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विश्व पर्यावरण दिवस आज: प्रकृति का दोहन इतना ज्यादा कि 4 धरती और चाहिए

जिस गति से हम तेल-गैस और कोयले का इस्तेमाल कर रहे हैं, अगले 75-80 साल में यह खत्म हो जाएंगे।

Bhaskar News | Last Modified - Jun 05, 2018, 08:28 AM IST

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    हम एक साल में करीब 88 अरब टन सामग्री का दोहन या खपत कर देते हैं। आप पूछ सकते हैं, इसका क्या मतलब है? दरअसल, हम जरूरत से ज्यादा खपत कर रहे हैं। जबकि हमें ज्यादा से ज्यादा 50 अरब टन की खपत करनी चाहिए। विकसित देश सालाना 28 अरब टन खपत कर रहे हैं। अगर दुनिया के बाकी देश भी इन्हीं की तरह खपत करने लगे, तो हमें आज ही 4 धरती और चाहिए।

    प्रकृति का क्या और कितना दोहन कर रहे हैं हम? जानिए 5 सबसे अहम चीजों के बारे में

    पानी

    दुनिया में जितना भी पानी है, उसमें से 97.5% समुद्र में है, जो खारा है। 1.5% बर्फ के रूप में है। सिर्फ 1% ही पीने योग्य है।
    - 2025 तक भारत की आधी और दुनिया की 1.8 अरब आबादी के पास पीने का पानी नहीं होगा।

    तेल

    एक अनुमान के अनुसार भारत में प्रति हजार लोग रोज 420 लीटर पेट्रोल का उपयोग कर रहे हैं। हर व्यक्ति 15 लीटर प्रति माह तेल खपत कर रहा है।
    - धरती के पास अब सिर्फ 53 साल का ऑइल रिजर्व ही बचा हुआ है।

    गैस

    बीपी स्टेटिस्टिकल रिव्यू ऑफ वर्ल्ड एनर्जी रिपोर्ट 2016 के अनुसार फिलहाल दुनिया में तेजी से गैस भंडार का इस्तेमाल हो रहा है।
    - अगर यही क्रम जारी रहा, तो प्राकृतिक गैस के भंडार 52 वर्षों में खत्म हो जाएंगे।

    कोयला

    फॉसिल फ्यूल में सबसे ज्यादा उपलब्ध भंडार कोयले के हंै। लेकिन चीन, अमेरिका और अन्य देश इसका तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं।
    - यही गति जारी रही, तो काेयले के भंडार दुनिया में 114 साल में खत्म हो जाएंगे।

    जमीन

    खाद्य सामग्री इंसान को मिट्टी से मिलती है। मिट्टी की उर्वरता खत्म हो रही हैं। पिछले 40 साल में कृषि योग्य 33% जमीन खत्म हो चुकी है।
    - पिछले 20 वर्षों में दुनिया में कृषि उत्पादकता करीब 20 प्रतिशत तक घटी है ।

    असर क्या? हर साल 1.9 करोड़ लोगों की हो रही है असमय मौत

    दिसंबर 2017 में बायोमास, फॉसिल फ्यूल और नॉन मैटलिक मिनरल्स का धरती से खनन 88.6 अरब टन हो गया। 1970 की तुलना में यह तीन गुना ज्यादा है। इसी गति से चले, तो 2050 तक प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल दोगुने से ज्यादा हो जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध उपयोग से पर्यावरण में हो रहे बदलाव से हर साल 1.9 करोड़ लोगों की मौत समय से पहले हो रही है।

    सोर्स : वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, यूएन, इंटरनेशनल रिसोर्स पैनल

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