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कोरोनावायरस का न शरीर के रंग से संबंध, न शराब से; 10 फेक वायरल दावों का सच

2 वर्ष पहले
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  • कोरोनावायरस से जुड़ी कई फेक न्यूज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहीं, इन भ्रामक खबरों पर यकीन न करें
  • केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने संसद में बताया कि देश में अब तक 29 मरीजों में कोरोनावायरस की पुष्टि हो चुकी है

फैक्ट चेक डेस्क. दुनियाभर में 3,283 लोगों की कोरोनावायरस से जान जा चुकी है। 94 हजार से ज्यादा लोग इसके संक्रमण का शिकार हो चुके हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के मुताबिक, देश में अब तक 29 मरीजों में कोरोना की पुष्टि हो चुकी है। इसी बीच कोरोना से जुड़ी कई फर्जी खबरें भी वायरल की जा रही हैं, इससे लोगों में भ्रम की स्थिति बन रही है। जानिए, सोशल मीडिया में वायरल हुए 10 फेक दावों का सच। 

सोशल मीडिया में वायरल फेक दावों का सच

1. वायरल पोस्ट: सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट में दावा किया गया कि कोरोनावायरस से पीड़ित एक शख्स का रंग अधिक सांवला होने के कारण इलाज सफल हो पाया है। पोस्ट में बताया गया है कि हमारा मिलेनिन (रंग के लिए जिम्मेदार तत्व) ही हमारी सुरक्षा है।
सच: इस मामले पर एक्सपर्ट ने एएफपी न्यूज एजेंसी को बताया, सांवले रंग के लोगों का वायरस के प्रति रेसिस्टेंट होने की बात झूठी है। अफ्रीका में कोरोनावायरस के मामलों की जांच करने वाले शोधकर्ता प्रो एमेड्यू अल्फा के मुताबिक, रिसर्च में इसका कोई प्रमाण नहीं मिला है।

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2. वायरल पोस्ट: शराब पीने वालों को कोरोनावायरस नहीं होगा।
सच: डब्ल्यूएचओ ने कोरोना से बचाव को लेकर जारी की गाइडलाइंस में अल्कोहल का जिक्र तो किया, लेकिन कहीं भी ये नहीं लिखा कि अल्कोहल का सेवन करने (शराब पीने) से कोरोनावायरस से बचा जा सकता है। डब्ल्यूएचओ ने यह सलाह जरूर दी है कि हाथों को साबुन-पानी से बार-बार धोएं। गंदा होने पर अल्कोहल बेस्ड हैंडवॉश का इस्तेमाल कर सकते हैं, इससे हाथों में आए वायरस खत्म हो जाते हैं। 

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3. वायरल पोस्ट:  चीन के सैकड़ों नागरिकों ने इस्लाम धर्म कबूल किया है, क्योंकि कोरोनावायरस मुस्लिमों को अपना शिकार नहीं बना रहा।
सच: कोई अध्ययन ऐसा नहीं है, जो यह कहता हो कि इस वायरस का किसी धर्म से संबंध है।

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4. वायरल पोस्ट: थाईलैंड के डॉक्टरों ने कोरोनावायरस के संक्रमित मरीज को पूरी तरह ठीक कर लिया है। मरीज को 48 घंटे के अंदर एंटी-एचआईवी ड्रग से ठीक करने का दावा किया गया है। 

सच: कोरोनावायरस के मरीज को 48 घंटे में पूरी तरह से ठीक करने का दावा गलत है। 2 फरवरी 2020 को थाइलैंड की पब्लिक हेल्थ मिनिस्ट्री ने प्रेस कॉफ्रेंस में इस मामले की जानकारी दी थी। उनका कहना था मरीज को दवा देने के 48 घंटे में उसकी हालत में सुधार देखने को मिला।

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5. वायरल पोस्ट: वीडिया वायरल कर दावा किया गया कि चीनी सरकार ने वायरस से पीड़ित लोगों को मारना शुरू कर दिया है। 
सच:  वायरल वीडियो फर्जी निकला। रिपोर्ट के मुताबिक, यह वीडियो यिवु शहर का है। जहां, पागल कुत्ते को मारने के लिए कार्रवाई की गई थी। चाइना ग्लोबल टेलीविजन नेटवर्क ने भी इस वीडियो को फर्जी बताया। 

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6. वायरल पोस्ट: लहसुन से कोरोनावायरस के इलाज का दावा किया गया
सच: कोरोनावायरस के इलाज को लेकर अभी तक कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल सकी है। डब्ल्यूएचओ ने इस संबंध में निर्देश भी जारी किए। डब्ल्यूएचओ ने ट्वीट किया, लहसुन से कोरोनावायरस के इलाज के कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिले हैं। 

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7. वायरल पोस्ट: भारत सरकार ने होली पर चीन से आया सामना न खरीदने की अपील की। 
सच: भारत सरकार ने ऐसी कोई एडवाइजरी जारी नहीं की है। डब्ल्यूएचओ ने भी ऐसे कोई निर्देश नहीं दिए हैं। 

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8. वायरल पोस्ट: वायरल वीडिया में दावा किया गया कि चीन ने कोरोनावायरस को फैलने से रोकने के लिए सड़क बंद कर दी।
सच: दावा फर्जी निकला। चीन में कोरोना के डर से किसी सड़क को बंद नहीं किया गया। 

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9. वायरल पोस्ट: भारत ने कोरोनावायरस का इलाज खोज निकाला है।
सच: एक भ्रामक खबर से सोशल मीडिया में अफवाह उड़ाई गई। भारत भी अब तक कोरोनावायरस का इलाज नहीं ढूंढ सका है। 

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10. वायरल पोस्ट: सोशल मीडिया पर कार्टून प्रोग्राम ‘द सिम्पसन्स’ का फोटो वायरल हुआ। दावा किया गया कि इस सीरीज ने 1993 में ही इस वायरस के संकेत दे दिए थे।
सच: ‘द सिम्पसन्स’ के कोरोनावायरस का अनुमान लगाने की बात फर्जी निकली। अंग्रेजी वेबसाइट स्नोप्स के अनुसार, यह फोटो 1993 में आए सीजन-4 के एपिसोड-21 का है। इसमें ओसाका फ्लू का जिक्र था, न कि कोरोना वायरस का। 
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