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वाइट पॉयजन : चीनी, रिफाइंड चावल, नमक और मैदा कैसे नुकसान पहुंचाता है?

आहार विशेषज्ञों के मुताबिक डाइट में रिफाइन फूड को कम से कम इस्तेमाल करना चाहिए।

Dainik Bhaskar

Jun 09, 2018, 05:07 PM IST
शक्कर में भारी मात्रा में कैलोरी रहती है। इसमें जरूरी पोषण कुछ भी नहीं है। शक्कर में भारी मात्रा में कैलोरी रहती है। इसमें जरूरी पोषण कुछ भी नहीं है।

हेल्थ डेस्क. अक्सर आहार विशेषज्ञ रिफाइन फूड को लेने से मना करते हैं। इनमें पोषक तत्व की मात्रा काफी कम होती है साथ ही ये सेहत को कई तरह से नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसी ही कुछ चीजों को व्हाइट पॉयजन के रूप में जाना जाता है। ये शरीर में कई बीमारियों के कारण होते हैं। इनका सेवन जितना कम से कम हो उतना अच्छा। जानिए क्या हैं ये चीजें और क्यों ये तकलीफदायक हैं-

क्यों ये चार चीजें वाइट पॉयजन कहलाती हैं?

शक्कर: मोटापा, डायबिटीज और लिवर डिजीज बढ़ाती
शक्कर में भारी मात्रा में कैलोरी रहती है। इसमें जरूरी पोषण कुछ भी नहीं है। मेटाबॉलिज्म पर ये खराब असर डालती है और इससे कई तरह की बीमारियां, जैसे मोटापा, कैंसर, टाइप—2 डायबिटीज, लिवर के रोग हो सकते हैं। शक्कर के रक्त में मिलने से पहले पाचन मार्ग में यह सिम्पल शुगर के दो भाग ग्लूकोज़ और फ्रक्टोज़ में विभाजित होती है। जो लोग शारीरिक श्रम नहीं करते हैं, उन्हें इससे मुश्किल होती है।

रिफाइंड चावल: ब्लड शुगर का लेवल बढ़ता है
चावल की प्रोसेसिंग कर उसे रिफाइन किया जाता है। धान के रूप में उसका जो छिलका रहता है, वह निकाल लेते हैं। इसके बाद इसमें सिर्फ स्टार्च शेष रहता है। इसका अधिक सेवन करने से ब्लड शुगर बढ़ सकती है और ग्लूकोज का स्तर भी भारी मात्रा में बढ़ता है।

रिफाइंड नमक: ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा
नमक शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखता है। यदि आप ज्यादा नमक का सेवन करेंगे तो पानी ज्यादा मात्रा में होगा और आप रक्तचाप की चपेट में आ जाएंगे। हमारे देश में वयस्कों में हर तीन में से एक इससे पीड़ित है। चूंकि रिफाइंड नमक में आयोडीन खत्म हो जाता है और प्रोसेसिंग के दौरान इसमें फ्लोराइड मिलाया जाता है। पौन चम्मच नमक दिन भर में खाना ठीक है।

मैदा: नहीं मिलता है फायबर
जब भी मैदा बनाया जाता है, गेहूं पर से एंडोस्पर्म हट जाता है। साथ ही गेहूं में पाचन के लिए जो फाइबर होता है, वह नष्ट हो जाता है। लिहाजा यह पाचन को और कठिन बना देता है। क्योंकि इसे पीसकर इतना महीन कर दिया जाता है कि उसमें सारे तत्व समाप्त हो जाते हैं।

जब भी मैदा बनाया जाता है, गेहूं पर से एंडोस्पर्म हट जाता है। साथ ही गेहूं में पाचन के लिए जो फाइबर होता है, वह नष्ट हो जाता है। जब भी मैदा बनाया जाता है, गेहूं पर से एंडोस्पर्म हट जाता है। साथ ही गेहूं में पाचन के लिए जो फाइबर होता है, वह नष्ट हो जाता है।
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शक्कर में भारी मात्रा में कैलोरी रहती है। इसमें जरूरी पोषण कुछ भी नहीं है।शक्कर में भारी मात्रा में कैलोरी रहती है। इसमें जरूरी पोषण कुछ भी नहीं है।
जब भी मैदा बनाया जाता है, गेहूं पर से एंडोस्पर्म हट जाता है। साथ ही गेहूं में पाचन के लिए जो फाइबर होता है, वह नष्ट हो जाता है।जब भी मैदा बनाया जाता है, गेहूं पर से एंडोस्पर्म हट जाता है। साथ ही गेहूं में पाचन के लिए जो फाइबर होता है, वह नष्ट हो जाता है।
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