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नई तकनीक : फूड पाइप की सख्त मांसपेशियों का 'पोयम' टेक्निक से इलाज हुआ आसान

गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. मुकेश कल्ला से जानते हैं क्या है पोयम (पर—ओरल एंडोस्कोपिक मायोटॉमी) टेक्नीक...

Dainik Bhaskar

Jul 03, 2018, 07:46 PM IST
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हेल्थ डेस्क. अमाशय से जुड़ा वाल्व रिलैक्स नहीं हो पाता, इसलिए खाना फूड पाइप में जमा होता रहता है और उसे निगलने में परेशानी के कारण मरीज को अक्सर उल्टी होती है। कई लोगों को खाना निगलने में परेशानी के कारण अक्सर उल्टी होती रहती है। मेडिकल की भाषा में इस बीमारी को ऐकेलेसिया कार्डिया कहते हैं। अभी तक पूरी तरह से इसका इलाज संभव नहीं था लेकिन अब नई तकनीक पोयम से मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है। गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. मुकेश कल्ला से जानते हैं इसके बारे में...

बीमारी का कारण
फूड पाइप (आहार नली) के निचले हिस्से की मांसपेशियों के सख्त होने के कारण आमाशय से जुड़ा वाल्व रिलैक्स नहीं हो पाता और खाना आमाशय में नहीं पहुंचता। इसी कारण मरीज को उल्टी होती रहती है।

एंडोस्कोपी से पता लगाते हैं
इस समस्या का पता लगाने के लिए एंडोस्कोपी की जाती है। इससे फूड पाइप के अंदर जमा खाना, खिंची हुई पाइप और एंडोस्कोप को आमाशय में डालने में आने वाली रुकावट का पता चलता है। इसके अलावा बीमारी की पुष्टी मेनोमेट्री जांच से भी की जाती है।

ऐसे होता है इलाज
अामतौर पर इस बीमारी का इलाज कुछ दवाओं और बैलून को फुलाकर किया जाता है, लेकिन दवाएं कम असर करती हैं और कुछ समय बाद समस्या फिर हो जाती है। इसी तरह बैलून ट्रीटमेंट के दौरान 4 प्रतिशत मरीजों में बैलून के लीक होने और फूड पाइप में घाव होने का रिस्क होता है। इसलिए सर्जरी करनी पड़ती है, जो काफी महंगी होती है।

सफल इलाज है 'पोयम'
इंडिया में अभी पोयम टेक्निक से सीमित सेंटरों पर इलाज किया जा रहा है। इस तकनीक में फूड पाइप की हार्ड मसल्स (सख्त मांसपेशियां) को उच्च क्षमता वाले एंडोस्कोप से देखा जाता है, फिर अत्याधुनिक इलेक्ट्रिकल कटिंग मशीन व क्लिप्स से काटकर मरीज को रिलीफ दी जाती है। देश के अलग-अलग शहरों में इस ट्रीटमेंट का खर्च 60 हजार रु. से लेकर 2 लाख रु. तक होता है।

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