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इन पौधों को देखकर समझ नहीं आता कि ये कीड़े खाते हैं, खूबसूरत पत्तियों में जकड़ कर शिकार करते हैं

ये आम पौधों से थोड़ा अलग दिखते हैं। शिकार को पकड़ने में इनकी पत्तियां भूमिका निभाती हैं।

Dainik Bhaskar

Aug 11, 2018, 07:44 PM IST
डायोनिया : यह एक चीटी तक की आहट को पहचान लेता है। डायोनिया : यह एक चीटी तक की आहट को पहचान लेता है।

लाइफस्टाइल डेस्क. पौधे सिर्फ ऑक्सीजन ही नहीं देते बल्कि कीट-पतंगों से भी बचाते हैं। खास किस्म के इन पलांट्स को कीटभक्षी पौधे कहते हैं। ये दलदली जमीन या पानी के पास उगते हैं और इन्हें नाइट्रोजन की अधिक जरूरत होती है। जब इन्हें यह पोषक तत्व नहीं मिलता तो ये कीट-पतंगे को खाकर इसकी कमी को पूरा करते हैं। ये आम पौधों से थोड़ा अलग दिखते हैं। शिकार को पकड़ने में इनकी पत्तियां अहम रोल अदा करती हैं। ऐसे कीटभक्षी पौधों की विश्व में 400 प्रजातियां होती हैं। जिसमें से 30 तरह के पौधे भारत में पाए जाते हैं। जानते हैं ऐसे ही पौधों के बारे में.....

1- पिचर प्लांट

इसे नेपिन्थिस के नाम से भी जाना जाता है। यह कीटभक्षी पौधा असम की खसिया और गारो पहाड़ियों पर पाया जाता है। इसकी पत्तियों के सिरे पर एक सुराही जैसा आकार होता है। यही इसका फंदा है जिसमें यह कीट-पतंगों को फंसाता है। यह सुराही डेढ़ से आठ इंच तक लंबी होती है। इसके मुंह और किनारे की ओर शहद की थैलियां होती हैं। कीट पतंगे सुराही के रंग से आकर्षित होकर शहद के लालच में अपनी जान गंवा बैठते हैं। चिकनी दीवार के कारण ये रेंगकर बाहर भी निकल नहीं पाते। इसके तल में रस रहता है जो इन्‍हें जल्‍दी ही पचा जाता है और पचे हुए भाग को इसकी दीवारें सोख लेती हैं। इसे घटपर्णी के नाम से भी जाना जाता है।

2- ड्रोसैरा
इसे सनड्यूज़ भी कहते हैं। यह एक बहुत सुंदर कीटभक्षी पौधा है जो शिमला, मसूरी और नैनीताल में पाया जाता है। ड्रोसेरा को मक्खाजाली भी कहा जाता है। इसकी गोल-गोल पत्तियों के किनारे लाल रंग की घुण्‍डी वाले आलपिन सरीखे बाल होते हैं जिनसे एक चिपचिपा रस निकलता रहता है। ड्रोसैरा पौधे से निकला यह रस धूप की रोशनी में ओस की तरह चमकता है। छोटे कीट पतंगों को यही रस चिपका लेता है और फिर घुण्डियां मुड़कर चारों ओर से उसे घेर लेती हैं।

3- डायोनिया
इसमें कीट पतंगों को पकड़ने वाला फंदा जमीन पर सजी पत्तियां होती हैं। यह भी ड्रोसैरा की तरह ही शिकार करता है। यह अमेरिका में पाया जाता है। इसके अपने शिकार को पचाने में एक हफ्ते से अधिक का समय लग जाता है। डायोनिया मस्कीप्यूला कीटभक्षी पौधों में सबसे खतरनाक माना जाता है। इसके वार से कोई कीट नहीं बच सकता। इसके दो पत्ते इसके लिए शिकार का काम करते हैं जिनके ऊपर लगे बाल इतने सक्रिय होते हैं कि चींटी तक की मौजूदगी तक पहचान लेते हैं। जैसे ही शिकार करीब आता है 1 सेकंड में उसे निगल लेता है।

4- सेरोसेनिया
इस पौधे में थैली नुमा पत्तियां जमीन पर एक झुंड में सजी रहती हैं। आकर्षक रंग की इन पत्तियों पर कुछ ग्रंथियां रहती हैं जिनमें शहद होता है। कीट पतंगे इसके रंग और शहद के कारण थैली के भीतर चले जाते हैं और कांटों में फंस जाते हैं और बाहर नहीं निकल पाते।

5- यूट्रीकुलेरिया
इसे ब्लैडरवर्ट भी कहते हैं। यह ज्यादातर साफ पानी में पाया जाता है। इसकी कुछ प्रजाति पहाड़ी सतह वाली जगह में भी मिलती हैं। बारिश के दौरान इसी ग्रोथ अधिक होती है। इसकी पत्तियां गोल गुब्बारेनुमा होती हैं। जैसे ही कोई कीट-पतंगा इसके नजदीक आता है इस मौजूद रेशे उसे जकड़ लेते हैं। पत्तियों में निकलने वाला एंजाइम कीटो को खत्म करने में मदद करता है।

घर में लगाएं तो इन बातों का रखें ध्यान
- दूसरे इनडोर प्लांट के मुकाबले इनको अधिक देभखाल की जरूरत होती है।
- इन्हें ऐसी जगह लगाएं जहां सीधी धूप न आती हो और नमी अधिक हो।
- इसे सुबह-सुबह 1-2 घंटे हल्की धूप में रख सकते हैं लेकिन 9 बजे के बाद नहीं।
- ये ज्यादातर पानी में या दलदली जगहों पर उगते हैं। इसलिए इन्हें फिशटैंक में लगा सकते हैं।
- इसका पानी समय-समय पर बदलते रहें।

पिचर प्लांट : यह कीटभक्षी पौधा असम की खसिया और गारो पहाड़ियों पर पाया जाता है। पिचर प्लांट : यह कीटभक्षी पौधा असम की खसिया और गारो पहाड़ियों पर पाया जाता है।
ड्रोसैरा : ड्रोसैरा पौधे से निकला यह रस धूप की रोशनी में ओस की तरह चमकता है। ड्रोसैरा : ड्रोसैरा पौधे से निकला यह रस धूप की रोशनी में ओस की तरह चमकता है।
सेरोसेनिया : इसकी थैली नुमा पत्तियों में मौजूद शहद के कारण शिकार फंसता है। सेरोसेनिया : इसकी थैली नुमा पत्तियों में मौजूद शहद के कारण शिकार फंसता है।
यूट्रीकुलेरिया : यह ज्यादातर साफ पानी में पाया जाता है। इसकी कुछ प्रजाति पहाड़ी सतह वाली जगह में भी मिलती हैं। यूट्रीकुलेरिया : यह ज्यादातर साफ पानी में पाया जाता है। इसकी कुछ प्रजाति पहाड़ी सतह वाली जगह में भी मिलती हैं।
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डायोनिया : यह एक चीटी तक की आहट को पहचान लेता है।डायोनिया : यह एक चीटी तक की आहट को पहचान लेता है।
पिचर प्लांट : यह कीटभक्षी पौधा असम की खसिया और गारो पहाड़ियों पर पाया जाता है।पिचर प्लांट : यह कीटभक्षी पौधा असम की खसिया और गारो पहाड़ियों पर पाया जाता है।
ड्रोसैरा : ड्रोसैरा पौधे से निकला यह रस धूप की रोशनी में ओस की तरह चमकता है।ड्रोसैरा : ड्रोसैरा पौधे से निकला यह रस धूप की रोशनी में ओस की तरह चमकता है।
सेरोसेनिया : इसकी थैली नुमा पत्तियों में मौजूद शहद के कारण शिकार फंसता है।सेरोसेनिया : इसकी थैली नुमा पत्तियों में मौजूद शहद के कारण शिकार फंसता है।
यूट्रीकुलेरिया : यह ज्यादातर साफ पानी में पाया जाता है। इसकी कुछ प्रजाति पहाड़ी सतह वाली जगह में भी मिलती हैं।यूट्रीकुलेरिया : यह ज्यादातर साफ पानी में पाया जाता है। इसकी कुछ प्रजाति पहाड़ी सतह वाली जगह में भी मिलती हैं।
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