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दावा- पीएम के भाई प्रहलाद मोदी ने कहा- संन्यासी नहीं बल्कि चोरी करने पर घर से निकाला था मोदी को; पर ये तीन साल पुरानी झूठी खबर है

3 वर्ष पहले
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नो फेक न्यूज डेस्क. पीएम नरेंद्र मोदी के भाई प्रहलाद मोदी ने कहा कि, सन्यासी बनने के लिए नरेंद्र मोदी ने घर नहीं छोड़ा था बल्कि बचपन में गहने चोरी करने पर उन्हें घर से निकाल दिया गया था। इस बात का दावा सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट में किया जा रहा है। वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि, इस खबर को हिंदी के एक अखबार (दैनिक भास्कर नहीं) ने छापा है। 

 

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सोशल मीडिया पर मोदी के सन्यास को लेकर कही गई प्रहलाद मोदी की बात की जिस खबर को वायरल किया जा रहा है, वही पोस्ट तीन साल पहले भी वायरल हुई थी। हालांकि, सच्चाई ये है कि  इस तरह की कोई खबर कभी छपी ही नहीं और पीएम के भाई प्रहलाद मोदी ने भी कभी ऐसा बयान नहीं दिया। प्रहलाद मोदी ने खुद इस तरह का बयान देने से इनकार किया था। 

 

 

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\'घर से निकाले जाने के बाद मोदी को डॉन ने शरण दी\'
वॉट्सएप और ट्विटर पर इस खबर का स्क्रीनशॉट शेयर किया जा रहा है। जिसमें पीएम मोदी के भाई प्रहलाद मोदी के हवाले से लिखा गया है कि मोदी ने सन्यास नहीं लिया था। वे घर में गहनों की चोरी करते पकड़े गए, जिसके बाद उन्हें घर से निकाल दिया गया था। खबर में आगे लिखा है कि घर से निकाले जाने के बाद मोदी को एक अन्डरवर्ल्ड डॉन ने शरण दी थी। 

 

अखबार ने किया साफ
इस खबर में तीन साल पहले 2 जून 2016 की तारीख है। 2016 में जब यह खबर वायरल हुई, तब अखबार ने खुद एक बयान जारी करते हुए साफ किया था कि यह खबर फेक है। अखबार ने लिखा, \' हमारे नाम से सोशल मीडिया पर प्रहलाद मोदी का नाम लेकर एक फर्जी खबर चलाई जा रही है।  हम  इसके दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करेंगे।\'

 

इसे आप यहां क्लिक करके देख सकते हैं। 

 

प्रहलाद मोदी ने भी किया इनकार
फेक न्यूज की पड़ताल में हमें पता चला कि एबीपी न्यूज ने भी इस संबंध में प्रहलाद मोदी से बात की थी। और इस बातचीत में उन्होंने खबर को खारिज करते हुए इस तरह के किसी भी बयान से साफ इंकार किया था। प्रहलाद मोदी ने यह भी बताया कि उन्होंने खुद अखबार से इस बारे में बात की थी। 


कैसे करें जांच

  • अगर आप ध्यान दें तो हर जगह जहां यह फोटो शेयर की गई, इसके साथ इसकी लिंक नहीं दी गई थी। किसी खबर की सिर्फ फोटो दे देने से पढ़ने वाला मुख्य खबर तक कैसे पहुंचेगा। ध्यान रखे कि अगर इस तरह की किसी खबर में सिर्फ फोटो दी गई है और लिंक नदारद है तो वह फर्जी हो सकती है। 
  • किसी अखबार या मीडिया संस्थान की खबर के फोटो को जांचने के लिए सबसे आसान है कि आप इसकी हेडलाइन इंटरनेट पर सर्च कर लें। अगर इस तरह की कोई खबर इंटरनेट पर उपलब्ध होगी तो उसकी लिंक आपको मिल जाएगी। लेकिन अगर लिंक ना मिले, जैसा कि इस केस में भी हुआ, तो खबर पूरी तरह फर्जी है। 
  • इस फोटो को ध्यान से देखें तो इसमें लेखन की कई गलतियां नजर आती हैं। लिखने वाला कोई पत्रकार ना होकर नौसिखिया लग रहा है। फोटो का कैप्शन की भाषा भी ठीक नहीं है।

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