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फैक्ट चेक / पीएम मोदी ने नहीं लिखा सीजेआई को कोई लेटर, फर्जी है सोशल मीडिया का दावा

Narendra Modi Did Not Write Letter To CJI Ranjan Gogoi After Ram Janmabhoomi-Babri Masjid Cerdict
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Narendra Modi Did Not Write Letter To CJI Ranjan Gogoi After Ram Janmabhoomi-Babri Masjid Cerdict

  • क्या वायरल : एक फर्जी लेटर वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया जा रहा है कि अयोध्या फैसले पर बधाई देते हुए पीएम मोदी ने सीजेआई को पत्र लिखा है
  • क्या सच : पीएम ने ऐसा कोई लेटर सीजेआई को नहीं लिखा। सोशल मीडिया का दावा झूठा है

दैनिक भास्कर

Nov 14, 2019, 04:31 PM IST

फैक्ट चेक डेस्क. सोशल मीडिया में एक फेक लेटर वायरल किया जा रहा है। इस लेटर को पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा लिखा बताया जा रहा है और दावा किया जा रहा है कि उन्होंने ये लेटर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को लिखा। दैनिक भास्कर मोबाइल ऐप के एक पाठक ने हमें यह लेटर पुष्टि के लिए भेजा। पड़ताल में पता चला कि पीएम ने कोई लेटर सीजेआई को नहीं लिखा। सोशल मीडिया का दावा झूठा है। 

 

क्या वायरल

  • सोशल मीडिया में यह लेटर वायरल हो रहा है। कई वेबसाइट्स ने तो बाकायदा इस लेटर का रेफरेंस लेते हुए आर्टिकल भी लगाया है। 
  • इस लेटर में फैसला देने वाले न्यायधीशों को हिंदुओं के हक में फैसला देने के लिए बधाई दी गई है।
सोशल मीडिया पर वायरल लेटर।

 

क्या है सच्चाई

  • इस पत्र को पढ़कर समझा जा सकता है कि यह सरकार की ओर से नहीं बल्कि किसी शरारती तत्व द्वारा लिखा गया है। पत्र में जो भाषा लिखी गई है, वो समझ से बाहर है। एक स्टेटमेंट है कि 'आपके सराहनीय और यादगार निर्णय के लिए हिंदू हमेशा आपके और आपकी टीम के आभारी होंगे। जो हिंदू राष्ट्र के लिए एक नया इतिहास बनाएगा। इस कठिन समय में समर्थन के लिए धन्यवाद'। यह स्टेटमेंट पढ़कर सरकार के अंदर टकराव की भावना बनते दिखती है। कोई भी सरकार इस तरह के स्टेटमेंट कभी नहीं देती।
  • इस लेटर में टाइपिंग की भी कई खामियां हैं। जैसे commendable शब्द की स्पेलिंग compendable लिख दी गई है। 
  • इसके अलावा यदि वाकई पीएम द्वारा सीजेआई को लेटर लिखा जाता तो यह राष्ट्रीय खबर बनती। हमने अपनी पड़ताल में एक भी ऐसी रिपोर्ट नहीं मिली। 
  • गूगल पर रिवर्स सर्च करने के दौरान हमें वायरल हो रहे लेटर जैसा ही एक लेटर मिला जो पीएम मोदी ने गौतम गंभीर को लिखा था। 

 

  • फिर दोनों लेटर की तुलना करने पर हमने देखा कि वायरल लेटर में केसरिया और ब्राउन रंग की वो बॉर्डर नहीं है, जो गौतम गंभीर को लिखे लेटर में है। इसी तरह वायरल लेटर में प्राप्तकर्ता का एड्रेस भी बॉटम में नहीं लिखा गया, जो गंभीर को लिखे लेटर में है। 
गौतम गंभीर को लिखा लेटर।
  • गंभीर वाले लेटर को ध्यान से देखने पर हमें पूरे लेटर के बैकग्राउंड में टेक्सचर एक जैसा नजर आया। वहीं वायरल लेटर के बैकग्राउंड में टेक्सचर एक जैसा नहीं है। इसमें बैकग्राउंड में टेक्सचर केवल वहीं दिख रहा है, जहां कोई शब्द नहीं लिखे। 
वायरल लेटर में टेक्सचर एक जैसा नहीं है।

 

  • इस तरह पड़ताल से हम इस तथ्य पर पहुंचते हैं कि पीएम मोदी के नाम से वायरल किया जा रहा लेटर फर्जी है। इसका वास्तविकता से कोई लेनादेना नहीं। 

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