पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंजयपुर. प्रदेश में प्रचंड गर्मी के साथ ही पानी का भी प्रचंड संकट पैदा हो गया है। 29 शहर पानी के संकट का सामना कर रहे हैं। पिछले साल कम बारिश के चलते सतही जल स्त्रोत सूख गए। इन शहरों में 443 टैंकर्स हर रोज 3082 फेरे कर पानी पहुंचा रहे हैं। इनमें दौसा, अजमेर, किशनगढ़, केकड़ी, बसवा, बांदीकुई, सवाईमाधोपुर, अलवर, झुंझुनूं, बारां, बूंदी, कोटा (टेलएंड एरिया), झालावाड़, जयपुर और चूरू शामिल हैं।
669 पानी के टैंकर्स हर रोज 3343 फेरे कर पानी पहुंचा रहे
ग्रामीण इलाकों में 2000 गांव और ढाणियां ऐसी हैं, जहां पीने के पानी के लिए सतही जल बिलकुल सूख चुका है। इन इलाकों में कंटिंजेंसी के लिए 669 पानी के टैंकर्स हर रोज 3343 फेरे कर पानी पहुंचा रहे हैं। इनमें से कई जगह तो 3 से 4 दिन में पानी सप्लाई हो रहा है। पिछले साल से तुलना करें तो शहरी क्षेत्र में पिछले साल मई-जून में 16 शहर जल संकट का सामना कर रहे थे। इनमें 258 टैंकरों के जरिए हर रोज 1771 फेरे कर पानी सप्लाई हो रही थी। ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले साल 853 गांव ही ऐसे थे, जहां पानी की किल्लत थी और इनमें 334 टैंकरों की 1451 ट्रिप लग रही थी।
कई जगह तो टैंकरों से सप्लाई भी नियमित नहीं
बसवा, बांदीकुई और दौसा, बूंदी, देई, नेनवा में पानी का संकट सबसे ज्यादा है। दौसा में बीसलपुर से पानी सप्लाई को 20 लाख लीटर से बढ़ाकर 25 लाख लीटर प्रतिदिन किया गया है। बांदीकुई और बसवा में पानी टैंकरों के 100 फेरों से सप्लाई हो रही है, लेकिन यह सप्लाई तीन से चार दिनों में हो रही है। बूंदी के देई और नैनवां में जियोफिजिलक सर्वे में सभी 45 सतही जल स्त्रोत खत्म बताए गए हैं। अब यहां के लिए गुड़ा बांध से पानी लाने के लिए योजना तैयार हो रही है। इसके लिए गुड़ा बांध में 10 एमसीएफटी पानी रिजर्व रखा गया है।
पिछले चार साल में 36 पेयजल प्रोजेक्ट
पीएचईडी विभाग के प्रमुख सचिव रजत मिश्र ने बताया कि राज्य सरकार ने पिछले साढ़े चार सालों में पेयजल के लिए 36 परियोजनाएं पूरी की हैं। इनसे 30 शहरों को सतही पेयजल सप्लाई प्रोजेक्ट से जोड़ा जा चुका है।
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.