प्रेग्नेंसी में ऐसी कंडीशन की शिकार हुई महिला कि बदबू के चलते ब्रश करना और बाल धोना तक हुआ मुश्किल, प्यास लगती पर पानी का एक घूंट नहीं जाता अंदर

छठवें हफ्ते में ऐसी हो गई हालत, डॉक्टर ने कहा- करना पड़ेगा अबॉर्शन

dainikbhaskar.com

Apr 24, 2019, 01:01 PM IST
Woman reveal morning sickness forced me to terminate my pregnancy

लंदन. इंग्लैंड की एक महिला ने कुछ महीने पहले अपने प्रेग्नेंसी के वक्त का खौफनाक अनुभव बयां किया था। महिला को नोजिया की ऐसी समस्या हुई कि टूथपेस्ट से लेकर शैम्पू तक हर चीज से बदबू आती थी। दिन में 30 से ज्यादा उल्टियां होतीं और पानी भी पचा पाना मुश्किल हो गया था। 4 किलो तक वजन गिर चुका था। 4 तरह की दवाइयां हुईं लेकिन इसने मानसिक स्थिति भी बिगाड़ दी। महिला के जेहन में खुदकुशी जैसे ख्याल आने लगे। लिहाजा, 6 हफ्ते बाद डॉक्टर ने कहा कि उसे अबॉर्शन कराना होगा, तभी उसे हॉस्पिटल से डिस्चार्ज किया जाएगा। डॉक्टर ने बताया कि ये सब हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम कंडीशन के चलते हो रहा था, जिसका दुनियाभर में 10 फीसदी प्रेग्नेंट महिलाएं सामना करती हैं और उन्हें अपनी प्रेग्नेंसी टर्मिनेट करानी पड़ती है।

6 हफ्ते की प्रेग्नेंसी में हुआ बदतर हाल

- ये कहानी बेथन जेन्किंस की है, प्रेग्नेंसी की खबर मिलते ही नोजिया (बदबू आना) और उल्टियों की परेशानी होने लगी। प्रेग्नेंसी में ये सामान्य है लेकिन बेथन को हो रही उल्टियां सामान्य नहीं थी।
- बिना कुछ खाए-पीए उसे दिन में 30 से ज्यादा बार उल्टी होती। उसके लिए खाना-पीना और बेड से उठना मुश्किल हो गया। डॉक्टर ने जांच की तो पता चला कि वो एचजी यानी हाइपरमेसिस ग्रेविडेरम कंडीशन से जूझ रही है।
- बेथन ने बताया कि एचजी कोई सामान्य बीमारी नहीं थी। इसके चलते मुझे हर चीज से बदबू आती थी। मेरे लिए दांतों में टूथब्रश करना मुश्किल हो गया था। वहीं, बाल धोना बहुत बड़ा चैलेंज हो गया था।
- खाने-पीने में हो रही दिक्कत के चलते शरीर में जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स की कमी होने लगी थी, जिसके चलते स्किन जगह-जगह से बुरी तरह से फट रही थी और उस पर बदबू के चलते क्रीम भी लगाना संभव नहीं था।
- बेथन उल्टियों के चलते पानी का एक घूंट भी नहीं ले पा रही थीं। वो सिर्फ थोड़ा सा पानी मुंह में डालती और मुंह गीला कर उसे थूक देती। लिहाजा, शरीर में पानी की भी कमी होने लगी।
- महज दो हफ्ते में उनका 4 किलो वजन गिर चुका था। वहीं, इतने वक्त में वो चार तरह की दवाइंयां ट्राई कर चुकी थी, जिसने उसकी मानसिक स्थिति भी बिगाड़ दी थी। उसके मन में सुसाइड के ख्याल आने लगे थे।

डॉक्टर ने सुनाई बुरी खबर

- प्रेग्नेंसी को 6 हफ्ते बीत चुके थे और उसकी हालत को देखते हुए डॉक्टर ने उसे मैटर्निटी वॉर्ड में एडमिट कराया, ताकि उसे पाइप के जरिए खाना दिया जा सके और डिहाइड्रेशन का भी इलाज हो सके।
- बेथन ने बताया कि डिहाइड्रेशन के इलाज के बाद उसके आंखों के सामने छाया रहने वाला धुंधलापन और बैचेनी दूर हुई। पर उल्टियों की स्थिति बनी रही और कुछ खाना-पीना अब भी मुश्किल था।
- ट्रीटमेंट के बावजूद हर दिन बेथन की कंडीशन खराब होती जा रही थी। डॉक्टर के पास भी अब प्रेग्नेंसी को टर्मिनेट करने के सिवाय कोई विकल्प नहीं था। डॉक्टर्स ने बेथन को अबॉर्शन कराने को कहा।
- दुनिया में 10 फीसदी प्रेग्नेंट महिलाएं एचजी से जूझती पाई जाती हैं। इसके चलते उन्हें अपनी प्रेग्नेंसी भी टर्मिनेट करानी पड़ती है, क्योंकि इसमें जान जाने का खतरा है। बेथन को इस बात का डर सताने लगा कि वो कभी मां भी बन पाएगी या नहीं।

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