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डाउनलोड करेंकोटा. समंदरगढ़ में गत 20 साल से पानी का संकट है। यहां सर्दी में भी पानी की दिक्कत रहती है। गर्मियों में तो केवल दो कुओं में पानी बचता है। यह फोटो सरकारी कुएं का है, जिसमें मुश्किल से एक फीट पानी बचा है। लगभग 25 साल से इसकी सफाई नहीं हुई। इसमें गंदगी भरती गई और पानी कम होता गया। गांव से दो किमी दूर स्थित इस कुएं से पानी भरने के लिए महिलाएं रस्सी से बांधकर घड़े कुएं में लटकाती हैं। फिर एक व्यक्ति 25 फीट गहरे कुएं में उतरकर सभी घड़े एक-एक कर भरता है।
25 फीट गहरे कुएं में सिर्फ एक फीट पानी बचा है
सफाई नहीं होती, कीचड़ का पानी पीने की मजबूरी
दूसरी तस्वीर भरतपुर के भुसावर उपखंड से...
भुसावर के रणधीरगढ़ में पेयजल टंकी, ट्यूबवैल तो हैं लेकिन इनमें पानी नहीं आता। ग्रामीणों ने घरों तक पानी की सप्लाई के लिए छतों पर पानी की पाइपलाइन बिछाई है। निजी ट्यूबवैल मालिक इनसे प्रतिमाह Rs.400-600 रुपए वसूलते हैं। छतों पर विद्युत तार नहीं बल्कि पाइप लाइनों का जाल, Rs.400- 600 प्रतिमाह में निजी ट्यूबवैलों से मिलता है पानी।
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