Hindi News »Business» WPI Inflation Rises To 14 Month High In May On Costlier Fuel, Veggies

थोक महंगाई दर मई में बढ़कर 4.43% हुई, 14 महीने में सबसे ऊंचे स्तर पर; तेल-सब्जी के दाम ज्यादा बढ़े

14 महीने पहले यानी मार्च 2017 में थोक महंगाई दर 5.11% थी।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jun 15, 2018, 12:28 AM IST

थोक महंगाई दर मई में बढ़कर 4.43% हुई, 14 महीने में सबसे ऊंचे स्तर पर; तेल-सब्जी के दाम ज्यादा बढ़े
  • फलों की महंगाई दर बढ़कर 15.40% हुई
  • आलू 14% महंगे हुए, दालें 21% सस्ती हुईं
  • मोदी सरकार बनने के वक्त मई 2014 में थोक महंगाई 6.01% थी

नई दिल्ली. थोक महंगाई मई में बढ़कर 4.43% हो गई। ये 14 महीने का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले मार्च 2017 में थोक महंगाई दर 5.11% थी। अप्रैल से मई के दौरान सब्जियां और पेट्रोल -डीजल ज्यादा महंगे हुए हैं। थोक मूल्य सूचकांक में पेट्रोल का 1.60% और डीजल का 3.09% वेटेज है। महंगाई का आकलन थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के जरिए किया जाता है। डब्ल्यूपीआई में 435 वस्तुएं शामिल होती हैं। इनकी कीमतों में उतार-चढ़ाव के आधार पर थोक महंगाई के आंकड़े तय किए जाते हैं।

थोक महंगाई दर में लगातार दूसरे महीने इजाफा

महीनाथोक महंगाई
मई4.43%
अप्रैल3.18%
मार्च2.74%
फरवरी2.74%
जनवरी3.02%

एक महीने में ईंधन और बिजली 3.37% महंगे

आर्टिकलथोक महंगाई (मई)थोक महंगाई (अप्रैल)
खाद्य वस्तुएं1.60%0.87%
सब्जियां2.51%-0.89%
ईधन और बिजली11.22%7.85%
आलू81.93%67.94%

खुदरा महंगाई 4 महीने के उच्च स्तर पर
- मई में खुदरा महंगाई दर 4.87% हो गई, जो जनवरी के बाद सबसे ज्यादा है। जनवरी में ये 5.07% थी। खुदरा महंगाई पर भी खाने-पीने का सामान ज्यादा महंगा होने से भार पड़ा है। ये नवंबर 2017 से लगातार 4% के ऊपर बनी हुई है। मई के आंकड़े 12 जून को जारी किए गए।

महंगाई का अर्थव्यवस्था पर असर
- अर्थव्यवस्था पर महंगाई का असर दो तरह से होता है। महंगाई दर बढ़ने से बाजार में वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं और लोगों की खरीदने की क्षमता कम हो जाती है। महंगाई दर घटती है तो खरीदने की क्षमता बढ़ जाती है, जिससे बाजार में नगदी की आवक भी बढ़ जाती है। महंगाई बढ़ने और घटने का असर सरकारी नीतियों पर भी पड़ता है। रिजर्व बैंक ब्याज दरों की समीक्षा में खुदरा महंगाई दर को ध्यान में रखता है। महंगाई पर चिंता जताते हुए आरबीआई ने 6 जून की समीक्षा बैठक में रेपो रेट 0.25% बढ़ाने का फैसला लिया।

2 सूचकांकों के आधार पर तय होती है महंगाई

1) थोक महंगाई के लिए थोक मूल्य सूचकांक:इसमें 435 वस्तुएं शामिल होती हैं। डब्ल्यूपीआई में शामिल ये वस्तुएं अलग-अलग वर्गों में बांटी जाती हैं। थोक बाजार में इन वस्तुओं के समूह की कीमतों में हर बढ़ोतरी का आंकलन थोक मूल्य सूचकांक के जरिए होता है। इसकी गणना प्राथमिक वस्तुओं, ईंधन और अन्य उत्पादों की महंगाई में बदलाव के आधार पर की जाती है।

2) खुदरा महंगाई के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक:खुदरा महंगाई वह दर है, जो जनता को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। यह खुदरा कीमतों के आधार पर तय की जाती है। भारत में खुदरा महंगाई दर में खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी करीब 45% है। दुनिया भर में ज्यादातर देशों में खुदरा महंगाई के आधार पर ही मौद्रिक नीतियां बनाई जाती हैं।

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Web Title: thok mhngaaaee dr May mein bdhekar 4.43% huee, 14 mhine mein sabse oonche str par; tel-sabji ke daam jyada bdhee
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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