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फैक्ट चेक / कांग्रेस प्रवक्ता ने 'न्यू इंडिया का सच' नाम से जिस महिला और बच्चे को दिखाया वह 8 साल पुराना नेपाल में छपा फोटो है

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  • क्या वायरल: 'न्यू इंडिया का सच' शीर्षक से कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने 18 मई को एक फोटो पोस्ट करके उसे मजदूरों के पलायन से जोड़ा था
  • सच्चाई: वास्तव में ये फोटो नेपाल का है, इसे 2012 में वहां के फोटोग्राफर नरेंद्र श्रेष्ठा ने खींचा था और महिला भी नेपाली ही है, भारत में पीआईबी ने इसे फेक बताया

दैनिक भास्कर

May 21, 2020, 10:45 AM IST

देश में चल रहे मजदूरों की घर वापसी के दौरान उनके दर्द और तकलीफों को दिखाती कई तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं। इनमें से कई पूरी तरह से फेक तस्वीरें हैं। ऐसी ही फेक तस्वीर कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने दो दिन पहले अपने ट्विटर अकाउंट से पोस्ट की थी। यह एक साइकिल सवार महिला की तस्वीर थी जिसने पीठ पर दुपट्‌टे में अपने बच्चे को बांध रखा था। इसे सुरजेवाला ने न्यू इंडिया का सच' लिखकर पोस्ट किया था। हालांकि, कुछ देर बाद गलती समझ आने के बाद उन्होंने बिना कारण उसे डिलीट भी कर दिया।
वास्तव में यह तस्वीर भारत की नहीं है। इंटरनेट पर रिवर्स सर्च करने और यूजर्स की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर स्पष्ट है कि ये तस्वीर नेपाल की है और 8 साल पुरानी है।

क्या वायरल

न्यू इंडिया का सच! टाइटल देकर सुरजेवाला के अकाउंट से 18 मई को रात के 11 बजकर 38 मिनट पर ये तस्वीर पोस्ट हुई थी। हालांकि कुछ समय बाद उन्होंने इसे बिना कारण बताए डिलीट कर दिया था लेकिन तब तक सैकड़ों पर रीट्वीट किया जा चुका था।  

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने यही तस्वीर पोस्ट की गई थी।
  •  कुछ यूजर्स ने भी इसे सच मानकर आगे फैलाना शुरू कर दिया था।

फैक्ट चेक पड़ताल

  • इस इमेज को गूगल के टूल रिवर्स इमेज सर्च करने से जो तस्वीर निकल कर आती है वह नेपाल की है। यह तस्वीर 3 जुलाई, 2012 को नेपालगंज में नरेंद्र श्रेष्ठा नाम के फोटोग्राफर ने यूरोपीयन प्रेस फोटो एजेंसी (EPA) के लिए खींची थी।

  • तस्वीर के साथ लिखे कैप्शन के मुताबिक, ‘यह तस्वीर एक नेपाली मां की है जिसने पीठ पर अपने बच्चे को बांधा हुआ है। 29 जून, 2012 की इस तस्वीर में यह महिला काठमांडू से करीब 573 किलोमीटर दूर स्थित नेपालगंज की ओर साइकल चलाकर जा रही थी। नेपालगंज में पहाड़ी रास्ते होने के कारण साइकल ही आने-जाने का बड़ा साधन है। 

यूरोपीयन प्रेस फोटो एजेंसी के फोटोग्राफर नरेंद्र श्रेष्ठा की उतारी गई तस्वीर की डिटेल। 
  • प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो ने अपने फैक्ट चेक हैंडल पर भी इस तस्वीर की सच्चाई बताई गई है। 19 मई को पीआईबी ने भी इस खबर को फेक बताया है और ट्वीट करके कहा है कि ये तस्वीर भारत की नहीं है और पुरानी है।

निष्कर्ष: मजदूरों के नाम पर पीठ पर दुपट्‌टे में अपने बच्चे को बांधकर जिस महिला की तस्वीर भारत के नाम पर वायरल किया जा रहा है, वह नेपाल की है और 2012 की है। आपके पास भी ऐसी तस्वीर आए तो उसे फॉरवर्ड करने से बचें।

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