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फुटबॉल टीम को नहीं मिली एशियाड जाने की मंजूरी, फेडरेशन ने आईओए से कहा- हम अपने खर्च पर भेजने को तैयार

एआईएफएफ महासिचव कुशाल दास ने कहा- फैसले लेते वक्त आईओए ने भारतीय फुटबॉल टीम की प्रतिभा को नजरअंदाज किया।

Danik Bhaskar | Jul 02, 2018, 08:07 PM IST
अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ के महासचिव कुशाल दास ने कहा है कि आईओए ने अपना फैसला नहीं बदला तो हम खेल मंत्रालय के पास जाएंगे। अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ के महासचिव कुशाल दास ने कहा है कि आईओए ने अपना फैसला नहीं बदला तो हम खेल मंत्रालय के पास जाएंगे।

  • आईओए ने फैसला नहीं बदला तो भारतीय फुटबॉल टीम एशियाई खेलों में नहीं खेल पाएगी
  • 24 साल में पहली बार ऐसा होगा, भारतीय टीम 1994 हिरोशिमा एशियाड में भी नहीं खेली थी
  • कुशाल दास ने आईओए के रवैये को दुखद और निराशाजनक करार दिया है
  • एआईएफएफ ने महिला फुटबॉल टीम को विकसित करने के भी महत्वपूर्ण प्रयास किए
  • महिला टीम एशियाई खेलों की तैयारी के लिए स्पेन में टूर्नामेंट खेलना चाहती थी

नई दिल्ली. अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) अगस्त में इंडोनेशिया के जकार्ता में होने वाले एशियाई खेलों में भारतीय फुटबॉल टीम को भेजने का खर्चा उठाने को तैयार है। उसका यह बयान भारतीय ओलिंपिक संघ (आईओए) के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें उसने भारतीय फुटबॉल टीम को एशियाई खेलों में भाग लेने की मंजूरी नहीं दी है। आईओए के नियमानुसार, एशियाड में सिर्फ उन्हीं राष्ट्रीय टीमों को भाग लेने की मंजूरी दी जाती है, जिसकी एशिया में रैंकिंग में 1 से 8 के बीच है। भारतीय पुरुष फुटबॉल टीम एशिया में 14वें नंबर पर है।

आईओए ने फैसला लेने से पहले हमसे कोई बातचीत नहीं कीः एआईएफएफ
फैसले के बारे में आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी नहीं देने के लिए एआईएफएफ ने आईओए की आलोचना भी की। सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एआईएफएफ महासचिव कुशाल दास ने कहा, "कभी नहीं! आईओए की ओर से कभी भी इस संबंध में न तो कोई आधिकारिक बयान और न ही कोई मौखिक सूचना दी गई। आईओए कभी भी संवाद शिष्टाचार का पालन नहीं करता है। उसने यह तक नहीं बताया कि किस कारण फुटबॉल टीम को एशियाई खेलों में भाग लेने से रोका गया है।"

एआईएफएफ ने पत्र लिखकर जताई नाराजगी
यह पूछने पर कि आप अपने खर्चे पर फुटबॉल टीम को क्यों नहीं भेज रहे कुशाल ने कहा, "हमने आईओए को एक पत्र लिखा है। जिसमें हमने उसके फैसले पर आधिकारिक तौर पर अपनी निराशा जताई है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि यदि पैसे का कोई मामला है तो हम यात्रा और वहां रहने का पूरा खर्चा उठाने को तैयार हैं। आईओए ने 4 जून को जवाब देने को कहा था, लेकिन इतने दिन बीत जाने के बाद भी उनकी ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई है कि वे क्या चाहते हैं?" यहां तक कि एआईएफएफ के अध्यक्ष प्रफुल पटेल ने खुद आईओए प्रेसीडेंट नरेंदर बत्रा से इस संबंध में बात की। बत्रा ने भी उन्हें पुनर्विचार के लिए एक स्पष्टीकरण मसौदा तैयार करने के लिए कहा।


आईओए को भारतीय फुटबॉल के प्रति अपना नजरिया बदलना चाहिए
कुशाल ने कहा कि आईओए को समझना चाहिए कि फुटबॉल एक वैश्विक खेल है। इसे अलग नजरिये से देखा जाना चाहिए। पिछले 3 साल में भारतीय फुटबॉल ने शानदार सफलताएं हासिल की हैं। 2015 में टीम की फीफा रैंकिंग 173 थी, जो अब 97 हो गई है। यही नहीं, उसने 2019 में संयुक्त अरब अमीरात में होने वाले एएफसी एशिया कप के लिए भी क्वालिफाई किया है। एआईएफएफ फीफा अंडर-17 विश्व कप का सफल आयोजन भी कर चुका है।

आईओए के फैसला का भारतीय फुटबॉल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा
आईओए के इस कदम से भारतीय फुटबॉल पर क्या प्रभाव पड़ेगा, के सवाल पर कुशाल दास ने कहा, "इस समय सीनियर टीम के 11 खिलाड़ी 23 साल से कम उम्र के हैं। एशियाई खेलों के बाद सैफ चैम्पियनशिप होनी है, जहां टीम में बड़ी संख्या में युवा खिलाड़ी होंगे। इसके बाद 2019 में एएफसी अंडर-23 क्वालिफायर में भाग लेना है। ऐसे में एशियाई खेलों में भाग लेने से हमारे खिलाड़ियों को काफी कुछ सीखने को मिलता।"

कुशाल दास का दावा है कि भारतीय खेल प्राधिकरण और सरकार फेडरेशन का समर्थन करेंगे। कुशाल दास का दावा है कि भारतीय खेल प्राधिकरण और सरकार फेडरेशन का समर्थन करेंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुशाल दास के अलावा राष्ट्रीय टीमों के मौजूदा निदेशक अभिषेक यादव (दाएं) भी मौजूद थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुशाल दास के अलावा राष्ट्रीय टीमों के मौजूदा निदेशक अभिषेक यादव (दाएं) भी मौजूद थे।