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अमेरिका से अलग भारत समेत 16 देश बना सकते हैं सबसे बड़ा कारोबारी समूह, दायरे में आएगी एक तिहाई अर्थव्यवस्था

मतभेद दूर करने की कोशिशें चल रही हैं, इस साल के आखिर तक समझौते की उम्मीद है।

Danik Bhaskar | Jul 02, 2018, 09:56 PM IST

टोक्यो. भारत, जापान और चीन समेत 16 देशों ने मिलकर दुनिया का सबसे बड़ा कारोबारी गुट बनाने के लिए एकजुटता दिखाई है। इसमें अमेरिका शामिल नहीं होगा। रीजनल कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (आरसीईपी) वाले 16 देशों के मंत्रियों की रविवार को टोक्यो में मीटिंग हुई, जिसमें इस मुद्दे पर मतभेद दूर करने की कोशिश की गई। इस साल के आखिर तक ये डील होने की उम्मीद जताई गई है। ये पार्टनरशिप हुई तो इसमें दुनिया की एक तिहाई इकोनॉमी और आधी आबादी कवर हो जाएगी। भारत ने कहा है कि टैरिफ घटाने के लिए जो भी समझौता किया जाए, उसके तहत लोगों को एक-दूसरे के देशों में बेरोकटोक आवाजाही की इजाजत भी होनी चाहिए।

अमेरिका टीपीपी में शामिल होने पर मजबूर हो सकता है: आरसीईपी के तहत दुनिया के 16 देश इस दिशा में आगे जो भी कदम उठाएंगे, उससे अमेरिका पर टीपीपी (ट्रांस पैसिफिक पार्टनरशिप) में फिर से शामिल होने का दबाव बढ़ सकता है। अमेरिका इस साल मार्च में इस पार्टनरशिप से बाहर हो गया था। साल 2016 में अमेरिका समेत 12 देशों के बीच ये करार हुआ था, जिसके तहत सभी सदस्य देशों ने आपसी व्यापार और निवेश संबंधी बाधाएं दूर करने का वादा किया था।

दुनिया के सामने व्यापारिक चुनौतियां: ब्लूमबर्ग के मुताबिक, जापान के उद्योग मंत्री हिरोशिगे सेको ने कहा कि आरईसीपी के सदस्य देशों के बीच एग्रीमेंट का रास्ता अब साफ हो गया है। दुनियाभर में संरक्षणवाद को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, ऐसे में एशियाई देशों को मुक्त व्यापार के लिए आवाज उठानी चाहिए। इस पार्टनरशिप में आसियान के 10 सदस्य देशों के अलावा दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड भी शामिल होंगे। सिंगापुर के ट्रेड मिनिस्टर चान चुन सिंग ने कहा कि दुनिया के कारोबारी तौर तरीकों के लिए इस वक्त कई बड़ी चुनौतियां हैं। रीजनल कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (आरसीईपी) के तहत हमें किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए।

अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वॉर: अमेरिका ने मार्च में दुनिया के कई देशों से एल्युमिनियम और स्टील के इंपोर्ट पर शुल्क बढ़ा दिया, जिसके बाद ट्रे़ड वॉर छिड़ा हुआ है। पिछले महीने अमेरिका ने चीन से 34 बिलियन डॉलर मूल्य के उत्पादों पर इंपोर्ट पर ड्यूटी बढ़ा दी जो 6 जुलाई से लागू होनी है। अमेरिका के फैसले के जवाब में चीन भी अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ बढ़ा सकता है जिससे दोनों के बीच ट्रेड वॉर तेज होने की आशंका है।