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डाउनलोड करेंझालावाड़(कोटा). कोल्वी में 8वीं शताब्दी की 142 बौद्ध गुफाएं पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। अब यहां देसी-विदेशी पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। आर्कियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की ओर से संरक्षित घोषित की गई इन गुफाओं में जल्द ही वाई-फाई की सुविधा मिलने लगेगी। इन मोन्यूमेंट्स की सेंट्रलाइज्ड मॉनिटरिंग भी की जाएगी।
चीनी यात्री ह्वेनसांग ने अपने ट्रेवलॉग में किया जिक्र
सीनियर कंजरवेशन असिस्टेंट सुरेश कुमावत ने बताया कि पर्यटकों की सुविधा के लिए यहां पाथ-वे और इंफॉर्मेशन सेंटर बन चुका है। 135 मीटर लंबी सेफ्टी रेलिंग भी बनेगी। इतिहासविद ललित शर्मा का कहना है कि इन गुफाओं का निर्माण 7वीं या 8वीं शताब्दी में मालवा के तत्कालीन शासकों द्वारा बौद्ध भिक्षुओं के निवास के लिए कराया गया था। खास बात यह है कि प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग ने अपने ट्रेवलॉग में भी इन गुफाओं का जिक्र किया है।
कई गुफाओं में अग्निकुंड भी
शर्मा बताते हैं कि कोल्वी में 103, बिनायका में 24, हाथियागौड़ में 9 और गुनई में 6 बौद्धकालीन गुफाएं हैं। ये बौद्ध संप्रदाय के हीनयान और महायान संप्रदाय के अवशेष हैं। एक दर्जन गुफाओं में अग्निकुंड बने हैं। गुफाओं का स्वरूप हाथी की पीठ जैसा है। यहां चक्र घंटी स्तूप खास है। यहां आधे फीट तक की मूर्तियां भी हैं। इसमें बुद्ध की खड़ी हुई शिक्षण मुद्रा की मूर्ति भी है।
आज गागरोन में निशुल्क प्रवेश
विश्व विरासत दिवस पर बुधवार को गागरोन दुर्ग में प्रवेश निशुल्क रहेगा। इसके लिए पुरातत्व निदेशालय से आदेश जारी हुए हैं। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि निर्देश मिल चुके हैं गागरोन में बुधवार को किसी से भी शुल्क नहीं लिया जाएगा।
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