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खाइयां खोदकर उनमें रहते थे हम

एक वर्ष पहले
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अनूप जलोटा, अाइसोलेशन में

 चाइना से वॉर के दौरान के कर्फ्यू देखे हैं। तब खाईयां खोदी जाती थी। दिनभर खाई में रहो। क्योंकि ऊपर से जहाज बम फेंक सकता है। वह कर्फ्यू तो कभी नहीं भूले। रात को लाइट बंद करते थे और किसी ने लाइट जलाई तो उसे मना करते थे कि लाइट मत जलाओ। सतर्क रहते थे। आज भी सतर्क रहने की जरूरत है। क्योंकि यह जो कोरोना है वह भी एक बम है। बस यह एक साइलेंट बम है, जिसकी आवाज भी नहीं आती। मुझे भी इस वायरस के डर से होटल में आइसोलेट करके रखा गया। ठीक होने पर घर भेजा गया,पर कहा गया कि 14 दिन लोगों से मिलिए नहीं। जो लोग आइसोलेशन से भागते हैं उनसे कहिए कि डरें नहीं, औरों के भले के लिए ऐसा जरूर करें।

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