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आपकी ये एक छोटी सी गलती हमेशा के लिए आपके कानों को कर सकती है खराब

हावर्ड मेडिकल स्कूल की रिसर्च के अनुसार प्लेन में सोने से आपकी सुनने की क्षमता पूरी तरह खत्म हो सकती है।

Danik Bhaskar | Apr 25, 2018, 09:14 PM IST

हेल्थ डेस्क। प्लेन में सफर करने वालों को प्लेन के हाईजेक होने और क्रैश होने का डर लगा रहता है। ये कुछ रीजन है इसकी वजह से लोग प्लेन में सफर करने से डरते हैं। इस डर से बचने के लिए कई लोग प्लेन में सो जाते हैं। ऐसे देखने में तो ये अच्छा आइडिया लगता है। लेकिन रिसर्चर का कहना है कि ये अच्छा आइडिया नहीं है।

हावर्ड मेडिकल स्कूल की रिसर्च के अनुसार प्लेन में सोने से आपकी सुनने की क्षमता पूरी तरह खत्म हो सकती है। अचानक ऊंचाई में चेंज होने और सोते वक्त माइंड में कॉनसियशनेस नहीं होने से कानों के पर्दे पर प्रेशर पड़ता है।

कई लोग प्लेन की लैडिंग और टेक ऑफ के वक्त कान में दर्द और और प्रेशर फील करते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योकि कान के अंदर का प्रेशर बाहर के प्रेशर से मैच नहीं होता।

आगे की स्लाइड्स पर जानते हैं इस स्टडी की दूसरी बातें...

>आप इस प्रेशर को च्यूइंगम को खाकर बराबर कर सकते हैं। इसलिए फ्लाइट अटेंडेट्स लैंडिंग से पहले लोगों को हाथ में च्यूइंगम देती है। 

लेकिन अगर आप सो रहे हैं और प्रेशर कम नहीं हुआ तो Eustachian ट्यूब ब्लॉक हो सकती है और आपको ear barotrauma हो सकता है। जिसमें कान में पेन, सुनने में परेशानी होना, कान का पर्दा फटना, चक्कर आना ये सब हो सकता है। 

>कई लोग इस परेशानी को फेस करते हैं। लेकिन जब प्रॉब्लम सीवियर हो जाती है। ट्यूब लंबे समय तक ब्लॉक रहती है तो इंफेक्शन डेवलप हो जाता है। 

>ये इंफेक्शन से कान का पर्दा डैमेज होने के साथ ही कान में दर्द होता है। और सुनने में डिफिकल्टीज आती है।

>इस प्रॉब्लम से बचने का यही सॉल्यूशन है कि आप लैंडिंग के समय जागते रहे।

>इसके लिए आप चाहे तो अलार्म लगा सकते हैं या फिर साथ बैठे व्यक्ति को जगाने का बोल सकते हैं।