3 दिनों के लाॅकडाउन पर फिरा पानी, प्रशासन की लापरवाही से टूट गया सोशल डिस्टेंस का चक्रव्यूह

Shimla News - करसोग में मुनाफाखोरों पर प्रशासन का चाबुक चलने वाला है। अब तय नियमों से अधिक वसूली के मामले सामने आने पर दोषियों...

Mar 27, 2020, 07:20 AM IST
Rohru News - water falls on 3 day lockdown social distress breaks due to administration39s negligence

करसोग में मुनाफाखोरों पर प्रशासन का चाबुक चलने वाला है। अब तय नियमों से अधिक वसूली के मामले सामने आने पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कोरोना वायरस से पैदा हुई इस संकट की घड़ी में कुछ सब्जी विक्रेता अधिक कमाई के चक्कर मे मनमानी पर उतर आएं हैं। ऐसे सभी सब्जी विक्रेताओं की लूट खसूट को रोकने के लिए प्रशासन ने नियमों का चाबुक चला दिया है। सब्जी विक्रेताओं को दो टूक चेतावनी दी गई है कि भविष्य में अगर तय दामों से अधिक मुनाफा लेने का मामला सामने आता है तो ऐसी सभी दुकानों को सील किया जाएगा। प्रशासन ने संकट की इस घड़ी में करसोग के सभी दुकानदारों से सहयोग की भी अपील की है। अगर इसके बाद भी कोई दुकानदार नियमों को तोड़ते हुए पाया जाता है तो ऐसे लोगों पर अब प्रशासन का डंडा चलेगा। करसोग में लगे कर्फ्यू में प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। एसडीएम समेत डीएसपी खुद बाजार में घूमकर निरीक्षण कर रहे हैं।

करसोग में खाद्य वस्तुओं का कोई संकट नहीं है। अधिक मुनाफा कमाने, रेट लिस्ट न लगाने और गली सड़ी सब्जियां बेचने पर अब तक 5 सब्जी विक्रेताओं के चालान काटे गए हैं। एसडीएम करसोग सुरेंद्र ठाकुर का कहना है कि तय नियमों से अधिक मुनाफा कमाने वालों की अब सब्जियों की दुकानें सील की जाएगी। इस बारे में वार्निंग दे दी गई है। उन्होंने कहा कि सभी दुकानदारों से अपील की गई है इसी घड़ी में सभी का सहयोग करें। बाजार में जरूरी खाद्य वस्तुओं का कोई संकट नहीं है। लोग संयम से काम लें।

किन्नौरमें 10 से 2 बजे तक मिलेगा जरूरी सामान

रिकांगपिओ|उपायुक्त गोपाल चंद ने आज यहां बताया कि 24 मार्च के अधिसूचित आदेशों में आज संशोधन किया गया है जिसके तहत अब जिले में किराना, दूध, सब्जी, फल व मांस मछली की दुकानें प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक खुली रहेगी। उन्होंने बताया कि जिले में थोक व परचून मार्जन तथा अधिकतम विक्रय मूल्य भी निर्धारित किए गए हैं। तथा खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के जिला नियंत्रक खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति को इन आदेशों का कड़ाई से पालन करवाने के भी निर्देश दिए गए हैं।

करसोग में मुनाफाखोरों पर चलेगा प्रशासन का चाबुक, अधिक वसूली करने पर दुकान सील करने के आदेश

भास्कर न्यूज | रोहड़ू

तीन दिनों तक घरों में लाॅकडाउन रहे लोगों के सब्र के बांध पर रोहड़ू प्रशासन की लापरवाही व गैर जिम्मेदाराना कार्यशैली ने पानी फेर दिया। बिना किसी सुनियोजित योजना व ब्लू प्रिंट के कर्फ्यू में दी गई छुट ने कोराेना वायरस के खिलाफ रचे गए सोशल डिस्टेंस चक्रव्यूह को तोड़ दिया। ग्रामीण इलाकों में खाद्य सामग्री की कमी होने के चलते लोग बड़ी संख्या में रोहड़ू टाउन पंहुचे। जिससे पुलिस के लिए भी स्थिति को संभालना मुश्किल हो गया।

रोहड़ू क्षेत्र के निकटवर्ती करीब तीस से चालीस गावों के लोग राशन सहित अपनी हर छोटी-मोटी जरुरत के लिए पुरी तरह से रोहड़ू कस्बे पर निर्भर है। लगातार 21 दिनों के लाॅकडाउन की घोषणा से लोगों को घर में खाद्य सामग्री की कमी को पूरा करने के लिए रोहड़ू बाजार की तरफ दौड़ पड़े। अढाल पंचायत के उप प्रधान टीनू ठाकुर,स्पैल निवासी अरूण, पोमी बशला निवासी हैप्पी मैहता सहित समस्त क्षेत्रवासियों ने बाजार में उमडी भीड़ के लिए प्रशासन को दोषी ठहराया है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि प्रशासन को पंचायत प्रधानों, सचिवों, पंचायत सदस्यों व पंचायत स्तर पर कार्य कर रहे सरकारी कर्मचारियों के साथ मिलकर खाद्य सामग्री गांव गांव तक पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए या फिर एरिया वाईस लोगों को जरूरत का सामान खरीदने के लिए बाजार आने की अनुमति दी जाए। क्षेत्रवासियों ने तीन दिनों तक बड़े धैर्य के साथ वैश्विक आपदा की इस घडी में देश का साथ दिया है। विधायक राेहड़ू मोहनलाल ब्राक्टा का कहना है कि मुझे उम्मीद है आने वाले समय में भी क्षेत्रवासी कोरोना के संक्रमण के खतरे को समझते हुए विवेक से काम लेगें। कर्फ्यू में ढील के दौरान जो भीड़ उमड़ी वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन प्रशासन को यह समझना होगा, बिना किसी जमीनी तैयारी के लोगों तक खाद्य सामग्री की व्यवस्था किए बिना किसी को भी ज्यादा समय तक घरों के अंदर रख पाना संभव नहीं हो पाएगा। प्रदेश सरकार व प्रशासन को प्रभावी योजना बनानी होगी

कई गांवों में उत्पन्न हो सकता है खाद्य सामग्री का संकट: कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए कई लोग रोहड़ू एंव अन्य शहरों को छोड़ कर हाल ही में गांव पंहुचे है। गांव में राशन की बड़ी दुकानें नाम मात्र की है। जहां पर आटा चावल जैसी खाद्य सामग्री नहीं बेची जाती। परिणाम स्वरूप कई परिवारों के पास 21 दिन का राशन भी मौजूद नहीं है जिसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों के कई लोग प्रशासन द्वारा गाडि़यों के आवागमन की रोक की परवाह न करते हुए बाजार पहुंचे।

ग्रामीण क्षेत्रों में की जा सकती थी आपूर्ति: कर्फ्यू को सफल बनाने के लिए जमीनी स्तर पर प्रशासन ने कोई भी पुख्ता इंतजाम नहीं किए थे। प्रशासन की तरफ से तो ग्रामीण क्षेत्र के लोगों तक राशन एवं अन्य जरूरी सामान को पहुंचाने की कोई व्यवस्था की गई और न ही उन्हें बाजार तक वाहन लाने की अनुमति दी गई। जबकि प्रशासन के पास एरिया वाईस राशन एंव जरूरत की वस्तुओं की सप्लाई करने या एरिया वाइस ग्रामीणों को बाजार आने की अनुमति देने जैसे कई विकल्प थे।


रोहड़ू में सामान की खरीददारी के लिए उमड़ी लोगों की भीड़।

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