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डाउनलोड करेंनितिन श्रीवास्तव
बीबीसी संवाददाता
नामचीन पर्यावरणविद राजेंद्र पचौरी ने बीबीसी हिंदी से हुई बातचीत में कहा है कि भारत में साफ़ पानी के दामों को बढ़ाने की सख़्त आवश्यकता है.
उन्होंने कहा, \"सवा अरब की भारतीय आबादी के लिए पीने के पानी की कमी के साथ-साथ उसमे बढ़ता हुआ प्रदूषण एक बड़ी चुनौती है.\"
वे कहते हैं, \"इससे निबटने के लिए जल प्रबंधन के ढाँचे को बदलना होगा और पानी के दामों को बढ़ाना होगा۔ जैसे कृषि क्षेत्र में ये कहना लोकप्रिय नहीं है कि पानी महंगा किया जाए लेकिन इस क्षेत्र में पानी ज़रुरत से ज़्यादा बर्बाद किया जाता है.\"
वायु प्रदूषणगंगा नदी में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है.
उनका कहना है, \"हमें एक बूँद पानी से पैदा होने वाले फ़सल का औसत बढ़ाना ही होगा.\"
पानी के प्रदूषण के अलावा भारत की युवा पीढ़ी के लिए वायु प्रदूषण एक बड़ी चुनौती है और कुछ बड़े शहरों में लगभग 35 फीसदी बच्चे सांस की तकलीफ़ों से जूझ रहे हैं.
आरके पचौरी के अनुसार भारत में आज तक वायु प्रदूषण को रोकने के तरीके कारगर नहीं हुए हैं.
उन्होंने बताया, \"सार्वजनिक परिवहन को बेहतर करने की ज़रुरत है जिससे गरीब आदमी भी इन तक पहुँच सके. दूसरी ज़रुरत है कुछ शहरों में गाड़ियों की बिक्री पर सरचार्ज लगाने की. इसी के बाद कुछ परिणाम दिखेंगे.\"
नदियों की सफाईभारत में पर्यावरण संबंधी लगभग हर मामले में प्रदूषण एक बड़ी चनौती होती जा रही है और नदियां भी अछूती नहीं रहीं हैं.
केंद्र में आसीन एनडीए सरकार ने भी नदियों की, और, ख़ासतौर से गंगा नदी की सफ़ाई पर विशेष बल दिया है.
आरके पचौरी को लगता है कि जब तक भारत के स्थानीय समुदाय नदियों की सफ़ाई को लेकर जागरूक नहीं होंगे तब तक कोई हल निकलना मुश्किल है.
उन्होंने कहा, \"नदियों के आस-पास रहने वाले या वहां बसे उद्योगों को शामिल करके संगठन बनाने पड़ेंगे जिससे जो भी प्रदूषण की रेखा को पार करेगा उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई हो सके\".
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