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लगातार छींकें, नाक से पानी और आंख-नाक में खुजली है एलर्जिक राइनाइटिस के लक्षण, धूल, धुएं, धूम्रपान और डियोड्रेंट से बचें

एलर्जी से बचने के लिए तेज गंध वाले परफ्यूम, डियोड्रेंट, इत्र और अगरबत्ती के धुएं से दूर रहना बेहतर होगा।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Jul 09, 2018, 07:18 PM IST

लगातार छींकें, नाक से पानी और आंख-नाक में खुजली है एलर्जिक राइनाइटिस के लक्षण, धूल, धुएं, धूम्रपान और डियोड्रेंट से बचें

हेल्थ डेस्क.लगता छींकें, नाक से पानी आना, आंख व नाक में खुजली रहना एलर्जिक राइनाइटिस के लक्षण है। इनके बने रहने पर सूंघने की क्षमता में कमी, नेज़ल पोलिप, कान संबंधी रोग और अस्थमा आदि समस्याएं हो सकती हैं। दवा या सर्जरी एलर्जी का स्थायी हल नहीं है। दवाएं इसे नियंत्रित कर सकती हैं लेकिन एलर्जी को जड़ से दूर नहीं कर सकतीं। छोटी-छोटी सावधानी इससे बचाती हैं। ईएनटी एक्सपर्ट डॉ. शुभकॉम आर्यसे जानते हैं इससे कैसे बचें...

12 प्वाइंट्स : कैसे करें एलर्जी से बचाव

  • धूल, धुएं व ठंड से बचिए। जरूरत पड़ने पर मास्क का प्रयोग करना चाहिए। धूल उड़ते समय मुंह व नाक को कपड़े से ढक कर रखिए।
  • घर के पर्दे, बेडशीट, चादर, कालीन को हमेशा साफ रखिए। धूल जमने से बचाने के लिए इन पर प्लास्टिक कवर भी लगाया जा सकता है।
  • झाड़ू से सफाई करने के बजाए गीले कपडे से साफ कीजिए। वैक्यूम क्लीनर का प्रयोग भी कर सकते हैं।
  • घर की दीवारों पर फंगस न जमने दें। फंगस होने पर ब्लीच से साफ कीजिए।
  • फर व बाल वाले जानवरों से दूर रहिए। सॉफ्ट टॉयज से भी बचना चाहिए।
  • तेज गंध वाले परफ्यूम, डियोड्रेंट, इत्र, अगरबत्ती के धुएं आदि से दूर रहना बेहतर होगा।
  • धूम्रपान न करें और न ही ऐसे लोगों के आसपास रहें, जो धूम्रपान कर रहे हों।
  • कार या गाड़ी में जहां तक संभव हो खिड़की के शीशे चढ़ाकर रखिए। ज़रूरत के अनुसार एसी का प्रयोग कर सकते हैं।
  • घर में कॉकरोच व चूहों के प्रवेश पर नियंत्रण रखें। घर में अनुपयोगी पुराने फर्नीचर, गद्दे, पुरानी फाइलों, किताबों, जूते-चप्पलों को इकट्ठा न होने दें।
  • पेड़-पौधों के फूलों से निकलने वाले कुछ छोटेछोटे कण जिन्हें पोलेन्स कहते हैं, एलर्जन्स के रुप में हवा में विचरण करते है।
  • सुबह 10 बजे से पहले व सर्यास्त के बाद वातावरण में पोलेन्स का स्तर सर्वाधिक रहता है। इनके संपर्क में आने से बचिए।
  • एलर्जी के लक्षणों की अनदेखी न करें। एंटीएलर्जिक दवाएं या स्प्रे से इसे नियंत्रित कीजिए।

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