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अवेयरनेस / दिल का टूट जाना जुमला नहीं, तनाव के कारण हार्ट का एक भाग कमजोर होना है ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम

ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम एक ऐसी ही बीमारी होती है जिसमें हार्ट का एक भाग अस्थायी रूप से कमजोर हो जाता है। इसकी मांसपेशियों में शिथिलता आ जाती है, जिससे इसकी पम्पिंग क्षमता कम हो जाती है।

  • ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम को स्ट्रेस कार्डियोमायोपैथी भी कहा जाता है। इससे बचाव का बेहतर तरीका है कि तनाव और नकारात्मक विचारों से खुद को दूर रखें। 
Danik Bhaskar | Sep 14, 2018, 06:18 PM IST

हेल्थ डेस्क. अक्सर हम सुनते आए हैं कि गम में होने से या किसी अपने के बिछड़ जाने से इंसान का दिल टूट जाता है। दिल का टूट जाना एक कहने का अंदाज माना जाता है लेकिन यह एक तरह की बीमारी भी हो सकती है। ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम एक ऐसी ही बीमारी होती है जिसमें हार्ट का एक भाग अस्थायी रूप से कमजोर हो जाता है। इसकी मांसपेशियों में शिथिलता आ जाती है, जिससे इसकी पम्पिंग क्षमता कम हो जाती है। इसे स्ट्रेस कार्डियोमायोपैथी भी कहा जाता है। अक्सर यह बीमारी मानसिक अवसाद अधिक होने पर देखी जाती है। इससे बचाव का बेहतर तरीका है कि तनाव और नकारात्मक विचारों से खुद को दूर रखें। इटरनल हॉस्पिटल, जयपुर के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. हेमंत चतुर्वेदी से जानते हैं क्या है बीमारी और कैसे बचें...

 

यूं बनती है स्थिति
अधिक डिप्रेशन की स्थिति में देखी जाती है कुछ विशेष मामलों में देखी जाती हैं जैसे किसी प्रियजन की असामयिक मृत्यु होना, कोई गंभीर बीमारी, किसी ऑपरेशन के डर से, कार एक्सीडेंट होने पर या कोई अप्रत्याशित बुरी खबर से या किसी फाइनेंशियल संकट के कारण। ऐसी स्थिति में स्ट्रेस अधिक रहने के कारण हार्ट में लेफ्ट वेंटिकल के एक भाग की मांसपेशियां अस्थायी रूप से शिथिल हो जाती हैं, उनमें संकुचनशीलता कम हो जाती है। ब्लड वेसेल्स में अस्थायी सिकुडन से हार्ट को ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है। व्यक्ति को छाती में दर्द होता है, यह स्थिति हार्ट अटैक के समान होती है।

कैसे पहचानें 
कुछ लक्षण जैसे छाती में दर्द, सांस फूलना, चक्कर आना, पसीने अधिक आना, ब्लड प्रेशर लो होना, जी घबराना, धड़कन का अनियमित होने दिखने पर डॉक्टरी सलाह लें।  

इन लोगों को खतरा ज्यादा 
अक्सर ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम महिलाओं में पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा देखने को मिलता है। उनमें भी 50 वर्ष की आयु से अधिक की महिलाओं में होती है। ऐसे व्यक्ति जिनमें हेड इंजरी हो चुकी हो या मिर्गी की बीमारी हो उनमे ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम होने का रिस्क काफी ज्यादा होता है। मानसिक बीमारी जैसे एंग्जाइटी, डिप्रेशन ग्रस्त लोगों में ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम की आशंका ज्यादा होती है।

ईसीजी और इकोकार्डियोग्राफी से करते हैं जांच 
ईसीजी सबसे पहली जांच है जिससे इस बीमारी के बारे में प्राथमिक जानकारी मिलती है। ब्लड टेस्ट जैसे की कार्डियक मार्कर्स बीबी महत्वपूर्ण जांच है। इकोकार्डियोग्राफी में हार्ट के एक भाग के असामान्य रूप से फूल जाने एवं कम सिकुड़ने को अच्छे से देखा जा सकता है। छाती के एक्स-रे में भी हार्ट का आकार बड़ा हो जाता है। ये हार्ट अटैक है या नहीं इसके लिए कोरोनरी एंजियोग्राफी की जाती है। सामान्यतः हार्ट अटैक में ब्लड वेसल्स में ब्लॉकेज पाया जाता है पर ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम में वेसल्स में किसी तरह का कोई ब्लॉकेज नहीं पाया जाता। उपचार के लिए समय पर इसके लक्षणों को पहचान कर कुछ  तरह की कार्डियक दवाओं के जरिये इसे ट्रीट किया जाता है।

रिस्क फैक्टर

जो भी व्यक्ति अधिक तनाव लेता हो या अधिक भावनात्मक हो उन्हें यह समस्या अधिक होती है। लगभग 60 फीसदी केस इस बीमारी के महिलाओं में होते हैं। इसमें भी ज्यादातर मामले 50 वर्ष की उम्र के बाद पोस्ट मेनोपॉज के बाद महिलाओं में अधिक होती है।

ऐसा माना जाता है कि ये महिलाओं में ज्यादा इसलिए पाया जाता है, क्योंकि महिलाओं में मेन्टल स्ट्रेस की अधिकता से एस्ट्रोजन हर्मोन के कारण कैटेकोलामीन एवं  ग्लुकोकोर्टिकोइड अधिक रिलीज होता है। ये दोनों स्ट्रेस हार्मोन होते हैं, जो कि ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम का मुख्य कारण होते हैं।

इस बीमारी के 75 फीसदी मामले किसी तनावपूर्ण घटना के बाद होते हैं। ऐसा नहीं है कि ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम की समस्या किसी गंभीर दुख के बाद होती है। ऐसा अचानक खुशी या हर्ष के अचानक प्राप्त होने पर भी हो सकता है। उस अवस्था में भी हमारे शरीर में उत्तेजित करने वाले स्ट्रेस हार्मोन का अचानक से स्तर बढ़ जाने से हृदय का एक हिस्सा एकदम से काम करना कम कर देता है, जिसे हैप्पी हार्ट सिंड्रोम भी कहते हैं। पर अक्सर यह इतना कॉमन नहीं दिखाई देता है। इस समस्या को सबसे पहले जापान में डायग्नोसिस किया गया था।

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