ओ म जी

--Advertisement--

सिर पर छेद करने से लेकर मूत्र स्नान तक, पुराने दौर में थे इलाज के अजीब तरीके

पुराने दौर में लोग झोलाछाप डॉक्टर्स के चक्कर में उलटे-सीधे इलाज कराते रहते हैं। सैंकड़ों साल पहले ऐसे लोगों का ही बोलबा

Dainik Bhaskar

May 02, 2018, 06:02 PM IST
Shocking Treatments to Cure illness in Ancient Times

मेडिकल साइंस ने भले ही आज बहुत तरक्की कर ली हो, पर पुराने दौर में लोग झोलाछाप डॉक्टर्स के चक्कर में उलटे-सीधे इलाज कराते रहते हैं। सैंकड़ों साल पहले ऐसे लोगों का ही बोलबाला था। तब ये इलाज के नाम पर मरीजों के ऊपर तरह-तरह के प्रयोग करते रहते थे। उस समय की इन अजीबोगरीब टेक्नीक्स के बारे में जानकर ही आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। इलाज के लिए दिमाग में छेद...

पुराने समय में पागलपन या किसी दिमागी बीमारी का इलाज करने के लिए सिर में छेद कर दिया जाता था। इसके लिए सिर को ड्रिलिंग मशीन जैसे उपकरण से बहुत जोर से दबाया जाता था। आप समझ सकते हैं कि इसमें कितना दर्द होता होगा। जाहिर है, इस दर्द के कारण दिमागी बीमारी वाला व्यक्ति तड़प उठता होगा। ऐसे दावे हैं कि ये दर्द पागलपन जैसी बीमारी दूर कर देता था। यह विधि ट्रेपानेशन कहलाती है।

आगे की स्लाइड्स में देखें, मूत्र स्नान से लेकर शरीर पर मुर्गा रगड़े जाने तक इलाज के अजीबोगरीब तरीके...

प्राचीन यूरोप में मूत्र को औषधि माना जाता था। ऐसी मान्यता थी कि दिन में एक बार अपने मूत्र से स्नान करने और उसका सेवन करने से बीमारियां दूर हो जाती थी। प्राचीन यूरोप में मूत्र को औषधि माना जाता था। ऐसी मान्यता थी कि दिन में एक बार अपने मूत्र से स्नान करने और उसका सेवन करने से बीमारियां दूर हो जाती थी।
जवाहरात खाना : पुराने दौर में महंगे जवाहरात और पत्थरों को चूरन बनाकर बीमार लोगों को खिलाया जाता था। जवाहरात खाना : पुराने दौर में महंगे जवाहरात और पत्थरों को चूरन बनाकर बीमार लोगों को खिलाया जाता था।
19वीं शताब्दी में कफ के इलाज के लिए ऐसा सिरप बनाया गया जो आपके होश उड़ा सकता है। उस दौर में सिरप में मोरफीन के लिए ड्रग्स हीरोइन मिलाई जाती थी। इससे भी चौंकाने वाली बात ये कि इसे बच्चों के लिए बनाया गया था। 19वीं शताब्दी में कफ के इलाज के लिए ऐसा सिरप बनाया गया जो आपके होश उड़ा सकता है। उस दौर में सिरप में मोरफीन के लिए ड्रग्स हीरोइन मिलाई जाती थी। इससे भी चौंकाने वाली बात ये कि इसे बच्चों के लिए बनाया गया था।
शरीर पर मुर्गा रगड़ना : 16वीं शताब्दी में थॉमस वाइसरी इलाज का ये अजीब तरीका लेकर आए थे। इसमें रोगी के शरीर पर मुर्गा का पिछला हिस्सा रगड़ा जाता था। शरीर पर मुर्गा रगड़ना : 16वीं शताब्दी में थॉमस वाइसरी इलाज का ये अजीब तरीका लेकर आए थे। इसमें रोगी के शरीर पर मुर्गा का पिछला हिस्सा रगड़ा जाता था।
इंसुलिन शॉक थेरेपी : 1927 में मनोवैज्ञानिक इस अजीब तरीके से दिमगाी बीमारी वाले लोगों का इलाज करते थे। ऐसा कहा जाता है कि इस थेरेपी में मरीज के शरीर में भारी मात्रा में इंसुलिन डाला जाता था, जिससे वो कुछ समय के लिए कोमा में चला जाता था, लेकिन बाद में ठीक होकर वापस लौटता था। इंसुलिन शॉक थेरेपी : 1927 में मनोवैज्ञानिक इस अजीब तरीके से दिमगाी बीमारी वाले लोगों का इलाज करते थे। ऐसा कहा जाता है कि इस थेरेपी में मरीज के शरीर में भारी मात्रा में इंसुलिन डाला जाता था, जिससे वो कुछ समय के लिए कोमा में चला जाता था, लेकिन बाद में ठीक होकर वापस लौटता था।
X
Shocking Treatments to Cure illness in Ancient Times
प्राचीन यूरोप में मूत्र को औषधि माना जाता था। ऐसी मान्यता थी कि दिन में एक बार अपने मूत्र से स्नान करने और उसका सेवन करने से बीमारियां दूर हो जाती थी।प्राचीन यूरोप में मूत्र को औषधि माना जाता था। ऐसी मान्यता थी कि दिन में एक बार अपने मूत्र से स्नान करने और उसका सेवन करने से बीमारियां दूर हो जाती थी।
जवाहरात खाना : पुराने दौर में महंगे जवाहरात और पत्थरों को चूरन बनाकर बीमार लोगों को खिलाया जाता था।जवाहरात खाना : पुराने दौर में महंगे जवाहरात और पत्थरों को चूरन बनाकर बीमार लोगों को खिलाया जाता था।
19वीं शताब्दी में कफ के इलाज के लिए ऐसा सिरप बनाया गया जो आपके होश उड़ा सकता है। उस दौर में सिरप में मोरफीन के लिए ड्रग्स हीरोइन मिलाई जाती थी। इससे भी चौंकाने वाली बात ये कि इसे बच्चों के लिए बनाया गया था।19वीं शताब्दी में कफ के इलाज के लिए ऐसा सिरप बनाया गया जो आपके होश उड़ा सकता है। उस दौर में सिरप में मोरफीन के लिए ड्रग्स हीरोइन मिलाई जाती थी। इससे भी चौंकाने वाली बात ये कि इसे बच्चों के लिए बनाया गया था।
शरीर पर मुर्गा रगड़ना : 16वीं शताब्दी में थॉमस वाइसरी इलाज का ये अजीब तरीका लेकर आए थे। इसमें रोगी के शरीर पर मुर्गा का पिछला हिस्सा रगड़ा जाता था।शरीर पर मुर्गा रगड़ना : 16वीं शताब्दी में थॉमस वाइसरी इलाज का ये अजीब तरीका लेकर आए थे। इसमें रोगी के शरीर पर मुर्गा का पिछला हिस्सा रगड़ा जाता था।
इंसुलिन शॉक थेरेपी : 1927 में मनोवैज्ञानिक इस अजीब तरीके से दिमगाी बीमारी वाले लोगों का इलाज करते थे। ऐसा कहा जाता है कि इस थेरेपी में मरीज के शरीर में भारी मात्रा में इंसुलिन डाला जाता था, जिससे वो कुछ समय के लिए कोमा में चला जाता था, लेकिन बाद में ठीक होकर वापस लौटता था।इंसुलिन शॉक थेरेपी : 1927 में मनोवैज्ञानिक इस अजीब तरीके से दिमगाी बीमारी वाले लोगों का इलाज करते थे। ऐसा कहा जाता है कि इस थेरेपी में मरीज के शरीर में भारी मात्रा में इंसुलिन डाला जाता था, जिससे वो कुछ समय के लिए कोमा में चला जाता था, लेकिन बाद में ठीक होकर वापस लौटता था।
Click to listen..