जब इंजीनियरिंग को छोड़कर मैंने कला का रास्ता अपनाया

News - सिटी रिपोर्टर | चंडीगढ़ अगर अपने दिल की ना सुनी होती तो आज मैं इंजीनियर होता। पापा इंजीनियरिंग कॉलेज में...

Mar 27, 2020, 07:20 AM IST
Chandigarh News - when except engineering i took the path of art

सिटी रिपोर्टर | चंडीगढ़

अगर अपने दिल की ना सुनी होती तो आज मैं इंजीनियर होता। पापा इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाते थे। तो जाहिर सी बात है कि मैंने बाहरवीं में नॉन मेडिकल से ही पढ़ाई की, लेकिन वो कहते हैं ना कि जहां चाह वहां राह। अब जब इस फील्ड की चाह ही नहीं थी तो आगे की राह कैसे बनती। अच्छे नंबर ना आने की वजह से मैं इंजीनियरिंग की पढ़ाई जारी नहीं रख पाया तो बी ए ज्योग्राफी में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से की। हर एक आर्ट कंपीटीशन में मैं हिस्सा लेता गया और अपने नाम खिताब करता गया। इस दौरान मेरे टीचर आर एस पठानिया, दोस्त राजेन्द्र, जोकि खुद भी आर्टिस्ट हैं, ने मुझे कला की ओर प्रेरित किया। पिता जी को जब कला के प्रति अपने प्रेम को जाहिर किया और उन्होंने मेरी लगन देखी तो मुझे बीए फर्स्ट ईयर के बाद ही चंडीगढ़ में सेक्टर 10 के आर्ट कॉलेज में दाखिला दिलवाया। और फिर शुरू हुआ बचपन के शाैक का पैशन में बदलने का और धीरे-धीरे पैशन का प्रोफेशन में बदलने का। यह सब बता रहे हैं आर्टिस्ट करमजीत धीमान। उन्हाेंने एक मुलाक़ात के दौरान कला के सफर को साझा किया। आर्टिस्ट और कैनवास के रिलेशन को समझाते हुए बोले - जब मैं रंगों को हाथ में पकड़ता हूं और एक आइडिया को जहन में लाता हूं, तब तक तो यह सब मेरे होते हैं। लेकिन, जैसे ही रंग कैनवास पर धीरे-धीरे उतरने लगते हैं तो वह सिर्फ कैनवास के हो जाते हैं। शुरू में आइडिया मेरा होता है, बाद में कैनवास मुझसे बात करने लगता है। कहां कौन से रंग का इस्तेमाल करना है। कब कैनवास को हाथ लगाना है यह सब कैनवास खुद निर्धारित करता है। अगर इसकी बात नहीं मानी जाए तो सारी की सारी रचना ही बेकार हो जाती है।

अपनी पेंटिंग्स के बारे में बताया - ज्यादातर मेरी पेटिंग में कुदरत और इंसान के रिश्ते को दिखाया है। एक पेटिंग में दिखाया है- जैसे कि धरती हम सभी इंसानों, जीव, जंतुओं, पेड़-पौधों का पालन प्रेम के साथ करती है, वैसे ही इंसान भी कुदरत में बसे हर एक कण को प्रेम से संजोए रखता है। पेंटिंग में एक औरत ने कुत्ते को अपनी गोद में बिठाया है। इससे संदेश मिलता है कि इंसान कुदरत से प्यार से पेश आए।

सोच के अनुसार ही संदेश समझा जाता है

देखने वाले क्या आर्टिस्ट के संदेश को आसानी से समझ लेते हैं? यह तो देखने वाले पर निर्भर करता है कि उसकी मनोस्थिति क्या है। एक पेंटिंग में सोहनी महिवाल को दिखाया है। मकसद यह रहा कि जब कोई उसको देखे तो सोचे कि आज के समय का इश्क तब के समय से कैसे अलग है। उस वक्त जब दोनों समाज से छुपके मिलते थे तो उनके जहन में क्या आता होगा। और जब आज के युग में वैसे ही प्रेमी मिलते हैं छुपकर तो क्या सोचते होंगे। अब उसको देखने वाले सिर्फ सोहनी महिवाल पर टिक जाए या उनके इश्क के जरिए आज के युग में पहुंच जाए यह देखने वाले की मनोस्थिति पर निर्भर करता है।

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