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निलम्बित आईएएस अधिकारी निर्मला मीणा ने चेहरा छिपा एसीबी के समक्ष किया सरेंडर

3 वर्ष पहले
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जोधपुर। जिला रसद विभाग में करीब आठ करोड़ रुपए के गेहूं के घोटाले में मुख्य आरोपी निलम्बित आईएएस अधिकारी निर्मला मीणा ने गिरफ्तारी से बचने के सभी रास्ते बंद होने के बाद आखिरकार बुधवार को एसीबी के समक्ष सरेंडर कर दिया। करीब 35 हजार क्विंटल गेहूं के घोटाले में फंसी तत्कालीन रसद अधिकारी निर्मला मीणा ने एसीबी की गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत हासिल करने का प्रयास किया, लेकिन दोनों कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद से उनके समक्ष सरेंडर करने के अलावा कोई विकल्प भी नहीं बचा था। चेहरा ढंक कर पहुंची एसीबी कार्यालय…

 

 

- सुप्रीम कोर्ट ने गत सप्ताह जोधपुर के बहुचर्चित गेहूं घोटाले में निलम्बित आईएएस अधिकारी निर्मला मीणा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद कई दिनों से भूमिगत चल रही निर्मला के समक्ष सरेंडर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। गिरफ्तारी से बचने के सारे रास्ते बंद होने के बाद आखिरकार आज दोपहर वे कपड़े से पूरी तरह अपना चेहरा ढंक कर सरेंडर करने एसीबी कार्यालय पहुंच गई। एसीबी ने उन्हें गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की है। उन्हें आज शाम तक कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा। इससे पूर्व 17 अप्रेल को राजस्थाई हाईकोर्ट भी उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर चुका था।

 

कभी नाराज होती तो कभी रोने लगती है मीणा 

रात काे खाना खाने से इनकार पहली बार पुलिस की हिरासत में रात बड़ी मुश्किल से बीती। उदयमंदिर थाने में एक रिश्तेदार खाने का टिफिन लेकर आया तो महिला एसआई परमिंदर ने खाना टेस्ट किया। मीणा नाराज हो गई और खाना खाने से ही इनकार कर दिया।

 

सुबह बोली उपवास है सुबह कोर्ट में पेश करना था, इसलिए उसे नाश्ता करने को कहा गया। मीणा ने कहा कि गुरुवार का उपवास है इसलिए कुछ नहीं खाएगी। भूखी रही और गर्मी में दो बार कोर्ट के चक्कर लगाए तो खुद को भी चक्कर आने लग गए।

 

दोपहर में बीमारी का बहाना दोपहर एक बजे पूछताछ शुरू की तो मीणा ने कहा कि उसकी तबीयत ठीक नहीं है। उपवास के कारण कमजोरी भी है। तब एसीबी ने दो- तीन बार ज्यूस मंगवा कर पिलाया, परंतु रोने लगती जवाब नहीं दिए।

 

शाम को उपवास खोल दिया दिन भर मशक्कत के बाद भी एसीबी उससे कोई जवाब नहीं ले पाई। उदयमंदिर थाने भेजने का समय हो गया। उस दौरान रिश्तेदार फिर टिफिन लेकर आया जिसमें उपवास का आहार था। मीणा ने उसे खाकर उपवास खोल दिया।

 

 

राशन डीलर अध्यक्ष, क्लर्क से आमने-सामने हुई

9 एसीबी ने घोटाले की परतें खोलने के लिए तत्कालीन राशन डीलर एसो. अध्यक्ष अनिल गहलोत व जयपुर खाद्यान्न विभाग क्लर्क शिवप्रकाश शर्मा को भी पूछताछ के लिए तलब कर रखा था। गहलोत के पास राशन की 20 दुकानें थी, और घोटाले के दौरान उसकी दुकानों पर भी कोटे से ज्यादा गेहूं अलाॅट कर रखा था। वह भी संदेह के दायरे में है। गहलोत ने ही मीणा के खिलाफ एफआईआर होने पर एसीबी के खिलाफ डेलीगेशन तैयार किए थे और मीणा के पक्ष में खड़ा था। शर्मा वह क्लर्क है जिसने मीणा के उस लैटर को आगे प्रोसेस किया था, जिसमें मीणा ने बतौर डीएसओ 35 हजार क्विं. अतिरिक्त कोटा मांगा था। दोनों को मीणा के सामने बैठा कर पूछताछ का प्रयास किया, परंतु मीणा चुप ही रही। 

 

यह है मामला

 

- तत्कालीन डीएसओ निर्मला मीणा पर आरोप है कि उनके कार्यकाल में लगभग पैंतीस हजार क्विंटल गेहूं गलत तरीके से वितरित किया गया था। एसीबी ने अपनी जांच में पाया था कि तत्कालीन डीएसओ मीणा ने सिर्फ मार्च 2016 में तैंतीस हजार परिवार नये जोड़े और उच्चाधिकारियों को स्वयं की ओर से प्रेषित रिपोर्ट में अंकित कर 35 हजार 20 क्विंटल गेहूं अतिरिक्त मंगवा लिया था। नये परिवारों को ऑनलाइन नहीं किया गया। फिर मीणा ने आठ करोड़ रुपए का अतिरिक्त गेहूं का आवंटन करवा लिया। ठेकेदार सुरेश उपाध्याय व स्वरूपसिंह राजपुरोहित की आटा मिल भिजवा दिया था। करोड़ों रुपए का गबन की जांच के बाद राज्य सरकार ने आईएएस अधिकारी निर्मला मीणा को निलम्बित कर दिया था। बाद में आटा मील मालिक स्वरूपसिंह राजपुरोहित ने भी पूछताछ में कबूल किया था कि उसने 105 ट्रक में दस हजार पांच सौ 500 क्विंटल गेहूं काला बाजार में बेचा है।  

फोटो एल देव जांगिड़

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