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​इन 4 तरीकों से सुधारें बच्चों की उल्टा जवाब देने की आदत

बच्चे जैसा व्यवहार करते हैं हमें उनके साथ भी वैसा ही व्यवहार नहीं करना चाहिए। हमें इनके गलत व्यवहार का कारण जानना चाहिए।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Jul 01, 2018, 04:02 PM IST

​इन 4 तरीकों से सुधारें बच्चों की उल्टा जवाब देने की आदत

लाइफस्टाइज डेस्क. बच्चे जैसा व्यवहार करते हैं हमें उनके साथ बिल्कुल वैसा ही व्यवहार नहीं करना चाहिए। यदि बच्चा एग्रेसिव है तो उस समय उसे कतई न डांटें, बल्कि कूल रहें और तब तक न बोलें जब तक बच्चा थोड़ा शांत न हो जाए। जानें ऐसे बच्चों को हैंडल करने के 4 तरीके।


बुरे बर्ताव का कारण समझें

  • बच्चे के बुरे रिस्पांस के पीछे सही वजह क्या है, पैरेंट्स इसकी जड़ में जाएं, क्योंकि बच्चे क्यों नाराज हो रहे हैं इसका कारण वे भी ठीक से एक्सप्रेस नहीं कर पाते।
  • ऐसे में बच्चे से ये पूछना जरूरी होता है कि क्या स्कूल में टीचर ने कुछ कह दिया या किसी क्लासमेट के साथ झगड़ा तो नहीं हुआ? तभी बच्चे को भी यह मालूम पड़ेगा कि उसके एग्रेसिव होने की सही वजह क्या है और वे व्यवहार में सुधार लाएंगे।

उसके मूड पर समझाएं

  • बच्चे को थोड़ा टाइम स्पेस दें, क्योंकि कई बार उन्हें खाना खाने या किसी काम को करने के लिए बोलो तो वे नहीं आते हैं।
  • उन पर हर काम को करने के लिए टाइम बाउंडेशन न रखें, क्योंकि बच्चा थका या नाराज है वह सही कारण नहीं बता सकता है। ऐसे में बच्चों को ये समझाएं कि क्या एक्सपेक्टेबल है।
  • उनसे अपशब्द बोलने के बजाए जब उनका मूड अच्छा हो तो समझाएं। बच्चा पलटवार और बदतमीजी नहीं करेगा।

जैसी गलती, वैसी सजा

  • बच्चे की गलती के अनुपात में उसे सजा दें। ये नहीं कि उसे छोटी गलती की बड़ी सजा या बड़ी गलती पर भी छोटी सजा दी जाए।
  • उदाहरण के लिए यदि बच्चा गिलास का दूध गिरा दे या हमें अपशब्द बोल दे, तो दोनों स्थितियों में उसे मारने-पीटने की सजा न दें।
  • बल्कि सजा ऐसी हो जो असर करे, मसलन कार्टून नहीं देखने देंगे या पार्क में साइकिल नहीं चलाने देंगे या उसे कहें कि आज शाम को आइसक्रीम खिलाने नहीं ले जाएंगे।

उनके रोल मॉडल बनें

  • पैरेंट्स बच्चों के व्यवहार में चेंज लाने के लिए उनके सामने खुद को सही मॉडल के रूप में पेश करें। कई बार पैरेंट्स की आपस की बातचीत में एक-दूसरे को कुछ गलत बोलने में आ जाता है।
  • बच्चा ये सब देखता है और ऐसा ही बर्ताव करता है। इसी तरह बच्चों पर उनके पैरेंट्स व्यंग्य करते हैं, तो वह भी व्यंग्यात्मक लहजे में बात करना सीख जाता है। अचरज तब होता है जब पैरेंट्स ये आश्चर्य करते हैं कि इसने कहां से सीखा।

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