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निपाह वायरस : 5 प्वाइंट में जानिए क्या है वायरस, कैसे फैलता और कैसे पहचानें

3 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. केरल के तीन इलाकों में अब तक निपाह वायरस के कारण 16 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों के ब्लड सेंपल नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ वायरोलॉजी, पुणे भेजे गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक लिए गए सेंपल में इस दुर्लभ निपाह वायरस की पुष्टि की गई है। पड़ोसियों के मुताबिक परिवार के तीनों सदस्यों को घर के कंपाउंड में ही लगे पेड़ के फल खाते देखा गया था। बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र ने नेशनल सेंटर आॅफ डिजीज कंट्रोल की टीम को केरल भेजा गया है। 

 

जानते हैं क्या है निपाह वायरस, कैसे फैलता है और इसे कैसे पहचानें...

 

1. क्या है निपाह वायरस

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक 1998 में मलेशिया में पहली बार निपाह वायरस का पता लगाया गया था। मलेशिया के सुंगई निपाह गांव के लोग सबसे पहले इस वायरस से संक्रमित हुए थे। इस गांव के नाम पर ही इसका नाम निपाह पड़ा। उस दौरान ऐसे किसान इससे सं​क्रमित हुए थे जो सुअर पालन करते थे। मलेशिया मामले की रिपोर्ट के मुताबिक पालतू जानवरों जैसे कुत्ते, बिल्ली, बकरी, घोड़े से भी इंफेक्शन फैलने के मामले सामने आए थे। 

 

 

2. ऐसे फैलता है वायरस
विशेषज्ञों के मुताबिक यह वायरस चमगादड़ से फैलता है। इन्हें फ्रूट बैट कहते हैं। जब ये चमगादड़ किसी फल को खा लेते हैं और उसी फल या सब्जी को कोई इंसान या जानवर खाता है तो संक्रमित हो जाता है।निपाह वायरस इंसानों के अलावा जानवरों को भी प्रभावित करता है। इसकी अब तक कोई वैक्सीन नहीं तैयार हो पाई है। इसकी शुरुआत तेज सिरदर्द और फीवर से होती है। इससे संक्रमित व्यक्ति का डेथ रेट 74.5 फीसदी होता है।


3. भारत में पहली बार पश्चिम बंगाल में फैला था इंफेक्शन

भारत में पहली बार 2001 और 2007 में निपाह वायरस का संक्रमण पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी जिले और उन क्षेत्रों के लोगों में हुआ था जो बांग्लादेश के बॉर्डर एरिया के करीब रहते थे। उस दौरान करीब 66 मामले सामने आए थे। जिसमें 45 लोगों की मौत हो गई थी। इसके अलावा 2004 में बांग्लादेश में भी इस वायरस के प्रकोप के मामले सामने आए थे। 

 

4. डॉ. बिंग ने की थी निपाह वारयस की खोज

पहली बार इस वायरस पता डॉ. कॉ बिंग चुआ ने 1998 में लगाया था। उस दौरान डॉ. बिंग मलेशिया की यूनिवर्सिटी आॅफ मलाया से ग्रेजुएशन कर रहे थे। वे इन दिनों टेमसेक लाइफ साइंसेस, सिंगापुर में बतौर साइंटिस्ट काम कर रहे हैं।

 

5. चमगादड़ से ही क्यों फैलता है वायरस
चमगादड़ एकमात्र ऐसा स्तनधारी (मैमल) है जो उड़ सकता है। यह वायरस को एक से दूसरी जगह तेजी से फैलाता है। एशिया पेसिफिक सोसायटी आॅफ क्लीनिकल माइक्रोबायोलॉजी एंड इंफेक्शन के जनरल सेक्रेटरी प्रोफेसर पॉल अनंथ के मुताबिक चमगादड़ का मेटाबॉलिज्म तेज होने के कारण वायरस इनके शरीर में बिना नुकसान पहुंचाए काफी समय तक जिंदा रह सकता है। चमगादड़ का खाया हुआ फल या सब्जी खाने से इस खास तरह का फंगल इंफेक्शन भी हो सकता है जो फेफड़ों के साथ स्प्लिीन और बोनमैरों को नुकसान पहुंचाता है।

 

6. ये लक्षण दिखें तो हो जाएं अलर्ट
एक्सपर्ट के मुताबिक, निपाह वायरस हवा से नहीं बल्कि एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे में व्यक्ति में फैलता है। इससे इंफेक्शन होने के बाद कुछ खास लक्षण देखे जाते हैं। वायरल फीवर होने के साथ सिरदर्द, मिचली आना, सांस लेने में तकलीफ और चक्कर आने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं तो अलर्ट होने की जरूरत है। ये लक्षण लगातार 1—2 हफ्ते दिखाई दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में सबसे पहले फिजिशियन से राय लें।

 

7. सुअर, घोड़े, पेड़ से गिरे फल और ताड़ी

निपाह वायरस का संक्रमण चमगादड़ (फ्रूट बैट) से फैलता है। अब तक सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक निपाह वायरस के इंफेक्शन से बचना है तो सुअर, घोड़े, पेड़ से गिरे फल और ताड़ी से दूर रहें।  कोई फल और सब्जी खरीदें तो ध्यान रखें कि ये कहीं से कटा या खुंरचा हुई न हो। साथ ही पेड़ों से गिरे फल या खुले में टंगी मटकी वाली ताड़ी का सेवन न करें। 

 

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