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  • Fact Check : Did The WHO Approved The Indian Student's Prescription For Corona Treatment With Ginger And Honey? Fake Message Gets Viral Again

फेक vs फैक्ट:क्या WHO ने भारतीय छात्र के अदरक और शहद से कोरोना के इलाज वाले नुस्खे को मंजूरी दे दी है ? फेक मैसेज दोबारा हो रहा वायरल

एक वर्ष पहले
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  • दावा : पॉन्डिचेरी यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले रामू नाम के भारतीय छात्र ने कोविड-19 का घरेलू इलाज खोजा
  • सच्चाई : WHO और भारत सरकार ने इस दावे को फेक बताया

क्या वायरल : पिछले एक सप्ताह से सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया जा रहा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO) ने भारतीय छात्र द्वारा ईजाद किए गए कोरोना वायरस के घरेलू इलाज को मंजूरी दे दी है। दावा है कि पॉन्डिचेरी यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले रामू नाम के भारतीय छात्र ने शहद, काली मिर्च और अदरक से कोरोना वायरस का इलाज खोजा था। अब पूरी दुनिया इस इलाज को कारगर मान रही है।

  • एक तरफ जहां रूस ने दुनिया की पहली कोविड-19 वैक्सीन बना ली है। वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर कोविड-19 के घरेलू उपचार को WHO की अनुमति मिलने का दावा किया जा रहा है।

वायरल मैसेज

Finally a INDIAN student from PONDICHERRY university, named RAMU found a home remedy cure for Covid-19 which is for the very first time accepted by WHO.- He proved that by adding 1 tablespoon of black pepper powder to 2 table spoons of honey and some ginger juice for consecutive 5 days would

suppress the effects of corona. And eventually go away 100%

Entire world is starting to accept this remedy. Finally a good news In 2020!!

PLEASE CIRCULATE THIS INFORMATION TO ALL YOUR FAMILY MEMBERS AND FRIENDS.

वायरल मैसेज का हिंदी अनुवाद

आखिरकार पॉन्डिचेरी विश्वविद्यालय के रामू नाम के भारतीय छात्र ने कोविड -19 के लिए एक घरेलू उपचार खोज लिया। WHO ने इसे स्वीकार भी कर लिया है। उन्होंने साबित किया है कि 1 बड़ा चम्मच काली मिर्च पाउडर में 2 टेबलस्पून शहद और कुछ जोड़कर लगातार 5 दिनों तक अदरक का रस कोरोना के प्रभाव को दबा देगा।

संपूर्ण विश्व इस उपाय को स्वीकार करने लगा है। अंत में एक अच्छी खबर 2020 में !!

सोशल मीडिया पर इस तरह के दावे किए जा रहे हैं

फैक्ट चेक पड़ताल

  • इंटरनेट पर हमें ऐसी कोई खबर नहीं मिली जिससे सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावे की पुष्टि होती हो।
  • काली मिर्च से कोविड-19 का इलाज होने वाली बात को WHO पहले ही फेक बता चुका है।
  • पिछले महीने भी यही मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। तब दैनिक भास्कर की फैक्ट चेक टीम ने इस दावे की पड़ताल की थी। पड़ताल में यह दावा फेक साबित हुआ था। ( यहां पढ़ें पिछली पड़ताल)
  • 11 अगस्त को भारत सरकार ने भी पॉन्डिचेरी के छात्र के सुझाए इलाज को WHO की अनुमति मिलने वाले वायरल मैसेज को फेक बताया है। सरकार के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पीआईबी फैक्ट चेक से इस मैसेज का खंडन किया गया है।

निष्कर्ष : WHO ने अदरक, काली मिर्च और शहद को कोरोना के इलाज के लिए कारगर नहीं माना है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा मैसेज फेक है।

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