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दाग नहीं, एक बीमारी है इनफर्टिलिटी, आसानी से आप भी बन सकते हैं पैरेंट्स

डब्ल्यूएचओ भी कहता है कि इनफर्टिलिटी ऐसी बीमारी है जिसका बड़ी आसानी से इलाज संभव है।

Dainik Bhaskar

Aug 08, 2018, 06:38 PM IST
what is infertility and how to treat it

लाइफस्टाइल डेस्क. इनफर्टिलिटी यानी बांझपन को लेकर हमारे समाज में कई टैबू हैं। यहां तक कि पढ़े-लिखे लोगों में भी इसे एक दाग (स्टिग्मा) की तरह देखा जाता है। इसलिए इससे परेशान लोग इस बारे में बात करने से हिचकिचाते हैं। कई कपल्स तो इस समस्या को लेकर डॉक्टर्स के पास जाने से भी कतराते हैं, जबकि डब्ल्यूएचओ भी कहता है कि इनफर्टिलिटी ऐसी बीमारी है जिसका बड़ी आसानी से इलाज संभव है। डॉ. रोमिका कपूर, एमएस ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनोकॉलोजी से जानते हैं इसके बारे में...

इनफर्टिलिटी की परिभाषा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार इनफर्टिलिटी, रिप्रोडक्टिव सिस्टम की बीमारी है। अगर 12 महीने या उससे ज्यादा समय तक लगातार गर्भनिरोधक साधनों का इस्तेमाल किए बगैर इंटरकोर्स करने के बावजूद क्लीनिकल प्रेग्नेंसी नहीं हो पाती है तो उसे इनफर्टिलिटी कहा जा सकता है।

क्या है फीमेल इनफर्टिलिटी?

महिलाओं में इनफर्टिलिटी की मुख्य वजह फेलोपियन टयूब का ब्लॉक होना है। इससे ऑव्यूलेशन, पीसीओएस और एंडोमेट्रिओसिस की प्रॉब्लम होती है जिससे भी इनफर्टिलिटी की समस्या पैदा होती है। पीसीओएस में एग्स बनने की प्रोसेस अनियमित हो जाती है, जिसके कारण प्रेग्नेंसी में दिक्कत आती है। उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं में एग प्रोडक्शन कम होते जाता है। इस वजह से फर्टिलिटी नैचुरिली कम होती जाती है। इसलिए एक उम्र के बाद महिलाओं के लिए नैचुरल प्रेग्नेंसी में दिक्कत आती है।

क्या है मेल इनफर्टिलिटी?

पुरुषों की फर्टिलिटी मुख्य तौर पर उनके स्पर्म की संख्या और स्पर्म की क्वालिटी पर निर्भर करती है। अगर किसी पुरुष में स्पर्म का काउंट कम है या उसके स्पर्म में मोटिलिटी (गतिशीलता) नहीं है तो फिर उसके पिता बनने में दिक्कतें आती हैं। इसे ही मेल इनफर्टिलिटी कहते हैं। मायो क्लीनिक की एक स्टडी के अनुसार इस दिनों हर 20 वयस्क पुरुषों में एक पुरुष इनफर्टिलिटी की प्रॉब्लम का सामना कर रहा है। इसके अलावा हर 5 में से एक कपल अगर बेबी प्लान नहीं कर पा रहा है तो इसके लिए केवल मेल की इनफर्टिलिटी जिम्मेदार है।

क्या इसका इलाज है?

चूंकि इनफर्टिलिटी एक बीमारी है। इसलिए जिस तरह से हर बीमारी का कोई न कोई इलाज होता है, उसी तरह इनफर्टिलिटी का भी इलाज है। जरूरत है तो समय रहते अपनी इस बीमारी को पहचानने की। एक स्टडी के अनुसार इनफर्टिलिटी के हर 3 में से 2 मामले ट्रीटेबल है। यानी दो तिहाई लोग आसानी से अपनी इस बीमारी से निजात पा सकते हैं और पैरेंटस बनने का सुख भोग सकते हैं।

इनफर्टिलिटी का इलाज मुख्य रूप से इन तीन तरीकों से किया जा सकता है :

1. एग डेवलपमेंट और ऑव्यूलेशन के लिए मेडिकेशन

फीमेल इनफर्टिलिटी में ऑव्यूलेशन के लिए मैच्योर एग्स को डेवलप करने के वास्ते मेडिकेशन दिया जाता है। इसमें मेस्ट्रूअल साइकिल के तीसरे से सातवें दिन तक पिल्स दी जाती हैं।

2. स्पर्म काउंट और मोटेलिटी बढ़ाने के लिए मेडिकेशन

प्रत्येक मिलीलीटर सीमेन में न्यूनतम 20 मिलियन स्पर्म काउंट को नॉर्मल माना जाता है। इसके अलावा स्पर्म में मोटिलिटी होनी चाहिए ताकि वह स्विम करके फैलोपियन ट्यूब तक पहुंच सके। स्पर्म काउंट कम होने पर दवाइयों के जरिए इसे बढ़ाया जा सकता है। स्पर्म में मोटिलिटी कम होने पर Insemination की प्रोसेस की जाती है। यह पूरी प्रोसेस बहुत ही स्मूद और पेनलेस होती है।

3. आईवीएफ

अगर उपरोक्त दोनों तरीके कारगर नहीं हैं तो फिर इनके अलावा सबसे सेफ और इफेक्टिव तरीका है IVF यानी इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन। इस प्रोसेस में एग और स्पर्म को शरीर के बाहर यानी लैब में फर्टिलाइज किया जाता है। इसमें प्राय: कपल के ही एग और स्पर्म का यूज किया जाता है। हालांकि जरूरत पड़ने पर डोनर एग या स्पर्म भी यूज किए जा सकते हैं। बोलचाल की भाषा में इसे टेस्ट ट्यूब बेबी टेकनीक भी कहते हैं।

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