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डाउनलोड करेंश्रीगंगानगर(जयपुर). चार दिन पहले रायसिंहनगर में रेलवे कॉलोनी के पास बने ट्रैक पर महिला की बिना सिर की लाश मिली थी। अब चार दिन बाद उस महिला का कटा हुआ सिर मिला, जो क्षत-विक्षत हालत में डिस्कॉम कार्यालय के प्याऊ के पीछे पड़ा था। चार दिन तक न तो पुलिस ने गायब सिर की तलाश की, न ही जीआरपी ने प्रयास किए। हद तो यह है कि सिर बरामद होने के बाद अब जिम्मेदार सारा दोष कुत्तों पर डाल रहे हैं। पुलिस के इस बयान से मृतका के परिजनों ने गहरी आपत्ति जताते हुए लापरवाही के आरोप लगाए हैं। शव वार्ड 10 निवासी इंद्रा बिश्नोई का था। ऐसे दिखा कटा हुआ सिर...
घटना का पता उस समय लगा जब विद्युत निगम के एक कर्मचारी की पत्नी ने दुर्गंध आने पर प्याऊ के पास जाकर कटे सिर को देखा और अपने पति को बताया। सूचना पर एएसआई रतीराम मौके पर पहुंचे तथा क्षत विक्षत सिर व पास में पड़े बालों को कब्जे में लेकर जीआरपी को सूचना दी। इसके बाद ओमप्रकाश गिला ने सिर में पहले से लगी चोट के निशान देखकर अपनी पत्नी के ही होने की पहचान की। उल्लेखनीय है कि इंद्रा बिश्नोई के ट्रेन से कटने पर उसका शरीर क्षत विक्षत हो गया था। तब पुलिस व जीआरपी को जो-जो अंग मिले, समेटकर परिजनों को सौंप दिए।
मेरी पत्नी की मौत हुई थी, सिर गायब था, पुलिस ने बिना ढूंढे ही पोस्टमार्टम
मृतका के पति ओमप्रकाश ने भास्कर संवाददाता को बताया कि घटना के दिन सुबह मेरे पुत्र प्रिंस का 11 वीं का पेपर था। मैं उसे एमडी स्कूल में छोड़ने बाइक पर जा रहा था कि रेलवे कर्मचारी कालोनी के रामदेव मंदिर के पास मेरे पुत्र ने मुझे कहा कि मम्मी की चुन्नी लाइनों पर पड़ी है। जब मैं व मेरा पुत्र रेलवे ट्रैक पर पहुंचे तो पुलिस भी मौके पर पहुंच चुकी थी। मैंने मेरी पत्नी इंद्रा की शिनाख्त की। उस समय एक हाथ व सिर गायब था। बाद में हाथ पुलिस ने बिजली बोर्ड के मुख्य गेट के नजदीक बरामद कर लिया, लेकिन सिर बरामद नहीं हुआ। पुलिस ने उसी हालत में शव को मोर्चरी में रखवाया तथा पोस्टमार्टम कर हमें सौंप दिया। घटना के बाद मैं व मेरा परिवार सदमे में पहुंच गए लेकिन जीआरपी पुलिस की मानवता ही मर गई। पुलिस ने सिवाय औपचारिकता के कुछ नहीं किया। चार दिन तक मेरी पत्नी के सिर को जानवर नोचते रहे। पुलिस ने आसपास के क्षेत्र में तलाश ही नहीं की, वरना गर्दन भी तत्काल ही मिल सकती थी।
अधिकारी बोले- सिर तलाश रहे थे, संभवत: रेलवे ट्रैक से कुत्ते ले गए होंगे
जीआरपी जांच अिधकारी कल्याणसिंह ने बताया कि जीआरपी टीम तीन दिन से गायब सिर की तलाश कर रही थी। रायसिंहनगर से केसरीसिंहपुर तक रेलवे ट्रैक के आसपास तलाश की गई। रेलवे की पीडब्ल्यूआई को भी पत्र लिखकर मदद ली गई। ट्रैक की जांच करने वाले पोइंट मैन को भी इस संबंध में ट्रैक के आसपास गहन निगरानी करने के लिए निर्देशित किया गया। सिविल पुलिस को भी मृतक के गायब सिर की तलाश में मदद मांगी गई। जहां सिर मिला है, वह घटना स्थल से आधा किमी दूरी पर है। संभवतया कुत्ते मृतका का सिर ले गए होंगे।
दावों की हकीकत -
दावा- हमने तलाश के खूब प्रयास किए, तीन दिन से तीन टीमें जुटी रहीं
हकीकत- जीआरपी ने केवल ट्रैकमैन को सिर की तलाश करने का कहा। ट्रैकमैन केवल रेलवे ट्रैक की निगरानी करते हैं। उन्होंने आसपास ध्यान ही नहीं दिया। पीडब्ल्यूआई को पत्र लिखकर मदद मांगने का दावा है लेकिन ऐसा कोई दस्तावेज नहीं दिखाया।
दावा- जीआरपी के जवान भी आसपास तलाश कर रहे थे, पुलिस से भी मदद ली
हकीकत- जहां पर हादसा हुआ और क्षतविक्षत सिर बरामद हुआ है। वहां के स्थानीय निवासियों ने बताया कि चार दिन से इस क्षेत्र में एक भी पुलिसकर्मी नहीं देखा गया। स्थानीय पुलिस ने भी जीआरपी द्वारा मदद मांगने की बात से इनकार किया है।
दावा-रायसिंहनगर से गजसिंहपुर तक ट्रैक को छाना लेकिन सफलता नहीं मिली।
हकीकत- रायसिंहनगर से गजसिंहपुर की दूरी करीब 15 किलोमीटर है। इतनी दूर शव का सिर कैसे जा सकता है और ऐसा सोचा भी कैसे गया, जबकि शव का सिर तो हादसे की जगह से महज 200 मीटर की दूरी पर ही मिला है।
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