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वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक: दुनिया में 62% शिशु स्तनपान से अछूते, हर दो में से एक नवजात को पहले घंटे में नहीं मिल पाता दूध

62 फीसदी शिशु ऐसे हैं जिन्हें मां का दूध नहीं मिल पाता है।

Danik Bhaskar | Aug 06, 2018, 07:45 PM IST

हेल्थ डेस्क. यूनिसेफ के ताजा आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो चौकाने वाला सच सामने आता है। उनके अनुसार विश्व के करीब 77 करोड़ नवजात या हर दो में से एक न्यूबॉर्न बेबी को मां का दूध पहले घंटे में नहीं मिल पाता। यह आंकड़ा शिशु मृत्यु दर के लिए बेहद अहम है। यूनिसेफ के अनुसार 2 से 23 घंटे तक मां का दूध न मिलने से बच्चे के जन्म से 28 दिनों के भीतर मृत्यु दर का यह आंकड़ा 40 फीसदी होता है, जबकि 24 घंटे के बाद भी दूध न मिलने से मृत्यु दर का यही आंकड़ा बढ़कर 80% तक हो जाता है। 62 फीसदी शिशु ऐसे हैं जिन्हें मां का दूध नहीं मिल पाता है।

यूनिसेफ के मुताबिक अगर जन्म से छह महीने तक शिशु को स्तनपान कराया जाए तो मृतक शिशुओं की संख्या 8 लाख तक कम की जा सकती है। यह रिसर्च पिछले 15 वर्षों के आधार पर तय की गई है। भारत में वर्ष 2000 में जहां शिशुओं को मां का दूध न मिल पाने का औसत 16 फीसदी था, वह वर्ष 2015 में बढ़कर 45 फीसदी तक हो गया है।

देश में 20 से ज्यादा सेंटर एक साल में खुले
देश की राजधानी दिल्ली में 2016 में मां के दूध का पहला बैंक खोला गया। दिल्ली के ग्रेटर कैलाश के फोर्टिस ला फेम हॉस्पिटल ने स्वयं सेवी संस्था ब्रेस्ट मिल्क फाउंडेशन के साथ मिलकर एक नया प्रयास किया है। इस ह्यूमन मिल्क बैंक का नाम अमारा रखा गया है। यहां महज दो महीनों में ही करीब 80 लीटर से ज्यादा ब्रेस्ट मिल्क इकट्‌ठा किया गया। इससे पहले राजस्थान के उदयपुर जिले के आरएनटी मेडिकल कॉलेज स्थित शासकीय पन्ना धाय महिला चिकित्सालय के एक हिस्से में योग गुरु देवेंद्र अग्रवाल की स्वयंसेवी संस्था ने 'दिव्य मदर मिल्क बैंक' की स्थापना की। इसी तरह दिव्य मदर मिल्क बैंक की तर्ज पर ही राज्य की राजधानी जयपुर के जेके लोन अस्पताल में चल रहे महिला चिकित्सालय में राज्य सरकार और नॉर्वे सरकार की भागीदारी से 'जीवनधारा' नाम का मदर मिल्क बैंक खोला गया है जो राज्य का पहला सरकारी और उत्तर भारत का दूसरा मदर मिल्क बैंक है।

संरक्षण की प्रक्रिया बेहद जटिल
मुंबई के लोकमान्य तिलक म्युनिसिपल जनरल अस्पताल में 1989 में स्थापित किए गए एशिया के सबसे पहले ह्यूमन मिल्क बैंक 'स्नेहा' को अब 'सायन मिल्क बैंक' के नाम से जाना जाता है। यहां की वर्तमान निदेशक डॉ. जयश्री मोंडकर कहती हैं, 'मां का दूध तो शिशु का सर्वोत्तम आहार है ही लेकिन कई बार उच्च रक्तचाप, अधिक रक्तस्राव या तेज बुखार के चलते मां शिशु को दूध नहीं पिला पाती हैं। उस स्थिति में किसी दूसरी मां का दूध ही सर्वश्रेष्ठ विकल्प होता है, लेकिन यह सीधा शिशु को नहीं दिया जा सकता है। उससे पहले कुछ सेफ्टी टेस्ट करने पड़ते हैं और सावधानियां भी बरतनी होती हैं। डोनर मदर का स्वस्थ होना जरूरी है। ऐसी मांओं से इलेक्ट्रिक पंप की सहायता से दूध निकाला जाता है, जिसे बैंक में 62.5 डिग्री सेंटीग्रेड के तापमान पर 30 मिनट तक पॉश्च्युराइज करने के बाद 4 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर ठंडा किया जाता है। इसके बाद चेकिंग होती है।

शिशु मृत्यु की बढ़ती दर
विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार जहां शिशु मृत्यु दर का वैश्विक औसत प्रति एक हजार पर 49.4 है वहीं भारत का औसत 38 है। नवजात शिशु मृत्युदर (प्रति एक हजार पर 39) और जन्म के पहले पांच सालों में होने वाली मौतों (प्रति एक हजार पर 48) के मामले में भी भारत आगे है, जो कि चिंताजनक है। शिशु मृत्यु पर रोकथाम के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा तय न्यूनतम विकास लक्ष्य अभी भारत की पहुंच से कोसों दूर है। नवजात शिशुओं की मौत की एक बड़ी वजह मां का दूध न मिलना पाया गया। वहीं कुपोषण के मामले में भी भारत आगे है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में 5 साल से कम आयु के 42.5 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं और 69.5 प्रतिशत बच्चे खून की कमी से जूझ रहे हैं। दुनिया के 10 अविकसित बच्चों में से चार भारतीय होते हैं और पांच साल से कम उम्र के लगभग 15 लाख बच्चे हर साल भारत में अपनी जान गंवाते हैं।

फैक्ट्स एंड फिगर्स
- ब्राजील में ब्रेस्ट मिल्क डोनर्स का सबसे बड़ा नेटवर्क है। 217 मिल्क बैंक हैं यहां। 126 मिल्क कलेक्शन पॉइंट।
- 73% शिशु मृत्यु दर यहां घटी है ब्रेस्ट मिल्क बैंक के चलते। वर्ष 1985 में प्रति हजार शिशुओं में जहां यह दर 63.2 थी, वहीं वर्ष 2013 में घटकर यह 19.6 हो गई।
- 1569.79 लीटर मिल्क डोनेशन का गिनीज रिकॉर्ड है। अमेरिकी माएं मिल्क डोनेशन में सबसे अव्वल हैं। यह आंकड़ा जनवरी वर्ष 2011 से मार्च 2014 तक का है।
- एशिया का पहला मिल्क बैंक भारत में नवंबर 1989 में मुंबई के लोकमान्य तिलक हॉस्पिटल में खुला था। विश्व का पहला ब्रेस्ट मिल्क बैंक 1911 में विएना में खुला था।