिशन कम करने की प्लानिंग हुई। अमेरिका समेत कई देशों ने नई गाड़ियों के लिए नियम सख्त कर दिए। इसी सख्ती के बाद 2009 के अंत में फॉक्सवैगन ने अपनी कार में एईसीडी (ऑक्सीलरी ईमीशन कंट्रोल) नाम का सॉफ्टवेयर लगाकर ईपीए के पास टेस्टिंग के लिए भेजना शुरू किया था।

टेस्टिंग के दौरान प्रदूषण काबू में आ जाता था : यूएस एन्वायर्नमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी (ईपीए) ने बताया था कि इमिशन टेस्टिंग के लिए फॉक्सवैगन ने एक अलग डिवाइस बना रखी थी। यानी जब कभी फॉक्सवैगन की कारें इमिशन टेस्टिंग के लिए जाती थीं तो यह डिवाइस पॉल्यूशन को कंट्रोल कर लेती थी। इसके बाद जब भी यह कार नॉर्मल ड्राइविंग सिचुएशंस की टेस्टिंग पर जाती थी तो इमिशन कंट्रोल का सॉफ्टवेयर अपने आप बंद हो जाता था।

गलत जानकारी देता था सॉफ्टवेयर : फॉक्सवैगन का सॉफ्टवेयर ऐसा था जो टॉर्क को कंट्रोल कर एवरेज और कार का ओवरऑल परफॉर्मेंस बढ़ा देता था। वहीं, कार्बन इमिशन को घटा हुआ बताता था। उस वक्त यह बात भी सामने आई थी कि कंपनी ने इमिशन कंट्रोल सॉफ्टवेयर के नाम पर कस्टमर्स से 7 हजार डॉलर तक अतिरिक्त लागत वसूली थी।

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