फैक्ट चेक / इंजेक्शन लगाकर मुस्लिम लड़कियों को बांझ बनाने का दावा झूठा, चेचक-खसरे से बचाता है बदनाम हुआ इंजेक्शन



does mr vaccine makes girls infertile
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क्या वायरल : केरल में ये इंजेक्शन स्कूलों में सिर्फ मुस्लिम लड़कियों को दिया जा रहा है। इसके साइड इफेक्ट ये हैं कि इसके बाद लड़की को कभी औलाद नहीं होगी
क्या सच: वास्तव में MR-VAC चेचक-खसरा के वायरस से बचाने वाला टीका है और बांझपन से इसका लेना-देना नहीं

Dainik Bhaskar

Jul 17, 2019, 11:28 AM IST

फैक्ट चेक डेस्क. सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है। इसमें मुस्लिम लड़कियों को इंजेक्शन के जरिए बांझ बनाने का दावा किया जा रहा है। दैनिक भास्कर प्लस ऐप के एक पाठक ने हमें इस खबर की पुष्टि करने की बात कही। पड़ताल में पता चला कि वायरल की जा रही इस खबर की सच्चाई कुछ और ही है। 

 

क्या वायरल

  • इंडिया के केरल में ये इंजेक्शन स्कूलों में सिर्फ मुस्लिम लड़कियों को दिया जा रहा है। इसके साइड इफेक्ट ये हैं कि इसके बाद लड़की को कभी औलाद नहीं होगी। आप से गुजारिश है कि इस फोटो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। 
  • इस फोटो में कुछ लड़कियां बेहोश नजर आ रही हैं। 
  • इसके साथ में जिस दवाई की फोटो शेयर की जा रही है, उसका नाम MR-VAC है। 
इसके साथ में जिस दवाई की फोटो शेयर की जा रही है, उसका नाम MR-VAC है

 

क्या है सच्चाई

  • इस वायरल पोस्ट की पड़ताल के लिए हमने गूगल पर रिवर्स सर्च किया तो इससे जुड़ा कुछ नहीं मिला। फिर पोस्ट में लिखी बातों से जुड़े कीवर्ड्स डाले तो वायरल हुई इमेज की तस्वीरें मिलीं। 
  • फिर हमने MR-VAC को गूगल पर सर्च किया तो पता चला कि यह बच्चों को चेचक, खसरा से बचाने वाला टीका है। यह खासतौर पर छोटे बच्चों को लगाया जाता है, ताकि वे चेचक-खसरा के वायरस का शिकार न हों। 
यह चेचक-खसरे के वायरस से बचाने वाली दवा है।
  • सर्चिंग के दौरान ही हमें भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर का एक पत्र भी मिला। इसमें खसरा-रूबेला कैंपेन को बढ़ाने की बात लिखी गई है। इसमें लिखा गया है कि खसरा से मुक्ति पाने के लिए भारत सरकार ने खसरा-रूबेला (MR) टीकाकरण कैंपेन शुरू किया है।
  • देशभर के 9 महीने से लेकर 15 साल तक के बच्चे को यह टीका लगाना है। 7 अगस्त 2017 को जारी किए गए इस पत्र में देशभर के 41 करोड़ बच्चों को यह टीका लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। 
देशभर के 41 करोड़ बच्चों को यह टीका लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। 

 

  • गूगल सर्च से यह भी पता चला कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी इसका उत्पादन करती है। यह दुनिया की सबसे बड़ी टीका उत्पादन कंपनी में से एक है। 
  • भारत के स्कूलों में इस कैंपेन को इसलिए चलाया जाता है कि वहां बच्चे बड़ी संख्या में लाभान्वित हो पाते हैं। 
  • इसका किसी भी धर्म, जाति या समाज से लेनादेना नहीं है। बच्चों को चेचक-खसरा का वायरल अपना शिकार न बना पाए सिर्फ इसलिए यह टीका बच्चों को लगाया जाता है। 
  • इस पड़ताल से यह स्पष्ट होता है कि सोशल मीडिया में वायरल की जा रही जानकारी गलत है। 
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