हजारों बीघा जमीन पर कहां-कहां कब्जे हंै निगम के पास नहीं है इसकी जानकारी

Panchkula Bhaskar News - लंबे अरसे से पिंजौर-कालका क्षेत्र डेवल्पमेंट में पिछड़ा ही रहा है हालांकि हरियाणा सरकार द्वारा क्षेत्र को...

Jan 24, 2020, 07:35 AM IST
Pinjore News - where the corporation is not in possession of thousands of bigha land
लंबे अरसे से पिंजौर-कालका क्षेत्र डेवल्पमेंट में पिछड़ा ही रहा है हालांकि हरियाणा सरकार द्वारा क्षेत्र को नगरपालिका उसके बाद नगर निगम तक का दर्जा भी दे दिया । बावजूद इसके भी क्षेत्र के बाशिंदे मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हंै। सरकार या प्रशासन द्वारा जनहित की कोई भी सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए जो भी प्रोजेक्ट लगाना होता है वो सरकारी जमीन पर ही लगाया जाता है, परंतु क्षेत्र में हजारों बिघा सरकारी जमीन होने के बावजूद भी लोगों की सुविधा के लिए कोई प्रोजेक्ट नहीं लग पा रहा।

कितनी जमीन पर कब्जे निगम के पास नहीं जानकारी: पिंजौर में 15 वर्ष तक नगरपालिका का दर्जा रहा उस समय नगरपालिका के पास भी जानकारी नहीं थी कि उनकी कितनी जमीन पर कब्जे है और कितनी खाली पड़ी है। पुराने एमसी एरिया में नगरपालिका की करीब 628 बिघा जमीन थी इसमें से कितनी जमीन खाली थी इसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी। मार्च 2010 में पिंजौर-कालका नगरपालिकाओं को रद्द करके पंचकूला के साथ मिलाकर नगर निगम का दर्जा दिया गया। जिसमें पिंजौर ब्लाक की 27 पंचायतों को भी साथ मिलाकर निगम का दर्जा दिया गया। पुराने एमसी एरिया की 628 बिघा जमीन के साथ सैंकडों बिघा पंचायतों की भी सरकारी जमीन निगम में चली गई। जिस हिसाब से इस समय क्षेत्र में हजारों बिघा जमीन नगर निगम की सरकारी जमीन है। जिसके बारे में निगम के अधिकारी जमीन कितनी है इसके बारे में तो कागजों में देखकर बताने का दावा करते है परंतु निगम की कितनी जमीन पर अवैध कब्जे हैं और कितनी जमीन खाली है जिस पर निगम का कब्जा है इसके बारे में अधिकारियों को कोई भी जानकारी नहीं है।

नगर निगम के बिल्डिंग इंसपेक्टर संजीव कुमार ने बताया कि पिंजौर के पुराने एमसी एरिया में उस समय करीब 600 बिघा सरकारी जमीन थी। अब नगर निगम बनने के बाद हद भी बढ़ गई है जिस कारण पंचायतों की में सरकारी जमीन भी निगम में आ गई है जिसके बाद अब हजारों बिघा जमीन नगर निगम में पड़ती है, परंतु उस पर कब्जों के बारे में कुछ नही जानकारी क्योंकि निगम कितनी जमीन पर कब्जे है इसके बारे में सर्वे करवाने के लिए टेंडर निकाला था उस समय किसी ने नहीं भरा। अब दोबारा से इसका टेंडर निकाला जा रहा है। सर्वे के बाद पूरी रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्यवाई की जाएगी।

निगम की जमीन की लड़ाई लड़ रहे लोग अपनी जमीन के प्रति जितना गंभीर निगम को होना चाहिए था उतना वो नहीं है परंतु स्थानीय लोग इसकी लड़ाई लड़ रहे हैं। स्थानीय नारायण स्वरूप निवासी भीमा देवी कालोनी इसकी लड़ाई लड़ रहे है। उन्होंने बताया कि 2005 से वो एमसी एरिया की जमीन के लिए लड़ाई लड़ रही है जिसके बारे में एस समय नगरपालिका, डीसी पचंकूला, एसडीएम कालका को भी एमसी की सरकारी जमीन से कब्जे खाली करवाने के लिए मांग की परंतु उन्होंने जब कुछ नहीं किया तो 2016 में उन्हें मजबूरन कोर्ट में जाना पड़ा अब कोर्ट में ही मामला चल रहा है।

स्थानीय लोगों मनोज कुमार, बलदेव सिंह, संदीप शर्मा ने कहा कि वो प्रापर्टी टैक्स तो पंचकूला ए क्लास सीटी के बराबर दे रहे है परंतु यहां पर सुविधा सी क्लास सीटी के बराबर भी नहीं मिल रही, निगम की इतनी ज्यादा जमीन है निगम उसे खाली करवाकर पार्क, सामुदाय केंद्र बनवा सकता है इसके अलावा निगम अपनी जमीन पर दुकाने बनाकर किराए पर दे सकता है जिससे निगम के पास रेवन्यु आएगा और लोगो को रोजगार मिल जाएगा। परंतु नगर निगम अपनी ही जमीन के प्रति गंभीर नहीं है।

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