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अंडर-30Y कॉलम: दुनिया में सबसे अधिक वीआईपी भारत में ही क्यों हैं?

सवाल यह है कि राहुल ने जो किया वह सुर्खी क्यों बन गई?

Danik Bhaskar | Sep 08, 2018, 12:26 AM IST
रिज़वान अंसारी रिज़वान अंसारी

हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा केरल में एम्बुलेंस हेलिकॉप्टर को प्राथमिकता देने के लिए खुद के हेलिकॉप्टर को आधा घंटा रोके रखने की खबर सुर्खियों में रही। दूसरी ओर पटना में केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के काफिले के कारण एंबुलेंस के जाम में फंस जाने और हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर की रैली के कारण एंबुलेंस के फंस जाने से बच्चे की मौत की खबर भी आई।


लेकिन, सवाल यह है कि राहुल ने जो किया वह सुर्खी क्यों बन गई? क्या किसी की जान बचाना एक इंसान का काम नहीं होना चाहिए? फिर जब किसी की जान बचाना मानवता की बुनियाद है तो हैरानी कैसी? दरअसल, जब हम किसी नेता द्वारा किसी एंबुलेंस या फायरब्रिगेड को आगे जाने देने या किसी की जान बचाने की खबर पर हैरानी व्यक्त करते हैं तो, इसका मतलब यह है कि यह बात स्थापित हो चुकी है कि नेता लोग बेबस या कमजोर की परवाह नहीं करते या एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को तरजीह देना उनकी प्राथमिकताओं में नहीं है। दरअसल, ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं, जब इन वीआईपी के चक्कर में लोगों ने सड़कों पर ही दम तोड़ दिया है। क्या हम उसे लोकतंत्र कह सकते हैं, जहां लोकतंत्र की सबसे बड़े भागीदार जनता के एबुलेंस को आगे जाने देना नेताओं के विशेषाधिकार से जोड़ा जाए ?


क्या हमने कभी गौर किया है कि दुनियाभर में सबसे ज्यादा वीआईपी भारत में हैं। एक अध्ययन के मुताबिक भारत सरकार की लिस्ट में लगभग दो हजार वीआईपी हैं, जबकि अमेरिका में 252, जर्मनी में 142, ऑस्ट्रेलिया में 205 और सबसे अधिक आबादी वाले देश चीन में महज 435 वीआईपी हैं। क्या हमारे देश के माननीय नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री से सबक लेंगे, जो निजी कार्य के लिए साइकिल का इस्तेमाल करते हैं। महज लालबत्ती हटा देने जैसी कवायद से वीआईपी संस्कृति वाली मानसिकता नहीं जाएगी बल्कि, हमारे सियासतदानों को सोच बदलनी होगी। फिर सवाल यह भी है कि क्या नेताओं की ऐसी मानसिकता लोकतंत्र की बुनियाद को कमजोर नहीं करती है?

(लेख- रिज़वान अंसारी, 26 जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली)