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माता सावित्री के श्राप के कारण नहीं की जाती ब्रह्मा जी की पूजा, पुष्कर में है एक मात्र मंदिर

3 वर्ष पहले
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धर्म डेस्क. हिंदू ग्रंथों और पुराणों के अनुसार ब्रह्मा, विष्णु और महेश को सृष्टि का निर्माता, पालनकर्ता और संहारक माना जाता हैं। लेकिन आप के मन में ये सवाल कई बार आता होगा कि विष्णु और महेश (शिव जी) के तो दुनियाभर में कई मंदिर हैं और लोग घर में भी इनकी स्थापना कर इनकी पूजा करते हैं। लेकिन ब्रह्मा की पूजा कभी नहीं की जाती। और उनका केवल एक ही मंदिर है, जो पुष्कर में है। ब्रह्माजी की पूजा करना वर्जित क्यों माना गया है‌? दरअसल देवी सावित्री के श्राप के कारण ही ब्रह्माजी की पूजा वर्जित मानी गई है।
देवी सावित्री ने दिया था श्राप 
- पुराणों के अनुसार एक बार ब्रह्मा जी हाथ में कमल का फूल लिए हुए अपने वाहन हंस पर सवार होकर अग्नि यज्ञ के लिए उचित स्थान की तलाश कर रहे थे।
- तभी एक जगह पर उनके हाथ से कमल का फूल गिर गया। फूल के धरती पर गिरते ही धरती पर एक झरना बन गया और उस झरने से 3 सरोवर बन गए। 
- जिन जगहों पर वो तीन झरने बने उन्हें ब्रह्म पुष्कर, विष्णु पुष्कर और शिव पुष्कर के नाम से जाना जाता है। यह देखकर ब्रह्मा जी ने इसी जगह यज्ञ करने का निर्णय लिया।
कर लिया था दूसरा विवाह
- यज्ञ में ब्रह्मा जी के साथ उनकी पत्नी का होना जरुरी था। भगवान ब्रह्मा की पत्नी सावित्री वहां नहीं थी और शुभ मुहूर्त निकला जा रहा था। 
- इस कारण ब्रह्मा जी ने उसी समय वहां मौजूद एक सुदंर स्त्री के विवाह करके उसके साथ यज्ञ संपन्न कर लिया। 
- जब यह बात देवी सावित्री को पता चली। इससे नाराज होकर उन्होंने ब्रह्मा जी को यह श्राप दे दिया कि जिसने सृष्टि की रचना की पूरी सृष्टि में उसी की कहीं पूजा नहीं की जाएगी। 
- पुष्कर को छोड़ कर पूरे विश्व में भगवान ब्रह्मा का कहीं मंदिर नहीं होगा। इसी श्राप की वजह से ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर पुष्कर में है।
ब्रह्मा जी ने यहीं रचा था ब्रह्माण
- पद्म पुराण के अनुसार ब्रह्माजी पुष्कर के इस स्थान पर दस हजार सालों तक रहे थे। इस दौरान उन्होंने सृष्टि की रचना की। 
- इसके बाद उन्होंने पांच दिनों तक यज्ञ किया था। उसी यज्ञ के दौरान सावित्री पहुंच गई थीं। आज भी श्रद्धालु केवल दूर से ही ब्रह्मा जी से करते हैं। 
देवी सावित्री हैं विराजमान
- पुराण के अनुसार गुस्सा कम होने के बाद सावित्री पुष्कर के पास मौजूद पहाड़ियों पर जाकर तपस्या करने चलीं गईं थीं। 
- मान्यताओं के अनुसार सावित्री देवी मंदिर में रहकर भक्तों का कल्याण करती हैं।

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