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ताजमहल देश के लिए जरूरी क्यों है? कैसे तय होती है धरोहर ?

भारत में ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की जिम्मेदारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संस्थान (एएसआई) निभा रहा है।

Danik Bhaskar | Jul 30, 2018, 04:07 PM IST

लाइफस्टाइल डेस्क. बीते कुछ समय से देश की वैश्विक धरोहर ताजमहल विवादों के घेरे में है। केंद्र और यूपी सरकार द्वारा ताज की भव्यता बकरार रखने में नाकाम रहने पर कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है। ऐसे में जानना जरूरी है कि ताज हमारे लिए क्यों जरूरी है? संसद में दिए एक जवाब के मुताबिक साल 2013 से 2016 के बीच ताजमहल की टिकट से 67.7 करोड़ की कमाई हुई। वर्ष 2013-14 में ये कमाई 22.5 करोड़, 2014-15 में 21.3 करोड़ और 2015-16 में 23.9 करोड़ रुपए रही। सफेद संगमरमर से बने ताजमहल की खूबसूरती को देखने के लि‍ए हर साल 9 से 10 लाख टूरिस्ट भारत आते हैं। यानी देखा जाए तो पर्यटन और देश की अर्थव्यवस्था दोनों के लिए ताजमहल बेहद जरूरी है। पिछले काफी समय से ताजमहल को सुरक्षित रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। इस दौरान कोर्ट ने सरकार और ताज ट्रैपेजियम जोन (टीटीजेड) प्राधिकरण की निंदा की और सवाल किया कि अगर यूनेस्को संगमरमर के इस स्मारक से विश्व धरोहर स्थल का दर्जा वापस ले ले तो क्या होगा?

अधिकांश खतरे में
भारत में वैश्विक धरोहरों को लेकर यह हाल सिर्फ ताजमहल तक ही सीमित नहीं है। यूनेस्को की विश्व धरोहर की रेस से दिल्ली का लोटस मंदिर पहले ही बाहर हो चुका है। यूनेस्को ने 1052 स्थलों को विश्व धरोहर घोषित किया हुआ है। इनमें 203 प्राकृतिक धरोहरों की श्रेणी में आते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक करीब 100 प्राकृतिक श्रेणी की विश्व धरोहर खतरे में हैं। यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज के दो तिहाई क्षेत्र ऐसे हैं जो पेयजल के लिए महत्वपूर्ण साधन हैं, जबकि आधे ऐसे हैं जो प्राकृतिक आपदाओं से वहां के लोगों की सुरक्षा करते हैं। उद्योगों का ताबड़तोड़ हो रहा विकास इन धरोहरों को तेजी से नुकसान पहुंचा रहा है। वैश्विक स्तर पर भारत हेरिटेज साइट्स को लेकर एक अच्छी स्थिति में है। फिलहाल यूनेस्को ने भारत के 35 महत्वपूर्ण स्थलों को वैश्विक धरोहर के रूप में घोषित कर रखा है। हालांकि भारत में जिस हिसाब से प्राकृतिक स्थलों की भरमार है, उसे देखकर इतनी संख्या बेहद कम कही जा सकती है। आश्चर्य की बात तो यह है कि भारत का एक भी शहर वर्ल्ड हेरिटेज सिटी में शामिल नहीं है। दुनियाभर के 287 शहर हेरिटेज सिटी हैं।

खतरा क्यों?
यूनेस्को की व‌र्ल्ड हेरिटेज कमेटी ने 55 धरोहरों को खतरे की सूची में रखा है। इनमें प्रमुख तौर पर अफगानिस्तान की बामियान वैली, इजिप्ट का अबू मेना, यरूशलम शहर एवं दीवार, डोमेस्टिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो की पांच धरोहरें, सीरियन अरब रिपब्लिक की छह एवं कई देशों के नेशनल पार्क शामिल हैं।

संरक्षण का अभाव
भारत में ऐतिहासिक धरोहरें खंडहर में तब्दील होती जा रही हैं। भारत में ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की जिम्मेदारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संस्थान (एएसआई) निभा रहा है। देश भर में फैले ऐतिहासिक धरोहरों के खजाने को एएसआई किसी तरह संभाल रहा है। संसाधनों की कमी को यूनेस्को जैसी विश्व संस्थाओं की मदद से पूरा करने में काफी मदद भी मिलती है। इसके बाद भी इन इमारतों का पुराना वैभव नहीं लौट पा रहा है।

विश्व विरासत से ऐसे होता है फायदा
वर्ल्ड हेरिटेज कहलाना गौरव की बात होती है। इससे उस शहर का नाम विश्व पर्यटन पर उभर जाता है। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलता है। भारी संख्या में विदेशी पर्यटक उस स्थान को देखने और उसकी विशेषता को जानने के लिए वहां आते हैं। विदेशी पर्यटकों के लिए वहां सभी सुविधाएं जुटाई जाती हैं। इन सुविधाओं का फायदा सभी को मिलता है। इससे कई लोगों को रोजगार मिलता है। विदेशी पर्यटक देश की संस्कृति से रूबरू होते हैं। 1972 में यूनेस्को ने इन धरोहरों की सुरक्षा के लिए नियम बनाया था।

कैसे तय होती है धरोहर
जो भी देश इस सूची में अपने स्थलों को नामांकित कराना चाहता है, उसे सर्वप्रथम अपनी महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों की एक सूची बनानी होती है। विश्व धरोहर केन्द्र इस फाइल को बनाने में सलाह देता और सहायता करता है। इस सूची का निरीक्षण अंतरराष्ट्रीय स्मारक, स्थल परिषद और विश्व संरक्षण संघ करते हैं। इसके बाद यह संस्थाएं विश्व धरोहर समिति से सिफारिश करती हैं। समिति वर्ष में एक बार समीक्षा और मूल्यांकन सभा का आयोजन करती है। सभा यह निर्णय लेती है, कि प्रत्येक नामांकित सम्पदा को विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित करना है या नहीं?

राह के रोड़े
यूरोप और दुनिया के अन्य विकसित देशों को सरकार और जनता की सहज भागीदारी से अपनी मुट्ठीभर एेतिहासिक धरोहरों को सहेजकर आसानी से यूनेस्को की विरासत सूची में जगह मिल रही है। भारत में यह काम सरकार से लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है। पिछले कई सालों के तमाम प्रयासों के बावजूद अब तक किसी भी शहर को विश्व विरासत शहर का तमगा हासिल नहीं हो पाया है। जनभागीदारी का अभाव और सरकारी तंत्र का गैरजिम्मेदाराना रवैया इस राह के सबसे बड़े रोड़े बन गए हैं।

धरोहर की ये है 3 श्रेणियां
01. प्राकृतिक धरोहर स्थल

ऐसी धरोहर भौतिक या भौगोलिक प्राकृतिक निर्माण का परिणाम या भौतिक और भौगोलिक दृष्टि से सुंदर, वैज्ञानिक महत्व, विलुप्ति के कगार पर खड़ी कोई जगह हो सकती है।

02. सांस्कृतिक धरोहर स्थल
इस श्रेणी की धरोहर में स्मारक, स्थापत्य की इमारतें, मूर्तिकारी, चित्रकारी, स्थापत्य की झलक वाले, शिलालेख, गुफा आवास और वैश्विक महत्व वाले स्थान आते हैं।

03. मिश्रित धरोहर स्थल
इस श्रेणी के अंतर्गत वह धरोहर स्थल आते हैं जो कि प्राकृतिक और सांस्कृतिक दोनों ही रूपों में महत्वपूर्ण होते हैं।