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क्या होते हैं गोल्डन सेकंड्स, कार्डियक अरेस्ट या हार्ट अटैक होने पर क्यों पल-पल है अहम, समझें दोनों में फर्क

अधिकतर लोग हार्ट अटैक और कार्डिएक अरेस्ट के बीच का अंतर नहीं पहचान पाते हैं, जिससे कई बार गम्भीर स्थिति बन जाती है।

Danik Bhaskar | Jun 11, 2018, 07:09 PM IST
ट्रॉमेटिक इवेंट के बाद पहले एक घंटे के भीतर मरीज़ को सही मेडिकल देखभाल मिल जाए तो उसकी जान बचने की सम्भावना कई गुना बढ़ जाती है। ट्रॉमेटिक इवेंट के बाद पहले एक घंटे के भीतर मरीज़ को सही मेडिकल देखभाल मिल जाए तो उसकी जान बचने की सम्भावना कई गुना बढ़ जाती है।

हेल्थ डेस्क. गोल्डन ऑवर का कॉन्सेप्ट उन मामलों पर लागू होता है, जिसमें मरीज़ को कोई गम्भीर चोट आई हो अथवा कोई अन्य मेडिकल इमरजेंसी हो। गम्भीर चोट के बाद का पहला एक घंटा बेहद महत्वपूर्ण होता है, जिसमें सही इलाज और प्रबंधन से मरीज़ की जान अथवा उसके शरीर के अंगों को ख़राब होने से बचाया जा सकता है। ट्रॉमेटिक इवेंट के बाद पहले एक घंटे के भीतर मरीज़ को सही मेडिकल देखभाल मिल जाए तो उसकी जान बचने की सम्भावना कई गुना बढ़ जाती है। हार्ट अटैक के मामलों में अक्सर यह सलाह दी जाती है कि ऐसा होने के बाद पहले एक घंटे के भीतर मरीज़ को इमरजेंसी केयर मिलनी चाहिए। लेकिन कार्डिएक अरेस्ट के मामले में ऐसा नहीं कह सकते हैं। इसमें मरीज़ को ठीक करने के लिए सिर्फ़ कुछ सेकंड होते हैं। डॉ. वनिता अरोड़ा, डायरेक्टर एवं हेड, इंटर्वेंशनल कार्डियोलॉजी मैक्स हॉस्पिटल दिल्ली से जानते हैं हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के बारे में...

हार्ट अटैक-कार्डिएक अरेस्ट में भ्रम
हार्ट अटैक :
किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक तब आता है, जब हृदय तक ऑक्सीजन पहुंचाने वाले रक्त का प्रवाह सही ढंग से नहीं होता है, जहां से रक्त पम्प होकर शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंचता है। हार्ट अटैक के दौरान दिल की रक्त को पम्प करने की क्षमता आंशिक रूप से कम हो जाती है। हार्ट अटैक आने पर भी दिल रक्त को पम्प करता रहता है लेकिन इसकी गति धीमी हो जाती है। हार्ट अटैक होने पर व्यक्ति कुछ मिनटों अथवा कुछ घंटों के लिए भी चल सकता है और जीवित भी बच सकता है।
कार्डिएक अरेस्ट : कार्डिएक अरेस्ट अचानक हो सकता है, बिना किसी ख़तरे का लक्षण दिखाए। कार्डिएक अरेस्ट होने पर मरीज़ का दिल काम करना बंद कर देता है, क्योंकि ऐसे में हार्ट के इलेक्ट्रिक सिस्टम में समस्या हो जाती है और पम्पिंग की प्रक्रिया बाधित होती है। जिससे ब्रेन व शरीर के अन्य हिस्सों में रक्त प्रवाह पूरी तरह से रुक जाता है। कुछ ही सेकंड के भीतर मरीज़ अचेत हो जाता है और उसकी पल्स ग़ायब हो जाती है और अगले कुछ ही मिनट में मरीज़ की मौत भी हो सकती है।

हार्ट अटैक-कार्डिएक अरेस्ट में अंतर
हार्ट अटैक उन कारणों में से है, जो कार्डिएक अरेस्ट के लिए ज़िम्मेदार होते हैं। ख़राब कार्डियोवस्कुलर हेल्थ, हार्ट डिज़ीज़, एरिदिमिया, अनियमित हार्टबीट उन तमाम अन्य कारणों में शामिल हैं, जिनके चलते हार्ट का इलेक्ट्रिक सिस्टम प्रभावित होता है और कार्डिएक अरेस्ट होता है।

120 की स्पीड पर कम्प्रेशन देना ज़रूरी: कार्डिएक अरेस्ट के मामले में व्यक्ति के पास कुछ महत्वपूर्ण सेकंड्स ही होते हैं। जब एक व्यक्ति को कार्डिएक अरेस्ट होता है तब तुरंत एम्बुलेंस को बुलाना चाहिए और साथ ही कार्डियोपल्मनरी रीससिटेशन (सीपीआर) भी करना चाहिए। सीपीआर में मरीज़ की छाती पर हाथों से तेज़ दबाव बनाया जाता है। इस दौरान प्रति मिनट 120 कम्प्रेशन की स्पीड होनी चाहिए। ऐसा तब तक करना चाहिए, जब तक कि मेडिकल सहायता न पहुंच जाए। सीपीआर नहीं मिलने से बेहतर है, किसी भी तरह का सीपीआर दे देना।

कार्डिएक अरेस्ट की पहचान के संकेत

  • कार्डिएक अरेस्ट से पीड़ित व्यक्ति कुछ ही सेकंड में भावशून्य हो जाएगा।
  • सांस की तकलीफ होगी, हांफने लगेगा।
  • नाड़ी की गति महसूस नहीं होगी।
  • दिल की धड़कन रुकती महसूस होगी।
  • रोगी कुछ सेकंड के अंदर बेहोश हो जाएगा।

इससे जुड़ी कुछ आवश्यक बातें...

  • कार्डिएक अरेस्ट किसी भी व्यक्ति को अचानक अपनी गिरफ़्त में लेता है। अानुवंशिक कारक और हानिकारक अरिदिमिया की वजह से सडन कार्डिएक अरेस्ट (एससीए) के कारणों का आसानी से पता नहीं चलता है।
  • हृदय के स्वास्थ्य की अनदेखी करना भी सडन कार्डिएक अरेस्ट (एससीए) की आशंका में वृद्धि करता है।
  • हाई ब्लडप्रेशर, मधुमेह और मोटापा जैसी अन्य स्थितियों को रोकना या नियंत्रित करना ज़रूरी है।
  • समय-समय पर ईसीजी जांच करके कार्डिएक इलेक्ट्रो फ़िज़ियोलॉजिस्ट कुछ कारण जैसे अनियमित दिल की धड़कन और कार्डियोवस्कुलर की समस्याओं का पता लगा सकते हैं।
  • अचानक कॉर्डिएक अरेस्ट से बचाने के लिए संदिग्ध रोगी में एक प्रत्यारोपण योग्य कार्डियोवर्टर डिफ़िब्रिलेटर लगाया जा सकता है।

बचाव के तरीक़े
उन सभी रिस्क फ़ैक्टर्स को कम करना, जो कि एरिदिमिया को बढ़ाते हैं, जैसे स्मोकिंग और अल्कोहल से दूर रहें। कॉफ़ी का सेवन कम करें।

किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक तब आता है, जब हृदय तक ऑक्सीजन पहुंचाने वाले रक्त का प्रवाह सही ढंग से नहीं होता है, जहां से रक्त पम्प होकर शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंचता है। किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक तब आता है, जब हृदय तक ऑक्सीजन पहुंचाने वाले रक्त का प्रवाह सही ढंग से नहीं होता है, जहां से रक्त पम्प होकर शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंचता है।