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दुनिया के 1.1 अरब लोगों की सुनने की क्षमता खोने का खतरा, कारण आॅडियो डिवाइज और स्मार्टफोन में ध्वनि का स्तर अधिक: WHO

दुनिया के 1.1 अरब लोगों की सुनने की क्षमता खोने का खतरा, कारण आॅडियो डिवाइज, और स्मार्टफोन में ध्वनि का स्तर अधिक: WHO

Danik Bhaskar | Jul 09, 2018, 07:49 PM IST

हेल्थ डेस्क. सड़क पर गाड़ी चलाने या पैदल चलने के दौरान हेडफोन लगाकर तेज म्यूजिक सुनना हादसों के साथ सुनने की क्षमता को भी कम कर रहा है। डब्ल्यूएचओ के सर्वे के अनुसार दुनिया भर में 1.1 अरब लोग सुनने की क्षमता खो देने के ख़तरे में हैं, क्योंकि वे ऑडियो डिवाइज़, एमपी 3 प्लेयर, स्मार्ट फोन्स या अन्य माध्यमों से ध्वनि को मानक से अधिक स्तर पर सुनते हैं।। आकार हेल्थ केयर की सीनियर आॅडियोलॉजिस्ट नीतिका गुप्ता से जानते हैं ईयरफोन सुनने की क्षमता को कैसे प्रभावित करते हैं और कैसे बचें...

ईयरफोन सुनने की क्षमता किस हद कर प्रभावित करते हैं?
ईयरफोन्स पर अगर ध्वनि को 70 फीसदी पर सुना जाए, तो 85 डेसिबल्स से ज़्यादा की ध्वनि उत्पन्न होती है। इतने ज़्यादा स्तर की ध्वनि को सुनना हमारे कान के पर्दों और अंदरूनी कान (कॉक्ल्यिा) के संवेदनशील बाल कोशिकाओं (सिलिया) को नुकसान पहुंचाने के लिए पर्याप्त है। यह सुनने की क्षमता कम करने का कारण बनती है। चूंकि इन-ईअर हेडफोन्स को कान की नली के अंदर, काफी गहराई पर लगाया जाता है इसलिए यह बहरेपन के जोखिम को बहुत बढ़ा देता है। हल्की चिप वाली आरामदायक ध्वनियां जैसे कि ड्रम्स, अकॉस्टिक गिटार, तबला और अन्य वाद्यों की ध्वनि उतनी नुकसानदेह नहीं हैं लेकिन हाई-पिच वाले वाद्य व भारी धातु की आवाजों से कुछ ही समय में सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंच सकता है।

सुनने की क्षमता पर प्रभाव बहरापन

  • अंदरूनी कान की बाल कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने की वजह से अस्थायी और स्थायी बहरापन हो सकता है।
  • टिनिटस यानी ऊंची आवाज़ सुनने पर कान में घंटी बजना या गूंज सी संवेदना की दिक्क्त हो सकती है।
  • कान में दर्द और संक्रमण। कान भर जाना, कान सुन्न होना। तीन फीट से ज़्यादा दूरी से बातचीत करने में दिक्कत।
  • ऊंची पिच वाली आवाजों को पहचानने में दिक्कत जैसे कि /sh// s//f//i/ आदि धीमी आवाज़।
  • थकान होना। टेलीफोन पर शोरगुल वाले माहौल में बात समझने में दिक्कत।

ऐसे होती है समस्या

  • चक्कर आना : चूंकि ऊंची आवाज सुनने की वजह से काम के दबाव पर असर पड़ सकता है और इस वजह से चक्कर आ सकते हैं।
  • कनेक्टिविटी खो देना: चलते या जॉगिंग करते हुए लोग ईयरफोन्स को सुनने में इतने ज़्यादा खो जाते हें कि उन्हें अपने आसपास की ख़बर नहीं रह जाती। इस वजह से हादसे होते हैं।
  • संतुलन बिगड़ना: चूंकि अंदरूनी कान वेस्टिब्यूलर सिस्टम से जुड़ा होता है, जो शरीर के संतुलन को बनाए रखता है, इसलिए ऊंची आवाज उस पर भी बुरा असर डाल सकती है। मनोवैज्ञानिक तनाव और चिंता।
  • सुनने पर असर : ज़्यादा देर ऊंची आवाज सुनने से दिमाग तक सिग्नल पहुंचाने वाली तंत्रिका की इंसुलेटिंग शीट में अपक्षय हो जाता है।

ऐसे करें बचाव

  • वॉल्यूम कम रखें: 60-60 नियम लागू करें। एक दिन में अधिकतम 60 मिनट तक अधिकतम वॉल्यूम के 60 प्रतिशत में संगीत सुनें। ऊंची आवाज़ कम सुनना चाहिए। लंबे समय तक हल्के स्तर पर संगीत भी नुकसानदेह हो सकता है।
  • सुनने की लत है, तो छोटे ब्रेक्स लें: अंदरूनी कान की संवेदी कोशिकाओं की रुकावट से होने वाली श्रवण संबंधी थकान से रिकवर होने के लिए ब्रेक ज़रूरी हैं।
  • कान के ऊपर लगने वाले हेडफोन का प्रयोग करें: इन्हें सुप्रा-ऑरल ईयरफोन्स भी कहते हैं। चूंकि इन्हें कान के पर्दे के पास नहीं लगाया जाता है, इसीलिए इनसे कान के पर्दे पर ध्वनि का दबाव कम होता है।
  • शोर ख़त्म करने वाले ईयरफोन्स या हेडफोन का प्रयोग करें : यह शोर के अनुपात से सिग्नल को बढ़ाता है और शोरगुल वाले माहौल में वॉल्यूम बढ़ाने की आदत को कम करता है। यह कस्टमाइज्ड इयरप्लग्स कहलाते हैं। शोरगुल वाले माहौल में ईयरफोन्स, हेडफोन का इस्तेमाल करने से बचिए। सड़क के हादसों के जोखिम से बचने के लिए यह आवश्यक है। निजी ऑडियो डिवाइसों पर सुरक्षित सुनने के स्तरों को निर्धारित करें।
  • दूसरों के साथ ईयरफोन्स साझा न करें: ईयरफोन को यहां-वहां फेंकने से बचिए, पसीना या नमी हो तो साफ करके ही प्रयोग कीजिए। इससे कीटाणुओं की वजह से होने वाले संक्रमण से बचाव में कारगर है। इसके अलावा दूसरों के ईयरफोन का इस्तेमाल करने से बचें, इससे संक्रमण की आशंका भी होती है।
  • जांच कराएं : ऑडियोलॉजिस्ट या ईएनटी विशेषज्ञ से नियमित तौर पर जांच करवाते रहें। ऑडियो उत्पादों की पैकेजिंग पर लिखे सुर​क्षा के दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए।