• Home
  • Jeevan Mantra
  • Jyotish
  • Rashi Aur Nidaan
  • yamraaj and savitri,शास्त्रों से- यमराज ने बताए थे ये उपाय, इनसे चमक सकती है किसी की भी किस्मत
--Advertisement--

शास्त्रों से- यमराज ने बताए थे ये उपाय, इनसे चमक सकती है किसी की भी किस्मत

शास्त्रों में बताई गई बातों का ध्यान रखने पर हमारी कई परेशानियां दूर हो सकती हैं।

Danik Bhaskar | Apr 21, 2018, 06:01 PM IST

रिलिजन डेस्क। शास्त्रों में यमराज को मृत्यु का देवता माना गया है। यमराज ही सभी प्राणियों के प्राणों का हरण करते हैं। गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित संक्षिप्त ब्रह्मवैवर्तपुराण के प्रकृतिखंड में यमराज और सावित्री के बीच हुए प्रश्न और उत्तर का एक अध्याय है। इस अध्याय में दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने के उपाय स्वयं यमराज ने बताए हैं। यहां जानिए ये प्रसंग और उपाय...

ये है सावित्री का प्रसंग...

प्राचीन समय में सावित्री और सत्यवान का विवाह हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद ही सत्यवान की मृत्यु हो गई थी, तब सावित्री ने यमराज से अपने पति का जीवन वरदान के रूप में फिर से मांग लिया था। इसी वजह से सावित्री को श्रेष्ठ पतिव्रता स्त्रियों में से एक माना गया है। जब सावित्री यमराज के पास पहुंची तो उसने यमराज से जीवन से जुड़े कई प्रश्न पूछे थे और यमराज ने सभी प्रश्नों के जवाब भी दिए। यमराज ने सावित्री को बताया गया था कि किस प्रकार कोई इंसान अपने कर्मों से भाग्यशाली बन सकता है और देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त कर सकता है। यमराज ने विशेष दिन और विशेष तिथियों के लिए अलग-अलग उपाय बताए थे। ध्यान रखें यहां बताई गई तिथियों की जानकारी किसी भी हिंदी पंचांग से मिल सकती है।

- जो व्यक्ति हर रविवार या सूर्य जब राशि बदलता है तब या हर माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर सूर्य का पूजन करता है, उसे समाज में मान-सम्मान प्राप्त होता है। इन विशेष दिनों में सूर्य को जल जरूर चढ़ाना चाहिए।

- यमराज ने सावित्री को बताया कि यदि कोई व्यक्ति हर रोज शिवलिंग का पूजन करें तो उसके जीवन के सभी दुख और दरिद्रता खत्म हो जाती है।

- हिन्दी पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर देवराज इंद्र का विशेष पूजन करना चाहिए।

- हर माह में आने वाली पूर्णिमा तिथि पर श्रीकृष्ण का विशेष पूजन करना चाहिए।

- माह में दो एकादशियां आती हैं और इन दोनों एकादशियों पर व्रत करने और पूजन करने का विशेष महत्व है। इस व्रत के प्रभाव से दरिद्रता खत्म हो सकती है और स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं।