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विवादों से बचने इस बार 35 हजार 150 नई वोटिंग मशीनों से होंगे विस चुनाव

3 वर्ष पहले
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रायपुर.   छत्तीसगढ़ में विवादों से परे चुनाव कराने बड़ी तैयारी चल रही है। राज्य का मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय इस कवायद में लगा है। केंद्रीय निर्वाचन  आयोग की भी छत्तीसगढ़ पर नजर है क्योंकि यहां हर बार कड़ा मुकाबला होता है। यही वजह है कि यहां नवंबर-दिसंबर में प्रस्तावित चुनावों में बिल्कुल नई 35 हजार 150 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) से चुनाव कराए जाएंगे। ये मशीनें हैदराबाद में इलेक्ट्रानिक कार्पोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड में बन रही हैं।


राज्य में न सिर्फ ईवीएम मशीनें बल्कि पहली दफे राज्यभर में इस्तेमाल होने वाले 30 हजार 435 वीवी-पैट भी नए होंगे। इसके साथ ही पीठासीन अधिकारी के पास रहने वाली कंट्रोल यूनिट भी नई होंगी। 29 हजार 300 कंट्रोल यूनिट व वीवी-पैट भी ईसीआई हैदराबाद में ही बन रही हैं। प्रदेश के नए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुब्रत साहू को ज्वाइंट सीईओ समीर विश्वनोई, डिप्टी सीईओ यूएस अग्रवाल, स्वीप कार्यक्रम प्रभारी केआर सिंह, असिस्टेंट सीईओ एमएल सोनी, डिप्टी डायरेक्टर फाइनेंस श्रद्धा त्रिवेदी कुमार जैसे  नए और अनुभवी अफसरों-कर्मचारियों की टीम मिली है। उन्होंने केंद्रीय निर्वाचन आयोग के निर्देश के अनुसार चुनावी ब्लूप्रिंट तैयार करना शुरू कर दिया है। प्रदेश में इस चुनाव में अधिक बूथ होंगे। पिछली बार 22 हजार 929 थे जो बढ़कर 23 हजार 411 हो गए है। चुनावी तैयारियों का जायजा लेने छत्तीसगढ़ प्रभारी संदीप सक्सेना कभी भी दौरा कर सकते हैं।

हर बार रही कांटे की टक्कर 

राज्य में कांग्रेस - भाजपा में पिछले तीन चुनावों में हर बार कांटे की टक्कर रही है। 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ के रूप में नया राज्य बनने के बाद से ही दिलचस्प नतीजे सामने आए हैं। 2003 का विधानसभा चुनाव भाजपा कांग्रेस को 2.55 फीसदी वोटों यानी ढाई प्रतिशत वोटों के अंतर से हराकर सत्ता पर काबिज हुई थी। 2008 के विधानसभा चुनाव में यह जीत का अंतर और सिमट गया। भाजपा ने कांग्रेस को 1.70 प्रतिशत वोट से हराकर सत्ता हासिल की।

 

पिछली बार 2013 के चुनाव में तो भाजपा के लिए यह महीन जीत साबित हुई। वह केवल 0.76 यानी पौन प्रतिशत वोटों के अंतर से ही तीसरी बार सरकार बनाने में सफल रही। यानी हर बार दोनों दलों में मुकाबला चुनाव-दर-चुनाव कड़ा होता जा रहा है। यही वजह है कि राज्य का मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी दफ्तर वोटरलिस्ट को लेकर सख्ती से फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। आंकड़ों पर गौर करें तो 2013 में केवल 2 लाख 40 हजार वोटों से 90 विधानसभा सीटों की जीत-हार का फैसला हुआ। औसत निकालें तो 2666 वोटों से हर सीट पर निर्णय माना जा सकता है। 
हालांकि कई सीटों पर जीत का अंतर 100 या 500 से भी कम रहा है। जबकि जीत का अंतर हजारों में है।
 

 

किसे कितने वोट मिले
चुनावी वर्षपार्टी  वोट प्रतिशत
2003कांग्रेस35,43,754 36.71
2003भाजपा37,89,91439.26
2008कांग्रेस41,50,37738.63
2008भाजपा43,33,935 40.33
2013कांग्रेस53,65,27242.34
2013भाजपा53,67,69841.57
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