फेक vs फैक्ट:भारत में बिक रहे बॉयकॉट चाइना वाले मास्क-टी शर्ट के मेड इन चाइना होने की खबर झूठी, चीनी ट्रेडर्स ने भी इसे झुठलाया

2 वर्ष पहले
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क्या वायरल : सोशल मीडिया पर इस दावे के साथ कुछ मैसेज वायरल हो रहे हैं कि बॉयकॉट चाइना लिखे हुए प्रोडक्ट्स का उत्पादन खुद चीन में ही किया जा रहा है। वायरल मैसेज के साथ एक वेबसाइट की खबर का स्क्रीनशॉट भी है।

दावे के साथ इस तरह के मैसेज वायरल हो रहे हैं 

https://twitter.com/search?q=China%20is%20manufacturing%20boycott%20china%20cap&src=typed_query&f=live
https://twitter.com/search?q=China%20is%20manufacturing%20boycott%20china%20cap&src=typed_query&f=live
https://twitter.com/NISHIKA26281832/status/1275660946774646788
https://twitter.com/NISHIKA26281832/status/1275660946774646788
https://twitter.com/leenasind/status/1275639501315063808
https://twitter.com/leenasind/status/1275639501315063808

फैक्ट चेक पड़ताल 

  • दावे के साथ वायरल रहे स्क्रीनशॉट पर  Digital Phablet Staff लिखा हुआ है। इस नाम की वेबसाइट पर सच में ये खबर पब्लिश की गई है। यानी स्क्रीनशॉट सही है। उसमें कोई एडिटिंग नहीं है। 


  • अब सवाल ये है कि खबर कितनी सच है। Digital Phablet की खबर को जब हमने पढ़ा, तो इसमें किसी सोर्स का जिक्र नहीं है। न ही चीन के किस कारखाने में बॉयकॉट चाइना वाले प्रोडक्ट बनती हुई फोटो या वीडियो है। किसी आधिकारिक सोर्स का भी जिक्र नहीं है। 
  • Digital Fablet का ट्विटर हैंडल भी है। जिसे ट्विटर ने वैरिफाई नहीं किया है। ऐसे में इस प्लेटफॉर्म पर दी गई खबरों की विश्ववसनीयता नहीं है।  https://twitter.com/DigitalPhablet
  • चीनी मीडिया प्लेटफॉर्म ग्लोबल टाइम्स ने भी इस दावे को लेकर खबर की है। खबर के अनुसार - चीन के नियमों के मुताबिक कोई भी कंपनी एंटी-चाइना कंटेंट या ग्राफिक्स वाले प्रोडक्ट का उत्पादन नहीं कर सकती। 


  • ग्लोबल टाइम्स ने चीन से दूसरे देशों में होर्डिंग और झंडे एक्सपोर्ट करने वाले हुलु लिन से भी इस संबंध में बात की। हुलु लिन ने भी यही  कहा कि चीन में ऐसा करना इलीगल है। 
  • यह ज्ञात तथ्य है कि चीनी सरकार का वहां के व्यापार पर खासा नियंत्रण है। ऐसे में ये असंभव है कि वहां ऐसे प्रोडक्ट्स का उत्पादन हो, जिनपर चीन विरोधी बातें लिखी हैं। 

निष्कर्ष : जिस वेबसाइट के हवाले से ये खबर वायरल हो रही है। उसकी कोई विश्वसनीयता नहीं है। चीन के अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भी इसका खंडन किया है। सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा फेक है। 

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