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  • Fact Check : Did Millions Of Shiva Lingas Suddenly Appear In The Sivakashi River In Karnataka?

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फेक vs फैक्ट:कर्नाटक की शिवकाशी नदी में अचानक लाखों शिव लिंग नहीं मिले हैं, वायरल हो रही तस्वीरें कर्नाटक के ही एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल 'सहस्त्रलिंग' की है

6 महीने पहले
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क्या वायरल : सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें शेयर की जा रही हैं। फोटो में कई सारे शिव लिंग नजर आ रहे हैं। इनमें स्पष्ट देखा जा सकता है कि ये शिवलिंग किसी नदी या तालाब के बीच हैं।

तस्वीरों के आधार पर दावा किया जा रहा है कि कर्नाटक की शिवकाशी नदी में पानी कम होने पर अचानक यह शिव लिंग दिखे हैं। दावा है कि इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है।

फोटो के साथ लोग इस तरह के ट्वीट कर रहे हैं

फेसबुक पर भी फोटो को कर्नाटक की शिवकाशी नदी में अचानक निकले लाखों शिवलिंगों का बताकर ही शेयर किया जा रहा है

फैक्ट चेक पड़ताल

  • फोटो को गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च करने से उत्तरकन्नड़ जिले की आधिकारिक वेबसाइट हमारे सामने आई। यहां पर्यटन स्थलों की एक सूची है। इस सूची में तीसरे नंबर पर सहस्त्रलिंग Sahastralinga का नाम है। ​​​​​​उत्तरकन्नड़ कर्नाटक राज्य का एक जिला है। जिसकी सीमाएं गोआ से लगती हैं। वेबसाइट पर सहस्त्रलिंग की जो एक फोटो दी गई है। वह वायरल हो रही उन फोटो से मेल खा रही है, जिन्हें अचानक मिले शिव लिंग बताया जा रहा है।
  • गूगल पर Sahastralinga Karnataka कीवर्ड से इमेज सर्च करने पर स्पष्ट होता है कि शिवकाशी नदी के नाम से वायरल हो रही फोटो सहस्त्रलिंग की ही हैं।

क्या है सहस्त्रलिंग ?

  • सहस्त्रलिंग संस्कृत शब्द है। इसका हिंदी में अर्थ होता है 1000 लिंग ( इस परिपेक्ष्य में समझें तो 1000 शिव लिंग)।
  • उत्तरकन्नड़ प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, चट्‌टानों के बीच बहती शालमला नदी के बीच हजारों शिव लिंग हैं। ऐतिहासिक तथ्य बताते हैं कि राजा अरसप्पा नायक ने ये शिव लिंग अपने वंशजों के लिए बनवाए थे। हर साल नवरात्रि पर हजारों शिव भक्त इन शिवलिंगों के दर्शन करने आते हैं।

वायरल पोस्ट में किए गए दावे और उनका सच

  • पहला दावा : शिव लिंग शिवकाशी नदी के हैं

सच : फोटो में दिख रहे शिवलिंग कर्नाटक की शालमला नदी के हैं।

  • दूसरा दावा : नदी में लाखों शिव लिंग हैं

सच : लाखों शिव लिंग होने की बात भ्रामक है। सहस्त्रलिंग नाम से स्पष्ट होता है कि नदी में लगभग 1000 शिव लिंग हैं।

  • तीसरा दावा : शिव लिंग इतिहास में पहली बार देखे गए हैं

सच : उत्तरकन्नड़ पर्यटन के अनुसार हर साल हजारों शिव भक्त इन शिव लिंगों के दर्शन करने आते हैं। जाहिर इन्हें इतिहास में पहली बार नहीं देखा गया है।

निष्कर्ष : सोशल मीडिया पर शिव लिंगों की फोटो के साथ किया जा रहा दावा भ्रामक है।

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