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​5000 लीटर छाछ, 1000 लीटर तेल और 2000 नींबुओं के रस से मुलायम की गई मिट्‌टी में होगा महादंगल

3 वर्ष पहले
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इंदौर। 5000 लीटर छाछ, 1000 लीटर तेल और 2000 नींबुओं के रस से मुलायम की गई मिट्‌टी में रविवार शाम चार बजे से महादंगल प्रारंभ होगा। सुपर कॉरिडोर पर होने वाले महांदगल की बदौलत देश-विदेश के नामी पहलवानों के बीच रोमांचक कुश्ती की दावत इंदौर वासियों को मिलेगी। कुश्ती के इस भव्य आयोजन में सितारा पहलवानों के अलावा महिला पहलवानों के बीच मुकाबले होंगे। दंगल में एशियन चैंपियन नरसिंह यादव, विनोद कुमार, राहुल अवारे, संदीप तोमर आैर अंतरराष्ट्रीय महिला पहलवान नवजोत कौर एक्शन में दिखेंगी। 

 

  • दंगल की मुख्य कुश्ती भारत-हिंद केसरी अंतरराष्ट्रीय पहलवान मौसम खत्री आैर मिट्टी की कुश्ती के सबसे चर्चित सितारे भारत-हिंद केसरी जस्सा पट्टी के मध्य होगी। 

 

  • ओलिंपियन नरसिंह यादव आैर ईरान के हमी पीटर के बीच भी रोमांचक मुकाबला होने की उम्मीद है। 

 

  • विनोद कुमार ईरान के ही मोर्डन गॅली तथा जूनियर वर्ल्ड चैंपियन राहुल अवारे ईरान के फ्रेंक जेलियो से मुकाबला करेंगे। 

 

  • भारत केसरी रूबलजीत हिंद केसरी माऊली जमदाडे तथा हरियाणा के युद्धवीर राष्ट्रीय कुश्ती के मेडलिस्ट रवि बारोड़ की कुश्ती भी मुख्य मुकाबले में शामिल हैं। 

 

  • अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता संदीप यादव महाराष्ट्र केसरी विनोद शिंदे की चुनौती का सामना करेंगे। 

 

  • दंगल आयोजकों ने बताया कि महादंगल में कुल 35 मुकाबले होंगे। स्टेडियम में लगभग 30 हजार दर्शकों के बैठने के लिए अस्थायी स्टेडियम का निर्माण किया गया है। 


नवजोत का मुकाबला रशियन हुचूक से 
महादंगल में एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में पहली बार देश को पदक दिलाने वालीं नवजोत कौर रशिया की अनस्तीया हुचूक से भिड़ेंगी। अनस्तीया भी यूरोपियन चैंपियनशिप में पदक जीत चुकी है। शिल्पी यादव भी एरिने में रशिया की ही वोलह याकिचिक का सामना करेंगी। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी पायल सोनी जूनियर पदक विजेता सोनाली तोड़कर तथा प्रियांशी राठौर युवा पहलवान भूमिका नायक से भिड़ेंगी। 


धर्मेंद्र आैर विद्युत रहेंगे आकर्षण का केंद्र 
दंगल के दौरान अभिनेता धर्मेंद्र आैर विद्युत जामवाल भी पहलवानों की हौसलाअफजाई के लिए मौजूद रहेंगे। इनके अलावा अतिथि के रूप में केंद्रीय मंत्री थावरचंद गेहलोत, नरेंद्र सिंह तोमर, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण सिंह आदि भी मौजूद रहेंगे।


हैलीकाॅप्टर से उतरेंगे सितारा पहलवान 
दंगल में भाग ले रहे देश-विदेश के सितारा पहलवान हैलीकाॅप्टर के जरिए अस्थाई स्टेडियम पहुंचेंगे। एरिने के चारों ओर इलेक्ट्रानिक आतिशबाजी होगी। 


अंतरराष्ट्रीय कुश्ती 

  • नरसिंह यादव बनाम हमि पीटर 
  • विनोद कुमार बनाम मोर्डन गली 
  • राहुल अवारे बनाम फ्रेंक जेलियो 


महिला कुश्ती 

  • नवजोत वि. अनस्तीया हुचूक 
  • शिल्पी वि. बोल्ड याकिचिक 


मुख्य कुश्ती 

  • जस्सा पट्‌टी वि. मौसम खत्री 

 

और माटी बन जाती है मरहम
छाछ, सरसों का तेल, नींबुओं का रस, गेरु और हल्दी सब का सब डाल दिया जाता है मिट्टी में और माटी बन जाती है मरहम। अखाड़े की मिट्‌टी में आखिर ऐसा क्या होता है जिससे पहलवानों को न चोटें आती हैं न ही उनका अहसास होता है। प्राचीन काल से भारत में कुश्ती का खेल खेला जाता रहा है अखाड़ों में जोर आजमाइश और कड़े व्यायाम के इस खेल का समय समय पर स्वरूप बदला मगर उसकी मौलिकता हमेशा कायम रही और आज भी है। दांव पेंच का रोमांच अरसे से लोगों को लुभाता आया है। हो भी क्यों नहीं आखिर देशी पहलवानों के दाव पेंच होते ही इतने बिरले हैं कि देखने वाला देखता ही रह जाए। पहलवान जिस माटी पर दाव पेंच दिखाता है वह कोई साधारण माटी नहीं होती। उसे तैयार करने में भी भारी जोर आजमाइश करनी पड़ती है। इसे भी दंगल के लिए विशेष तौर पर तैयार किया जाता है। पहलवान सादी माटी में कुश्ती लड़ते थे और चोटिल होते थे लिहाजा उन्हें चोट से बचाने व राहत देने के लिए आर्युवेद के जानकार हमारे पूर्वजों ने प्राचीन काल में माटी को ही मरहम बना दिया और तब से ही यह सिलसिला चला आ रहा है। 
दंगल के लिए अखाड़े की माटी में छाछ,गेरु, नीबू का रस, हल्दी, सरसों का तेल सहित अन्य सामग्री मिलायी जाती है। दरअसल इन सभी चीजों के अपने अपने गुण हैं जिनके कारण वे अखाड़े में पहलवानों को राहत देने का काम करती है।
 हल्दी एन्टीसेप्टिक होती है लिहाजा चोट लगने पर इन्फेक्शन के खतरे को रोकती है। पहलवानों को पसीना बहुत निकलता है माटी में मिलाया गया गेरु पहलवानों का पसीना सोखता है और माटी को दूषित होने से बचाता है। छाछ और नीबू के रस के साथ हल्दी का मिश्रण इन्फेंक्शन रोकने के साथ ही अंदरूनी चोट व पहलवानों को चर्म रोग से भी बचाता है।
माटी को चिकनी और नरम बनाने के लिए इमसें सरसों का तेल मिलाया जाता है। तेल पहलवानों के बदन की चिकनाई भी बनाए रखता है और उन्हें रगड़ से भी बचाता है। इतना ही नहीं इस माटी की एक अन्य खासियत भी है। यह शरीर को गठीला बनाने के साथ ही पहलवानों का रंग भी निखारती है। नरम माटी पर जब कड़क पहलवानों की भिडंत होती है तो उसमें पहलवानों के लिए माटी वाकई मरहम का ही काम करती है।
- अविनाश रावत (लेखक दैनिक भास्कर इंदौर में वरिष्ठ रिपोर्टर हैं)

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