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अंतिम संस्कार के समय कैसे और क्यों की जाती है कपाल क्रिया?

हिंदू धर्म में मृत्यु के उपरांत मृतक का दाह संस्कार किया जाता है अर्थात मृत देह को अग्नि को समर्पित किया जाता है।

Dainik Bhaskar

Apr 07, 2018, 07:14 PM IST
why do kapal kriya after death., कपाल क्रिया

यूटिलिटी डेस्क. हिंदू धर्म में मृत्यु के उपरांत मृतक का दाह संस्कार किया जाता है अर्थात मृत देह को अग्नि को समर्पित किया जाता है। दाह संस्कार के समय कपाल क्रिया भी की जाती है। दाह संस्कार के समय कपाल क्रिया क्यों की जाती है, इसका वर्णन गरूड़ पुराण में मिलता है। उसके अनुसार-

- मृत शरीर को मुखाग्नि देने के कुछ समय बाद बांस में लोटा बांधकर शव के सिर वाले हिस्से में और घी डाला जाता है ताकि सिर पूरी तरह से जल जाए, कोई हिस्सा शेष न बचे। इसे ही कपाल क्रिया कहते हैं।
- कुछ स्थानों पर शवदाह के समय मृतक के सिर पर घी की आहुति दी जाती है और तीन बार डंडे से प्रहार कर खोपड़ी फोड़ी जाती है। इसे भी कपाल क्रिया कहते हैं।
- एक मान्यता है कि कपाल क्रिया के बाद ही प्राण पूरी तरह स्वतंत्र होते हैं और नए जन्म की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
- दूसरी मान्यता है कि खोपड़ी को फोड़कर मस्तिष्क को इसलिए जलाया जाता है ताकि वह अधजला न रह जाए अन्यथा अगले जन्म में वह अविकसित रह जाता है।
- श्राद्ध चंद्रिका पुस्तक के अनुसार, सिर में ब्रह्मा का वास माना गया है इसलिए शरीर को पूर्ण रूप से मुक्ति प्रदान करने के लिए कपाल क्रिया की जाती है।
- खोपड़ी की हड्डी इतनी मजबूत होती है कि उसे अग्नि में भस्म होने में समय लगता है। वह फूट जाए और मस्तिष्क में स्थित ब्रह्मरंध्र पंचतत्व में पूर्ण रूप से विलीन हो जाए। इसीलिए कपाल क्रिया की जाती है।
- कुछ तांत्रिक सिद्धियां प्राप्त करने के लिए मृत शरीर की खोपड़ी का उपयोग करते हैं, इसलिए भी कपाल क्रिया की जाती है।

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