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खर्राटे आना हो सकते हैं हाईबीपी और हार्ट डिजीज होने के दुस्प्रभाव, लाइफस्टाइल में बदलाव करके पा सकते हैं राहत

ईएनटी डॉ. शुभकॉम आर्य से जानते हैं क्यों आते हैं खर्राटे

Danik Bhaskar | Jul 10, 2018, 07:54 PM IST

हेल्थ डेस्क. यूं तो नींद से जुड़ी समस्याएं कई हो न सकती हैं लेकिन आना सबसे आम है। यह खुद के साथ-साथ अन्य लोगों को भी दिक्कत देती है। लंबे समय तक यह समस्या बनी रहती हैं तो कई दिक्कतें बढ़ सकती हैं। ईएनटी डॉ. शुभकॉम आर्य से जानते हैं इसके बारे में..

क्यों आते हैं खर्राटे
खर्राटे सांस में रुकावट पैदा होने से जीभ के पिछले भाग, तालु, टॉन्सिल के किनारों के कम्पन से पैदा होने वाली एक प्रकार की आवाज है। जिन लोगों के ये अंग ज्यादा मांसल होते हैं उनमें आवाज ज्यादा पैदा होती है। मोटे लोगों, पुरुषों व उम्र बढ़ने के साथ-साथ ज्यादा आते हैं।

हो सकती है गंभीर बीमारी
कई बार खर्राटे सामान्य होते हैं तो कई बार गंभीर बीमारी की ओर इशारा करते हैं। ओब्सट्रक्टिव स्लिप एपनिया के लक्षण हो सकते है जिसमें शरीर को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती जिनके बाद सतर्क होना जरूरी है। हाई ब्लडप्रेशर, हृदय संबंधी बीमारियों के दुस्प्रभाव हो सकते हैं।

यह हैं गंभीर लक्षण

यदि रात में सांस न ले पाने या दम घुटने की वजह से बार-बार नींद उखड़ती रहती है। नींद कई टुकड़ों में आती है। लेकिन प्रायः इसका स्वयं मरीज को पता ही नहीं चलता। इसे परिवार के लोग समझ सकते हैं। नींद से जागने के बाद भी सुबह तरोताजा महसुस न हो बल्कि थकान, सिरदर्द, व आलस्य से घिरे रहते हो। दिन भर उनींद रहते हो। दिन में काम करते—करते आंख लग जाती हो जैसे ऑफिस में, कहीं भी बात करते-करते, खाना-खाते ही आदि। खर्राटे की आवाज से दूसरों को इतनी दिक्कत हो कि जीवन साथी ही दूसरे कमरे में सोने को विवश हो जाए। नींद में खर्राटे के दौरान बीच-बीच में सांस लेने के लिए रूकते हों।

काम की बातें जो इसे रोकने में करेंगी मदद

  • पीठ के बल सीधे सोने की बजाय एक तरफ करवट लेकर लेटना चाहिए।
  • मोटापा कम कर वजन संतुलित करना चाहिए।
  • शराब सेवन व नींद की गोलियों से बचें। ये चीजें गले व तालु की मांसपेशियों को शिथिल कर देती हैं जिससे कंपन बढ़ जाते हैं।
  • नींद के चक्र को व्यवस्थित रखिए। इसके लिए रोजाना नियमित समय पर सोना एवं उठना चाहिए।
  • रात में गरिष्ठ भोजन, चाय, कॉफी लेने से बचना चाहिए। एलर्जी व जुकाम को नियंत्रण में रखिए।

ये एक्सरसाइज हैं फायदेमंद

  • गर्दन के मूवमेंट वाली एक्सरसाइज करने से गर्दन की मांसपेशियों में फ्लेक्सिब्लिटी बढ़ती है। इसलिए वह करना चाहिए।
  • कपाल भाति, अनुलोम विलोम जैसे प्राणायाम करने से भी खर्राटों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।